बिहार: टीचर ट्रांसफर पॉलिसी में हो सकता है बदलाव? विधानसभा में शिक्षा मंत्री सुनील कुमार के बयान से बढ़ी उम्मीद

बिहार में सरकारी शिक्षकों की तबादला नीति में संशोधन के संकेत मिले हैं। शिक्षा मंत्री सुनील कुमार ने विधानसभा में म्युचुअल ट्रांसफर और TR-1, TR-2, TRE-3 शिक्षकों के तबादले पर अहम बयान दिया।

Updated On 2026-02-03 18:38:00 IST

शिक्षा मंत्री सुनील कुमार ने विधानसभा में म्युचुअल ट्रांसफर और TR-1, TR-2, TRE-3 शिक्षकों के तबादले पर अहम बयान दिया।

Bihar Teacher Transfer Policy: बिहार में सरकारी शिक्षकों के लिए राहत भरी खबर सामने आ सकती है। राज्य की तबादला नीति में बदलाव की संभावना जताई जा रही है। बिहार विधानसभा के बजट सत्र के दौरान शिक्षा मंत्री सुनील कुमार ने संकेत दिए कि सरकार शिक्षकों के सामान्य स्थानांतरण और परस्पर स्थानांतरण (म्युचुअल ट्रांसफर) की पूरी प्रक्रिया की दोबारा समीक्षा कर रही है।

TR-1, TR-2 और TRE-3 शिक्षकों को लेकर क्या कहा मंत्री ने?

शिक्षा मंत्री ने सदन में स्पष्ट किया कि TR-1 और TR-2 के तहत बहाल शिक्षकों के लिए तबादले का विकल्प पहले से उपलब्ध है। वहीं TRE-3 के अंतर्गत नियुक्त शिक्षकों का स्थानांतरण तय समयसीमा पूरी होने के बाद शुरू किया जाएगा। मंत्री के इस बयान से यह संकेत मिला है कि भविष्य में ट्रांसफर प्रक्रिया को और सुगम बनाया जा सकता है।

म्युचुअल ट्रांसफर पोर्टल दोबारा खुलने की उम्मीद

सुनील कुमार के बयान को शिक्षकों के लिए बड़ी राहत के तौर पर देखा जा रहा है। माना जा रहा है कि सरकार द्वारा बंद किया गया म्युचुअल ट्रांसफर पोर्टल फिर से खोला जा सकता है। साथ ही तबादला नीति में कुछ जरूरी संशोधन कर उसे अधिक व्यवहारिक और मानवीय बनाया जा सकता है।

विपक्ष ने उठाया पारदर्शिता और मानवीय दृष्टिकोण का मुद्दा

विधानसभा में विपक्षी दलों ने शिक्षकों के स्थानांतरण में पारदर्शिता और संवेदनशीलता की मांग की। विपक्ष का कहना था कि शिक्षक ही शिक्षा व्यवस्था की रीढ़ हैं और अगर वे मानसिक या पारिवारिक तनाव में रहेंगे, तो इसका सीधा असर बच्चों की पढ़ाई पर पड़ेगा। ऐसे में मनचाही जगह पर तबादले की सुविधा देना सरकार की जिम्मेदारी है।

दूरदराज जिलों में तैनात शिक्षकों की परेशानी

इस मुद्दे पर माले विधायक संदीप सौरव ने सरकार से सवाल किया कि म्युचुअल ट्रांसफर पोर्टल अचानक क्यों बंद किया गया। उन्होंने बताया कि TRE-3 के तहत नियुक्त कई शिक्षक अपने गृह जिले से 300 से 500 किलोमीटर दूर पदस्थापित हैं, जिनमें बड़ी संख्या महिला शिक्षकों की भी है। इतनी दूरी पर सेवा देना उनके लिए पारिवारिक और सामाजिक कारणों से बेहद मुश्किल हो रहा है।

तुरंत समाधान की मांग

संदीप सौरव ने इसे प्रशासनिक असंवेदनशीलता बताते हुए मांग की कि सरकार तुरंत स्थानांतरण प्रक्रिया को बहाल करे और परस्पर स्थानांतरण का विकल्प फिर से शुरू किया जाए, ताकि शिक्षक आपसी सहमति से अपना तबादला करा सकें।

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