हाईकोर्ट पहुंचा ग्रीन गुफा का मामला: प्रवेश द्वार पर गेट, सीढ़ी और पाथवे बनाए जाने के खिलाफ लगाई गई याचिका, कोर्ट ने 16 दिन में मांगा जवाब
बस्तर में स्थित कांकेर वैली नेशनल पार्क के ग्रीन गुफा को लेकर पर्यावरण प्रेमी नितिन सिंघवी ने प्रवेश द्वार पर गेट, सीढ़ी और पाथवे बनाए जाने के खिलाफ याचिका लगाई है।
हाईकोर्ट
पंकज गुप्ते- बिलासपुर। बस्तर में स्थित कांकेर वैली नेशनल पार्क के ग्रीन गुफा का हाईकोर्ट तक पहुंच गया है। सोमवार को पर्यावरण एवं जीव प्रेमी नितिन सिंघवी ने जनहित याचिका लगाई। जिसमें उन्होंने ग्रीन गुफा में प्रवेश द्वार पर गेट, सीढ़ी और पाथवे बनाए जाने के खिलाफ याचिका लगाई है।
याचिका में उन्होंने कहा है कि, निर्माण कार्य से अत्यंत दुर्लभ संरचना को नुकसान होगा। इस पर शासन ने कहा कि, कुछ लोग गुफा में नाम खोद देते हैं, इसलिए संरक्षित किया जा रहा है। दोनों पक्षों को सुनने के बाद कोर्ट ने कहा कि, आम जनता की पहुंच रख सीमित सकते हैं। साथ ही कोर्ट ने नेशनल पार्क संचालक से शपथ पत्र में 18 फरवरी तक जवाब मांगा है।
कांगेर घाटी राष्ट्रीय उद्यान में है ग्रीन गुफा
कांगेर घाटी राष्ट्रीय उद्यान में पहले से ही 11 गुफाओं का समूह मौजूद है, जिनमें से केवल तीन गुफाएं कुटुमसर, कैलाश और दंडक को पर्यटकों के लिए खोला गया है। ग्रीन गुफा जो हाल ही में खोजी गई है, वन विभाग की टीम के लिए एक नई उपलब्धि है। इस गुफा के अंदर 200 मीटर तक पहुंचने के बाद, पानी के जमा होने के कारण टीम को आगे बढ़ने में रुकावट का सामना करना पड़ा। गुफा की संरचना कुटुमसर गुफा से मिलती-जुलती है, जिसकी छत 60 से 80 फीट ऊंची है। गुफा के भीतर चूना पत्थर से बने विशाल स्टैलेक्टाइट्स और स्टैलेग्माइट्स चट्टाने मौजूद हैं, जो इसे एक प्राकृतिक चमत्कार बनाते हैं।