धान खरीदी में परेशानियों का हल: छूटे किसानों का हो सकेगा नया पंजीयन, 15 से 31 जनवरी तक का समय
छत्तीसगढ़ में खरीफ सीजन 2025-26 के दौरान किसानों को न्यूनतम समर्थन मूल्य पर धान बेचने में आ रही परेशानियों का हल अब निकलने की संभावना बनी है।
File Photo
रायपुर। छत्तीसगढ़ में खरीफ सीजन 2025-26 के दौरान किसानों को न्यूनतम समर्थन मूल्य पर धान बेचने में आ रही परेशानियों का हल अब निकलने की संभावना बनी है। कृषि विभाग ने किसानों की मांगों और परेशानियों के मद्देनजर राजस्व विभाग द्वारा की गई गिरदावरी एवं भौतिक सत्यापन के आधार पर जिला कलेक्टर की अनुशंसा पर नवीन पंजीयन और पूर्व में पंजीकृत किसानों के डाटा को कैरी फारवर्ड के लिए अतिरिक्त समय देने का आदेश जारी किया है।
अब जारी हुआ ये आदेश
इस मामले को लेकर राज्य सरकार के कृषि एवं किसान कल्याण विभाग ने आदेश जारी किया है। यह आदेश, सचिव वन एवं जलवायु परिवर्तन विभाग, सचिव राजस्व एवं आपदा प्रबंधन, सचिव खाद्य एवं नागरिक आपूर्ति, सचिव सहित राज्य के सभी कलेक्टरों के लिए दिया गया है।
अब किस तारीख तक हो सकेंगे कौन से काम
कृषि विभाग ने किसानों के धान बेचने संबंधी मामले को लेकर आ रही शिकायतों के मद्देनजर पांच बिंदुओ के आधार पर समाधान निकालने की कोशिश की है। अब ये काम इस तारीख तक हो सकेंगे। कैरी फारवर्ड 15 जनवरी तक, वन अधिकार पट्टाधारी कृषकों का नवीन पंजीयन 15 जनवरी तक, 26 तक, सभी प्रकार के संशोधन 31 जनवरी तक. त्रुटि पूर्ण आधार के प्रकरण में पूर्व पंजीयन निरस्त कर नवीन पंजीयन 15 जनवरी तक, राजस्व विभाग द्वारा की गई गिरदावरी एवं भौतिक सत्यापन के आधार पर जिला कलेक्टर की अनुशंसा पर नवीन पंजीयन भी 15 जनवरी तक हो सकेगा।
किसानों के आग्रह पर ये कदम
कृषि विभाग द्वारा जारी आदेश में कहा गया है कि राजस्व विभाग के अधिकारियों, पटवारियों द्वारा किए गये भौतिक सत्यापन के बाद विवरण संशोधन का प्रावधान 7-जनवरी-2026 तक समस्त समितियों में समिति लॉगिन में किया गया है। इसके अलावा अतिरिक्त कृषकों के खसरा, रकबा सुधार, कैरी फारवर्ड, फसल विवरण की प्रविष्टि, नवीन पंजीयन, रकबा संशोधन आदि कार्यवाही के लिए निरंतर अनुरोध किया जा रहा है। इसे देखते हुए एकीकृत किसान पोर्टल में इन कार्यों हेतु समस्त समितियों में समिति लॉगिन में प्रावधान किया जा रहा है।
किसानों की परेशानियों की हैं ये कहानियां
राज्य के अलग-अलग जिलों से धान बेचने में आ रही परेशानियों का सिलसिला कई दिनों से चल रहा है। धान खरीदी शुरु होने के बाद सिस्टम लॉक होने के बाद किसानों को काफी परेशानी हो रही थी, जैसे अगर उन्होंने पिछले साल धान बेचा है, तो इस साल उनका डाटा कैरी फारवर्ड नहीं हो रहा था। कुछ किसान जिनका स्वर्गवास धान खरीदी होने के समय ही हो गया तो उनका धान बिक पाना मुश्किल हो गया था। इसके लिए वारिसन पंजीयन कराना आवश्यक था। कुछ किसानों की जमीनें अलग-अलग गांवों में है लेकिन उनका रकबा सिस्टम में जुड़ नहीं पा रहा है. इसकी वजह से किसान धान बेच नहीं पा रहे थे। इस प्रकार किसी किसान ने नाई जमीन खरीद ली है, लेकिन उसके नाम पंजीयन नहीं पाया था। बड़ी संख्या में किसान एप के माध्यम से हुई गिरदावरी से संकट में आ गए थे। इस तकनीकी गिरदावरी में दिक्कत ये है कि जिस जमीन पर धान बोया गया है उसे पड़त भूमि बता दिया गया है। कुछ जमीने जो पड़त की है वहां धान बोना बता दिया गया है। कई स्थानों पर धान बुवाई का भौतिक सत्यापन यानि फिजिकिल वेरीफिकेशन हीं नहीं है। यह काम राजस्व विभाग पटवारी के माध्यम से करवाता है। लेकिन इस बार ये काम कई जगहों पर नहीं हो पाया। इन तमाम कारणों से किसान भारी परेशानी और संकट में गुहार लगा रहे थे।