अकलवारा में श्रीमद्भागवत कथा का समापन: आचार्य चतुर्वेदी बोले- कर्मों के अनुसार भुगतना पड़ता है परिणाम
ग्राम अकलवारा में मिश्रा परिवार द्वारा आयोजित श्रीमदभागवत महापुराण के अंतिम दिन आचार्य चतुर्वेदी ने गीता का ज्ञान दिया और बताया की मानव जीवन कर्मभूमि है।
बेमेतरा। छत्तीसगढ़ के बेमेतरा जिले के ग्राम अकलवारा में मिश्रा परिवार द्वारा आयोजित श्रीमदभागवत महापुराण के अंतिम दिन आचार्य बिरेंद्र चतुर्वेदी ने गीता का ज्ञान दिया और बताया की मानव जीवन कर्मभूमि है। सभी को अपने कर्मों के अनुसार परिणाम भुगतना पड़ता है। अतएव सभी प्राणी को अपने कर्म सोच समझकर करना चाहिए। जिस प्रकार हजारों गायों के बीच बछड़ा अपनी मां को ढूंढ लेता है। ठीक उसी प्रकार कर्म भी अपने कर्ता को ढूंढ लेता है।
आचार्य बिरेंद्र चतुर्वेदी ने बताया कि, गीता में कर्म की महिमा बताई गई है। जो जैसा कर्म करता है उसका फल अवश्य ही उसे मिलता है। गीता के रोजाना पाठ से मानव की मुक्ति हो जाती है। उसे मोक्ष प्राप्ति होती है। इसलिए सभी को गीता का पाठ अवश्य करना चाहिए। अंत में ओम नमो भगवते वासुदेवाय मंत्र उच्चारण के साथ तुलसी वर्षा कराई गई। इसी के साथ आचार्य बिरेंद्र चतुर्वेदी ने अपनी वाणी को विराम दिया। संध्या काल में भव्य शोभा यात्रा निकाली गई।
ग्रामवासियों ने पुजा- अर्चना की
वहीं समस्त ग्रामवासी भक्तगण अपने घर के द्वार पर रंगोली सजाकर, पाटा रखकर श्रीमदभागवत महापुराण और बाल गोपाल की पूजा की। गोपाल जी को सत्येंद्र मिश्रा ने और श्रीमदभागवत महापुराण को उनकी धर्मपत्नी किरण मिश्रा ने सिर में धारण कर ग्राम भ्रमण किया। यात्रा भागवत स्थल से प्रारंभ होकर समस्त ग्रामवासी भक्तगणों के द्वार पर पहुंची। जहां पर भक्तों ने गोपाल जी और भागवत महापुराण की दिव्य पूजा आरती की। साथ ही अन्न और वस्त्रदान भी किये।
घरों के द्वार में सजी थी रंगोली और दियें
रात 9 बजे तक शोभा यात्रा मिश्रा परिवार के घर पर कुछ विश्राम के बाद पुनः बाजे और नृत्य के साथ श्रीमद भागवत महापुराण और गोपाल जी को थलज कुमार साहू के घर जहां आचार्य चतुर्वेदी विश्राम करते थे। वहां पर जाकर समाप्त हुई। उस जगह द्वार पर रंगोली और दियें से सजावट की गई थी। थलज कुमार साहू के घर पटाखे और फुलझडियों से गोपाल जी का स्वागत किया गया।
बाल गोपाल की विदाई पर सभी के आंखे हुई नम
समस्त मिश्रा परिवार एवं ग्राम के सभी भक्तगण भागवत महापुराण और बाल गोपाल की विदाई के समय भाव विभोर होकर रोने लगे। ऐसा लगने लगा मानो यह गांव साक्षात वृंदावन बन गया है और वृंदावन के कृष्ण हमारे पास है आज हमें छोड़ जा रहे हैं तो ऐसा लग रहा है जैसे हमारे प्राण ही जा रहे हैं। ऐसा कह कर सभी भाव विभोर हो गए। आचार्य बिरेंद्र चतुर्वेदी ने मिश्रा परिवार और सभी ग्राम वासियों की सेवा, आदर, भक्तिभाव के लिए आभार व्यक्त करते हुए सभी को सुख समृद्धि और कृष्ण की भक्ति का आशीर्वाद दिया। इस प्रकार आज भागवत सप्ताह का धूम धाम से नाच गाने एवं पटाको की आतिशबाजी के साथ विदाई की गई।