'बस्तर पंडुम' का भव्य आगाज: जनजातीय संस्कृति और लोककला की दिखेगी रंगीन झलक
रायपुर में बस्तर पंडुम का तीन चरणों में होने वाले इस महोत्सव में माड़िया, मुरिया, गोंड, हल्बा, जैसी कला की शानदार प्रस्तुति देखने को मिलेगी।
बस्तर संस्कृति (File Image)
रायपुर। जनजातीय संस्कृति, परंपरा और लोकजीवन की रंगीन छटा बिखरने वाला बस्तर का सबसे बड़ा सांस्कृतिक उत्सव 'बस्तर पंडुम' शनिवार से पूरे उत्साह और उमंग के साथ शुरू हो रहा है। आदिवासी विरासत, लोककला और परंपराओं को सहेजने और नई पीढ़ी तक पहुंचाने के उद्देश्य से आयोजित यह महोत्सव तीन चरणों में संपन्न होगा।
बस्तर पंडुम का आयोजन पहले ग्राम पंचायत स्तर, इसके बाद विकासखंड एवं जिला स्तर, और अंत में संभाग-राज्य स्तरीय भव्य समापन समारोह के रूप में किया जाएगा। इस आयोजन में बस्तर संभाग के सुदूर अंचलों से आने वाले आदिवासी कलाकार, शिल्पकार, लोकगायक और नृत्य दल अपनी प्रतिभा का प्रदर्शन करेंगे। महोत्सव के दौरान माड़िया, मुरिया, गोंड, हल्बा, भतरा सहित विभिन्न जनजातियों के पारंपरिक लोकनृत्य, लोकगीत और हस्तशिल्प प्रदर्शनी आकर्षण का केंद्र रहेंगे।
दिल्ली में राष्ट्रपति द्रौपदी मुर्मु से मिले सीएम साय
वहीं मुख्यमंत्री विष्णु देव साय 3 जनवरी को दिल्ली दौरे पर थे। सीएम साय ने राष्ट्रपति द्रौपदी मुर्मु से मुलाकात कर उन्हें 'बस्तर पंडुम 2026' में आमंत्रित किया। राष्ट्रपति द्रौपदी मुर्मु ने आयोजन के लिए शुभकामनाएं दीं।
जनजातीय सांस्कृतिक महोत्सव ‘बस्तर पंडुम'
मुख्यमंत्री साय ने राष्ट्रपति को छत्तीसगढ़ में आयोजित होने वाले राज्यस्तरीय जनजातीय सांस्कृतिक महोत्सव ‘बस्तर पंडुम 2026’ में मुख्य अतिथि के रूप में शामिल होने का आमंत्रण दिया। यह आयोजन तीन चरणों में आयोजित किया जाएगा, जिसका अंतिम चरण फरवरी 2026 में बस्तर में संपन्न होगा। राष्ट्रपति द्रौपदी मुर्मु ने जनजातीय संस्कृति से जुड़े इस आयोजन की सराहना करते हुए बस्तर पंडुम 2026 के सफल आयोजन के लिए शुभकामनाएं दीं।