ठेकेदारों पर अब कसेगा शिकंजा: रॉयल्टी पर्ची देनी होगी, वरना बिल से राशि काटकर खनिज विभाग को दी जाएगी

नगरीय निकायों में निर्माण से जुड़े ठेकेदारों के लिए आदेश जारी किया गया है कि ठेकेदार को सभी खदानों, रॉयल्टी शुल्क आदि का भुगतान करना होगा।

Updated On 2025-09-19 08:40:00 IST

महानदी भवन (फाइल फोटो)

रायपुर। छत्तीसगढ़ के नगरीय निकायों में निर्माण से जुड़े ठेकेदारों के लिए आदेश जारी किया गया है कि ठेकेदार को सभी खदानों, रॉयल्टी शुल्क आदि का भुगतान करना होगा। यदि ठेकेदार संबंधित विभाग से रॉयल्टी क्लीयरेंस प्रमाणपत्र प्रस्तुत करने में विफल रहता है, तो आयुक्त, सीएमओ उसके बिलों से रॉयल्टी शुल्क काटकर जमा शीर्ष में रखेंगे, जो संबंधित विभाग से रॉयल्टी क्लीयरेंस प्रमाणपत्र प्रस्तुत करने पर ठेकेदार को वापस कर दिया जाएगा।यदि वह अंतिम बिल जमा करने के 30 दिनों के भीतर रॉयल्टी क्लीयरेंस प्रमाणपत्र प्रस्तुत करने में विफल रहता है, तो आयुक्त सीएमओ द्वारा जमा शीर्ष में रखे गए रॉयल्टी शुल्क संबंधित विभाग में जमा कर दिए जाएंगे।

राज्य सरकार के नगरीय प्रशासन एवं विकास विभाग के संचालक ने इस संबंध में प्रदेश के सभी नगर निगम आयुक्त, सभी पालिकाओं और नगर पंचायतों के सीएमओ के लिए आदेश जारी किया है। आदेश में जो बात कही गई है वह दरअसल एक नियम है, इस संबंध में प्रावधान हैं।

तीस दिन में जमा करना होगा रायल्टी प्रमाणपत्र
अनुबंध के प्रावधानों के अनुसार, कार्य में प्रयुक्त खनिज सामग्री पर अधिसूचित दर पर रॉयल्टी की कटौती की जाती है और उसे रोक लिया जाता है। यदि ठेकेदार अंतिम भुगतानकर्ता द्वारा रॉयल्टी भुगतान प्रमाण पत्र प्रस्तुत करने की तिथि से 30 दिनों की अवधि के भीतर रॉयल्टी भुगतान प्रमाण पत्र प्रस्तुत करने में विफल रहता है, तो रोकी गई राशि खनिज विभाग के खाते में जमा करके अंतिम भुगतानकर्ता को भुगतान किया जाएगा। जिन मामलों में ठेकेदार द्वारा रॉयल्टी भुगतान भुगतान प्रमाण पत्र प्रस्तुत नहीं किया गया है, उन मामलों में रॉयल्टी भुगतान प्रमाण पत्र के लिए रोकी गई राशि खनिज विभाग में नियमानुसार जमा कर अंतिम देयक का भुगतान किया जाता है जो अनुबंध के अनुरूप है।

प्रचलित दर के हिसाब से होगी कटौती
आदेश के मुताबिक बोलीदाता, ठेकेदार द्वारा वित्तीय प्रस्ताव प्रस्तुत करने की तिथि के बाद, राज्य सरकार द्वारा अधिसूचित लघु खनिजों की रॉयल्टी दरों में किसी भी प्रकार का परिवर्तन होने पर, दरों में इस वृद्धि या कमी की वास्तविक आधार पर प्रतिपूर्ति या कटौती की जाएगी।

इससे रॉयल्टी चोरी और बढ़ेगी
इस मामले में खनिज विभाग के सूत्रों की मानें तो इस आदेश से खनिज रॉयल्टी की चोरी और बढ़ेगी। गौण खनिज नियम 71 ख के हवाले से बताया गया है कि प्रावधान ये है कि अगर ठेकेदार रॉयल्टी परची जमा नहीं करता है तो उससे बाजार मूल्य के बराबर राशि वसूल की जाए। यह राशि रॉयल्टी के मुकाबले तीन गुना अधिक होती है। इस संबंध में खनिज विभाग पहले ही परिपत्र जारी कर चुका है। अब खनिज विभाग के सूत्रों ने आशंका जताई है कि नगरीय प्रशासन के परिपत्र से अवैध खनन को बढ़ावा मिल सकता है। ठेकेदार रॉयल्टी चोरी वाले माल का उपयोग करने के बाद रॉयल्टी की परची अपना बिल पास करवा लेंगे। इससे शासन के खनिज राजस्व की कमी हो सकती है।

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