Gold-Silver ETF: गोल्ड-सिल्वर ईटीएफ में जोरदार रिकवरी, 9% तक उछले, निवेशकों के लिए आगे क्या?

Gold-silver ETF: गिरावट के बाद सोना-चांदी और उनके ईटीएफ में जोरदार उछाल है। एमसीएक्स पर कीमतों में तेज बढ़त है। सिल्वर ईटीएफ में 7 से 9 फीसदी और गोल्ड ईटीएफ में 4 से 7 फीसदी तक तेजी दर्ज की है।

Updated On 2026-02-04 15:30:00 IST

Gold-silver ETF today: गोल्ड-सिल्वर ईटीएफ में तूफानी तेजी आई। 

Gold-silver ETFs: सोना और चांदी से जुड़े एक्सचेंज ट्रेडेड फंड 4 फरवरी को जोरदार तेजी के साथ चमके, जब कीमती धातुओं में हालिया गिरावट के बाद जोरदार रिकवरी देखने को मिली। हालांकि यह उछाल मजबूत रहा लेकिन गोल्ड और सिल्वर अभी भी जनवरी के आखिर में बने अपने ऑल टाइम हाई से नीचे ही कारोबार कर रहे।

मल्टी कमोडिटी एक्सचेंज पर अप्रैल एक्सपायरी वाला गोल्ड फ्यूचर सुबह के कारोबार में 4.5 फीसदी से ज्यादा उछलकर 160755 रुपये प्रति 10 ग्राम तक पहुंच गया। जून और अगस्त कॉन्ट्रैक्ट्स में भी करीब 5 फीसदी की तेजी रही। वहीं मार्च एक्सपायरी वाला सिल्वर फ्यूचर 6 फीसदी चढ़कर 284094 रुपये प्रति किलोग्राम पर पहुंचा जबकि मई और जुलाई कॉन्ट्रैक्ट्स में क्रमशः 6 और 5 फीसदी की बढ़त दर्ज हुई।

गोल्ड-सिल्वर ईटीएफ में तेजी

ईटीएफ की बात करें तो टाटा सिल्वर ईटीएफ करीब 9 फीसदी और कोटक सिल्वर ईटीएफ करीब 8 फीसदी चढ़े। निप्पॉन इंडिया, आईसीआईसीआई प्रूडेंशियल, एसबीआई, आदित्य बिड़ला सन लाइफ और यूटीआई सिल्वर ईटीएफ में 7 फीसदी से ज्यादा उछाल दिखा। ग्रो, एचडीएफसी और जेरोधा सिल्वर ईटीएफ भी करीब 7 फीसदी ऊपर रहे जबकि एडेलवाइस सिल्वर ईटीएफ करीब 9 फीसदी चढ़ा।

गोल्ड ईटीएफ में करीब 7 फीसदी की तेजी

गोल्ड ईटीएफ में भी तेज हलचल रही। वेल्थ कंपनी गोल्ड ईटीएफ लगभग 7 फीसदी उछला जबकि क्वांटम और एडेलवाइस गोल्ड ईटीएफ में 5 फीसदी से ज्यादा तेजी रही। एक्सिस, डीएसपी, टाटा, एसबीआई, निप्पॉन इंडिया गोल्डबीज समेत कई गोल्ड ईटीएफ में 4 फीसदी से अधिक की बढ़त दर्ज की गई।

कमोडिटी एनालिस्ट के मुताबिक, सोना 137728 रुपये के फिबोनाची स्तर से उछला है और 154215 रुपये पर तत्काल रेजिस्टेंस दिख रहा। इसके ऊपर ब्रेकआउट होने पर कीमतें 1.60 से 1.67 लाख रुपये तक जा सकती। सिल्वर के लिए 292928 रुपये का स्तर अहम माना जा रहा है, जिसके ऊपर तेजी जारी रह सकती है।

हालिया गिरावट की बड़ी वजह CME द्वारा मार्जिन बढ़ाना और फेड चेयर को लेकर सख्त नीति की आशंका रही, जिससे डॉलर मजबूत हुआ। तेज मुनाफावसूली और ओवरबॉट स्थिति ने गिरावट को और बढ़ाया। हालांकि जियोजित इन्वेस्टमेंट्स के मुताबिक यह गिरावट तकनीकी करेक्शन ज्यादा थी क्योंकि भू-राजनीतिक तनाव और केंद्रीय बैंकों की खरीद जैसे लंबे समय के फैक्टर अभी भी मजबूत हैं।

गिरावट के बाद बाजार संतुलित स्तर पर दिख रहा है। वहीं अमेरिकी फेडरल रिजर्व द्वारा इस साल कम से कम दो बार ब्याज दरों में कटौती की उम्मीदों ने कीमती धातुओं को सपोर्ट दिया है। जानकारों का मानना है कि निकट अवधि में उतार-चढ़ाव बना रह सकता है लेकिन निवेशकों की नजर वैश्विक संकेतों, डॉलर की चाल और केंद्रीय बैंकों की नीतियों पर रहेगी, जो आगे की दिशा तय करेंगे।

(प्रियंका कुमारी)

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