डीकेएस हॉस्पिटल में होगा गठिया का इलाज: प्रदेश का पहला सरकारी अस्पताल जहां सेंटर खुला, विशेषज्ञ डॉक्टर की नियुक्ति

अब सरकारी हॉस्पिटल में गठिया का इलाज होगा। डीकेएस हॉस्पिटल में राज्य का पहला सेंटर खुला। रुमेटोलॉजी विशेषज्ञ की नियुक्ति की गई। पहले दिन की ओपीडी में तीन मरीज पहुंचे।

Updated On 2026-01-03 13:35:00 IST

डीकेएस सुपर स्पेशलिटी हॉस्पिटल

रायपुर। नए साल की शुरुआत के साथ राजधानी के डीकेएस सुपरस्पेशलिटी हॉस्पिटल में वात संबंधी रोग (गठिया) के इलाज की सुविधा प्रारंभ की गई है। इसके लिए रुमेटोलॉजी विशेषज्ञ महिला चिकित्सक की नियुक्ति की गई है। शुक्रवार को पहली ओपीडी में तीन मरीज पहुंचे, जिनकी संख्या आने वाले दिनों में बढ़ने की संभावना है। राज्य में रुमेटो संबंधी बीमारियों के इलाज की सुविधा देने वाला डीकेएस पहला हॉस्पिटल होगा।

डीके हास्पिटल में काफी समय पहले रुमेटोलॉजी विभाग प्रारंभकरने की योजना बनाई गई थी। इस आधार पर वहां रुमेटोलॉजी विशेषज्ञ डा. अश्लेषा शुक्ला की नियुक्ति की गई है। डा. शुक्ला प्रतिदिन ओपीडी में आने वाले मरीजों की जांच के बाद आवश्यक इलाज करेंगी। गुरुवार को उनकी ज्वाइनिंग के बाद शुक्रवार से ओपीडी की शुरुआत हुई, जिसमें तीन मरीजों ने आकर अपनी जांच कराई। अस्पताल प्रबंधन का दावा है कि आने वाले दिनों में इस विभाग की ओपीडी में मरीजों की संख्या बढ़ेगी। राज्य के किसी भी मेडिकल कालेज अथवा सरकारी अस्पताल में गठिया रोग के इलाज का विशेषज्ञ नहीं है। इसके लिए सरकारी स्तर पर दूसरे विभाग अथवा निजी हास्पिटल के डाक्टरों के पास जाकर इलाज कराना पड़ता है। ठंड अथवा मौसम में होने वाले बदलाव के दौरान जोड़ों में दर्द के साथ वात से संबंधित समस्या बढ़ जाती है। खासकर बढ़ती उम्र में इस तरह की समस्या अधिक असर दिखाती है।


स्वास्थ्य सचिव ने दिखाई थी दिलचस्पी
पिछले दिनों स्वास्थ्य सचिव अमित कटारिया निरीक्षण के लिए डीके अस्पताल पहुंचे थे। निरीक्षण और चर्चा के दौरान अस्पताल प्रबंधन द्वारा उन्हें अस्पताल में दो विभाग शुरू करने संबंधी योजना के बारे में जानकारी दी गई थी। सचिव ने जनहित को ध्यान में रखते हुए इस संबंध में प्रस्ताव भेजने के निर्देश दिए थे। प्रस्ताव मिलते ही इस पर | सहमति दी गई और अस्पताल प्रबंधन ने चिकित्सक की नियुक्ति कर ओपीडी के माध्यम से इसकी शुरुआत की

मरीजों को मिलेगा लाभ
डीकेएस सुपर स्पेशलिटी हॉस्पिटल के उप अधीक्षक डॉ. हेमंत शर्मा ने बताया कि, रुमेटोलॉजिस्ट की नियुक्ति की गई है। इससे गठिया रोग से पीड़ित मरीजों को जांच और आवश्यक उपचार की सुविधा प्रतिदिन ओपीडी में मिलेगी।

पांच भाषा की जानकार महिला चिकित्सक
रायपुर के अलावा ग्रामीण इलाकों से आने वाले मरीजों के इलाज के लिए रुमेटोलॉजिस्ट डा. अश्लेषा शुक्ला की नियुक्ति की गई है। डीएम इम्यूनोलॉजी एंड रुमेटोलॉजी डा. शुक्ला हिंदी, अंग्रेजी, छत्तीसगढ़ी के साथ उड़िया और मराठी भाषा की जानकार हैं। छत्तीसगढ़ की मूल निवासी और प्रथम महिला रुमेटोलॉजिस्ट के रूप में उन्हें मुख्यमंत्री द्वारा भी सम्मानित किया जा चुका है।

रुमेटोलॉजिकल बीमारी के लक्षण

  • सुबह जकड़न (सुई जैसी सनसनी), दोनों कलाई, घुटने में दर्द, सूजन और गर्माहट और जोड़ों के पास गांठ
  • अचानक पैर के अंगूठे में तेज दर्द, घुटना, टखना, जोड़ में स्पर्श मात्र से पीडा
  • त्वचा का रंग बदलना, कठोरता, सांस लेने में दिक्कत, पित्त की समस्या, कैल्सिनोसिस
  • उम्र के साथ जोड़ों में बढ़ता दर्द, चलने के दौरान कठिनाई और जकड़न जैसी समस्या
  • चेहरे पर चकत्ते, छाला, बाल झड़ना, त्वचा और आंखों में रुखापन, थकान जैसी शिकायत
  • रात और सुबह पीठ-कमर में जकड़न, रीढ़ की कठोरता, एड़ी-टखने में दर्द, आंखों में सूजन
  • गर्दन, कंधे, कमर, जांघों में मरोड़, नींद से छुटकारा नहीं, सुबह थकान और ध्यान में कमी
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