नियद नेल्लानार योजना से चमक रही मजदूरों की किस्मत: सुकमा के श्रमिकों ने थामी 'करनी' और 'फीता', मज़दूरी छोड़ अब बनेंगे राजमिस्त्री

सीएम विष्णुदेव साय की पहल पर मनरेगा के अकुशल श्रमिक अब 'राजमिस्त्री' बनकर अपने भविष्य की नई नींव रख रहे हैं। अब वे मजदूरी छोड़कर राजमिस्त्री बनेंगे।

Updated On 2026-01-14 21:20:00 IST

मजदूर बन रहे राजमिस्त्री 

लीलाधर राठी- सुकमा। छत्तीसगढ़ के सुकमा जिले में मुख्यमंत्री विष्णुदेव साय की पहल पर एक ऐसी ही बदलाव की कहानी लिखी जा रही है, जहां मनरेगा के अकुशल श्रमिक अब 'राजमिस्त्री' बनकर अपने भविष्य की नई नींव रख रहे हैं। कल तक जिनके हाथों में केवल मिट्टी ढोने और खुदाई करने वाली कुदाल हुआ करती थी, आज उन्हीं हाथों में नाप-जोख का फीता और करनी है।

अकुशल श्रम से 'कुशल' पहचान की ओर
सुकमा जिला प्रशासन ने एक अनूठी पहल करते हुए मनरेगा में पंजीकृत उन श्रमिकों को चुना है, जो अब तक केवल शारीरिक श्रम तक सीमित थे। पंचायत एवं ग्रामीण विकास विभाग के समन्वय से जिला ग्रामीण स्वरोजगार केंद्र (आरसेटी) में चल रहे इस विशेष प्रशिक्षण शिविर में 30 ऐसे ही हितग्राहियों को राजमिस्त्री (मेसन) बनने की बारीकियां सिखाई जा रही हैं। यह सिर्फ ईंट और गारे का काम नहीं है, यह हमारे स्वाभिमान की बात है। अब हमें काम के लिए दूसरों पर निर्भर नहीं रहना होगा और हमारी कमाई भी पहले से ज्यादा होगी।  


पीएम आवास योजना को मिलेगी 'स्थानीय' मजबूती
जिले में प्रधानमंत्री आवास योजना (ग्रामीण) के तहत वर्ष 2024-26 के लिए 25,974 आवास स्वीकृत किए गए हैं। इतने बड़े पैमाने पर हो रहे निर्माण के लिए जिले को दक्ष राज मिस्त्रियों की सख्त जरूरत थी। कलेक्टर श्री अमित कुमार और जिला पंचायत सीईओ श्री मुकुन्द ठाकुर के मार्गदर्शन में शुरू हुआ यह प्रशिक्षण दो लक्ष्यों को एक साथ साध रहा है। स्थानीय रोजगार- ग्रामीणों को अपने ही गांव के पास सम्मानजनक काम मिलेगा। गुणवत्तापूर्ण निर्माण- प्रशिक्षित मिस्त्री आवासों का निर्माण पीएम योजना के मानकों के अनुरूप बेहतर तरीके से कर सकेंगे।

आय में वृद्धि और बेहतर भविष्य
प्रशिक्षण के दौरान इन श्रमिकों को ईंट-चिनाई, प्लिंथ से छत तक की तकनीक, गुणवत्ता नियंत्रण और सुरक्षा उपायों की व्यावहारिक जानकारी दी जा रही है। अकुशल मजदूर से राज मिस्त्री बनने का यह सफर उनकी आर्थिक स्थिति में बड़ा बदलाव लाएगा। अब उन्हें दैनिक मजदूरी के मुकाबले अधिक पारिश्रमिक मिलेगा, जिससे उनके परिवारों का जीवन स्तर ऊंचा उठेगा। 


आत्मनिर्भरता का उत्कृष्ट मॉडल
यह पहल मनरेगा, पीएम आवास योजना और कौशल विकास के 'त्रिवेणी संगम' का बेहतरीन उदाहरण है। सुकमा जैसे सुदूर अंचल में शुरू हुई यह कोशिश न केवल 'आत्मनिर्भर भारत' के सपने को सच कर रही है, बल्कि उन हाथों को हुनरमंद बना रही है जो कल तक केवल मदद की उम्मीद रखते थे। अब ये श्रमिक दूसरों के घरों को ही नहीं, बल्कि अपने सपनों को भी मजबूती प्रदान करेंगे।

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