महादेव एंड सन्स की लांचिंग: जियोस्टार में भारत की कहानियां दिखाने की कोशिश होती है : आलोक जैन
हाल ही में कलर्स चैनल के शो महादेव एंड सन्स के शो लॉन्च इवेंट में जियोस्टार के आलोक जैन ने हरिभूमि से खास बातचीत की। इस दौरान उन्होंने शो, जियोस्टार कंपनी और अपने सफर के बारे में भी विस्तार से जानकारी साझा की।
जियोस्टार आलोक जैन और INH की स्पोर्ट्स एंकर पूजा पुजारा
मुंबई से लौटकर पूजा पुजारा की रिपोर्ट। महादेव एंड सन्स की कहानी एक आम पिता और उसके बेटों के रिश्ते पर आधारित है। शो को लेकर उन्होनें कहा कि, महादेव एंड सन्स के जरिए यह दिखाने की कोशिश की गई है कि कई बार परिस्थितियां बिगड़ जाती हैं, जिससे परिवार में दूरियां आ जाती हैं। उन्होंने कहा कि, ऐसे हालात समय के साथ और आपस में बातचीत करके सुलझाए जा सकते हैं। समाज में इस तरह की कई कहानियां देखने को मिलती हैं। इन्हीं बातों को ध्यान में रखते हुए इस शो को मनोरंजन के साथ एक जरूरी संदेश के रूप में पेश किया गया है।
वहीं जियोस्टार कंपनी के बारे में आलोक जैन ने कहा कि, यह भारत का चैनल और ओटीटी प्लेटफॉर्म है, जहां मुख्य रूप से भारत की कहानियां दिखाने की कोशिश की जाती है। ऐसी कहानियां, जो भारत की सच्चाई को दर्शाती हों, लोगों को प्रेरणा दें और समाज को आगे बढ़ाने में मदद करें। उन्होंने कहा कि समाज में बदलाव लाने के लिए एंटरटेनमेंट बहुत बड़ी भूमिका निभाता है।
2026 में कंपनी का विज़न
आलोक जैन जी ने बताया कि नवंबर 2024 में कंपनी का मर्जर हुआ, जिसमें दो बड़ी कंपनियां एक साथ आईं। मर्जर के बाद कंपनी की कोशिश है कि टेलीविजन और जियो हॉटस्टार के माध्यम से विचारपूर्ण तरीके से एंटरटेनमेंट ज्यादा से ज्यादा भारतीय दर्शकों तक पहुंचाया जाए और जियोस्टार हर भारतीय के जीवन का एक महत्वपूर्ण हिस्सा बन सके।
कंटेंट दर्शकों के व्यक्तित्व पर डालता है प्रभाव
उन्होंने कहा कि, लोग एंटरटेनमेंट में काफी समय बिताते हैं और कंटेंट के साथ उनका भावनात्मक जुड़ाव होता है। यह जुड़ाव दर्शकों के व्यक्तित्व पर प्रभाव डालता है और उसे निखारने का काम भी करता है। इसी कारण जियोस्टार की कोशिश रहती है कि ऐसा कंटेंट बनाया जाए, जिससे अधिकतर दर्शक जुड़ सकें। कंटेंट बनने के बाद यह भी कंपनी की जिम्मेदारी होती है कि वह ज्यादा से ज्यादा लोगों तक पहुंचे। दर्शकों तक पहुंचने के बाद उसके मॉनिटाइजेशन के बारे में सोचा जाता है। इस पूरी प्रक्रिया में टेक्नोलॉजी की भी मदद ली जाती है। उन्होंने कहा कि ये सभी पहलू एक साथ मिलकर काम करते हैं।
यूथ के लिए क्या है खास ?
युवाओं को लेकर आलोक जैन जी ने कहा कि MTV लंबे समय से युवाओं के बीच काफी लोकप्रिय रहा है। यहां रोडीज़, स्प्लिट्सविला और हसल जैसे शो हैं, जो लंबे समय से चले आ रहे हैं और आज भी उतने ही मायने रखते हैं। उन्होंने बताया कि इस तरह के शोज़ पर लगातार काम किया जाता है। उन्होंने कहा कि आज का यूथ डिजिटल रूप से ज्यादा जुड़ा रहना पसंद करता है।
जेन ज़ी और 2005–2006 में पैदा हुए बच्चों ने पहले वाला भारत ज्यादा नहीं देखा है, जब चीजें थोड़ी अस्त-व्यस्त थीं और लोग खुलकर अपनी बात नहीं कह पाते थे। आज के दौर में हालात बदल चुके हैं और युवा खुलकर अपनी बात रख सकते हैं। आलोक जैन जी ने कहा कि जब यंग जनरेशन रिस्क लेने वाली और ओपन है, तो कंटेंट भी वैसा होना चाहिए जो उन्हें रिफ्लेक्ट करे। कंटेंट बनाते समय यह ध्यान रखना जरूरी है कि दर्शकों के जीवन में उस समय क्या चल रहा है।
OTT और टीवी के बीच संतुलन
OTT और टेलीविजन के बीच संतुलन पर आलोक जैन जी ने कहा कि कंपनी कंटेंट दोनों ही माध्यमों के लिए बनाती है। दोनों प्लेटफॉर्म जरूरी हैं। कंटेंट पर फोकस कंपनी का होता है, जबकि संतुलन बनाना दर्शकों पर निर्भर करता है। उन्होंने कहा कि अच्छा कंटेंट टीवी और OTT दोनों जगह चलता है। दोनों माध्यम अलग नहीं हैं। दोनों प्लेटफॉर्म पर करीब 80 प्रतिशत दर्शक वही हैं। कुछ शो दोनों जगह अच्छे चलते हैं, तो कुछ दोनों जगह नहीं भी चलते। दर्शक अपनी पसंद और सुविधा के अनुसार माध्यम और कंटेंट चुनते हैं।
25 साल का अनुभव और मीडिया में 9 साल का सफर
अपने करियर को लेकर आलोक जैन जी ने बताया कि वे पिछले 9 सालों से मीडिया इंडस्ट्री में हैं, लेकिन उन्होंने कभी नहीं सोचा था कि वे मीडिया में काम करेंगे। मीडिया में आना उनके लिए एक संयोग था। इससे पहले वे मैन्युफैक्चरिंग सेक्टर में काम कर चुके हैं। उन्होंने कहा कि किसी को भी यह पहले से नहीं पता होता कि भविष्य में क्या होगा। जीवन में यह तय करना मुश्किल होता है कि आगे क्या करना है।
आज की दुनिया में कई अवसर हैं और नई चीजें करने की कोशिश करनी चाहिए। एक काम करें, अगर उसमें मजा न आए तो कुछ नया आज़माएं। उन्होंने कहा कि सफलता की कोई खास रेसिपी नहीं होती। मेहनत जरूरी है और किस्मत का साथ भी होना चाहिए। जो भी करें, उसमें पैशन और एक मकसद जरूर होना चाहिए। मीडिया उन्हें इसलिए पसंद है क्योंकि यह ऐसा माध्यम है, जिसके जरिए समाज पर गहरी और सकारात्मक छाप छोड़ी जा सकती है।