बस्तर कलेक्टर का विद्यार्थियों से सीधा संवाद: प्रतियोगी परीक्षाओं के टिप्स किये साझा, बोले- हार अंत नहीं, बल्कि है शुरुआत

भारतीय रेड क्रॉस सोसायटी के तत्वावधान में आयोजित संवाद कार्यक्रम में बस्तर कलेक्टर हरीश एस ने साढ़े चार छात्र-छात्राओं से सीधा संवाद कर उन्हें टिप्स दिए।

Updated On 2026-01-17 20:31:00 IST

बच्चों को टिप्स देते कलेक्टर हरीश एस 

अनिल सामंत- जगदलपुर। परीक्षा के मौसम में जब असफलता का डर छात्रों के आत्मविश्वास को तोड़ देता है, उसी समय बस्तर में एक ऐसी पहल सामने आई, जिसने सैकड़ों युवाओं की आंखों में फिर से सपने जगा दिए। भारतीय रेड क्रॉस सोसायटी के तत्वावधान में आयोजित इस विशेष संवाद कार्यक्रम में बस्तर कलेक्टर हरीश एस ने लगभग साढ़े चार सौ स्कूली और महाविद्यालयीन छात्र-छात्राओं से सीधा संवाद किया। यह कोई औपचारिक भाषण नहीं, बल्कि जीवन की सच्चाइयों से भरा ऐसा संवाद था, जिसने बच्चों को यह समझा दिया कि एक परीक्षा का परिणाम जीवन की अंतिम लकीर नहीं होता।

कार्यक्रम का सबसे भावुक और प्रेरणादायक क्षण तब आया, जब कलेक्टर हरीश एस ने अपनी जिंदगी की वह सच्चाई साझा की, जिसे बहुत कम लोग जानते हैं। उन्होंने बताया कि वे डॉक्टर बनना चाहते थे। लेकिन मेडिकल प्रवेश परीक्षा में महज 0.75 अंकों से चूक गए। यह वह पल था, जिसने उनके सपनों को तोड़ दिया। करियर विकल्पों की सही जानकारी न होने के कारण उन्होंने मजबूरी में मैकेनिकल इंजीनियरिंग की और बाद में एक सॉफ्टवेयर कंपनी में नौकरी भी कर ली, जिसका उनकी पढ़ाई से कोई सीधा संबंध नहीं था।

चार साल व्यर्थ चले गए, लेकिन हार नहीं मानी
उन्होंने साफ कहा कि उनके जीवन के चार साल व्यर्थ चले गए,लेकिन उन्होंने हार नहीं मानी। खुद को टटोला,अपनी कमजोरियों को समझा, यूपीएससी की तैयारी शुरू की और अंततः आईएएस बनकर देश की सेवा के रास्ते पर निकल पड़े। कलेक्टर हरीश एस ने छात्रों को यह भी समझाया कि सफलता की कोई उम्र नहीं होती। कोई 30 साल में सफल होता है,तो कोई 50 में लेकिन जो व्यक्ति लगातार प्रयास करता है, उसकी जीत तय होती है। उन्होंने कहा कि असफलता कोई दीवार नहीं,बल्कि वह सीढ़ी है, जिससे चढ़कर ही इंसान ऊंचाई तक पहुंचता है। 


बस्तर के युवाओं की सोच सीमित नहीं
उन्होंने बस्तर के युवाओं की सीमित सोच पर भी चिंता जताई। कलेक्टर हरीश एस ने कहा कि यहां के अधिकांश बच्चे अपने भविष्य को केवल पांच विकल्पों में समेट देते हैं पुलिस, शिक्षक, डॉक्टर, इंजीनियर या सरकारी कर्मचारी। उन्होंने छात्रों को आगाह किया कि आज का युग स्टार्टअप,इनोवेशन और उद्यमिता का है। बस्तर का असली विकास सड़क, पुल या इमारतों से नहीं, बल्कि यहां की आने वाली पीढ़ी की सोच से होगा। उन्होंने बच्चों से कहा कि वे इंटरनेट, शिक्षकों और मार्गदर्शकों की मदद से अपनी वास्तविक रुचि पहचानें, ताकि वे नौकरी मांगने वाले नहीं, बल्कि नौकरी देने वाले बनें।

परीक्षा की तैयारी से जुड़े व्यवहारिक टिप्स साझा किए
कार्यक्रम में सहायक कलेक्टर विपिन दुबे ने भी परीक्षा की तैयारी से जुड़े व्यावहारिक टिप्स साझा किए। उन्होंने बताया कि दबाव में नहीं,बल्कि शांत मन और सही रणनीति के साथ की गई पढ़ाई ही असली सफलता दिलाती है। पूरे कार्यक्रम स्थल पर लगे बैनरों जीवन बहुत बड़ा है,एक परीक्षा सब कुछ नहीं’ और ‘डर के आगे जीत है ने वातावरण को सकारात्मक ऊर्जा से भर दिया।

माता-पिता बच्चों के बेहतर भविष्य के लिए डालते हैं दबाव
बस्तर कलेक्टर हरीश एस ने अभिभावकों और बच्चों के रिश्ते पर भी बड़ी संवेदनशील बात कही। उन्होंने कहा कि माता-पिता का दबाव उनके सपनों से नहीं, बल्कि बच्चों के बेहतर भविष्य की चिंता से जुड़ा होता है। कम नंबर आने पर किस्मत को दोष देने के बजाय, अपनी तैयारी का विश्लेषण करना ही सच्ची समझदारी है। यह कार्यक्रम प्रशासन और रेड क्रॉस की एक ऐसी मुहिम बनकर उभरा,जिसने छात्रों के भीतर ‘नेवर गिव अप’ की लौ जला दी।

0.75 अंक से चूके, लेकिन हार नहीं मानी
डॉक्टर बनने का सपना, 0.75 अंक से असफलता, मजबूरी में इंजीनियरिंग, मनपसंद नहीं थी नौकरी, चार साल खुद को भटकता महसूस किया। लेकिन यहीं से संघर्ष की असली कहानी शुरू हुई। हार मानने के बजाय बस्तर कलेक्टर हरीश एस. ने यूपीएससी की राह पकड़ी और आज वे हजारों युवाओं के लिए प्रेरणा बन चुके हैं। उनकी कहानी बताती है कि असफलता मंज़िल नहीं, बल्किसफलता की पहली सीढ़ी होती है।

ये अधिकारी रहे उपस्थित
इस दौरान अनुविभागीय दंडाधिकारी गगन शर्मा, जिला शिक्षा अधिकारी बीआर बघेल, तहसीलदार जॉली जेम्स, जनपद पंचायत सीईओ भानुप्रताप चुरेंद्र, खंड शिक्षा अधिकारी भारती देवांगन, खंड चिकित्सा अधिकारी डॉ नारायण नाग, मुख्य नगरपालिका अधिकारी तरुणपाल लहरे, एबीईओ सुशील तिवारी, रेडक्रॉस जिला उपाध्यक्ष अलेक्जेंडर चेरियन सहित बड़ी संख्या में शिक्षक, अभिभावक और छात्र उपस्थित रहे।

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