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पेंटागन ने ईरान की आर्थिक रीढ़ तोड़ने के लिए खार्ग द्वीप पर कब्जे की योजना बनाई है, ताकि उसके तेल निर्यात को पूरी तरह ठप किया जा सके।

ईरान और इजरायल के बीच छिड़ी जंग अब एक ऐसे मुकाम पर पहुँच गई है जहाँ अमेरिका सीधे तौर पर ईरान के अस्तित्व को चुनौती देने की तैयारी कर रहा है। ताजा रिपोर्ट्स के अनुसार, अमेरिकी रक्षा विभाग ने ईरान पर 'अंतिम प्रहार' के लिए एक विस्तृत सैन्य योजना तैयार की है।

इस रणनीतिक प्लान के तहत अमेरिका का मुख्य लक्ष्य ईरान की आर्थिक रीढ़ माने जाने वाले 'खार्ग द्वीप' और Strait of Hormuz पर पूर्ण नियंत्रण स्थापित करना है। इस योजना का उद्देश्य ईरान की तेल निर्यात क्षमता को शून्य करना और उसे आत्मसमर्पण के लिए मजबूर करना है।

​खार्ग द्वीप: ईरान की आर्थिक नस पर हमला
पेंटागन की इस योजना में 'खार्ग द्वीप' सबसे ऊपर है। यह द्वीप ईरान का सबसे बड़ा तेल टर्मिनल है, जहां से उसके कुल कच्चे तेल के निर्यात का लगभग 90 प्रतिशत हिस्सा गुजरता है। अमेरिकी सैन्य विशेषज्ञों का मानना है कि यदि खार्ग द्वीप पर कब्जा कर लिया जाता है या इसे पूरी तरह से ब्लॉक कर दिया जाता है, तो ईरान की अर्थव्यवस्था कुछ ही हफ्तों में ढह जाएगी।

इसके लिए अमेरिका अपने हमलावर जहाज और विशेष कमांडो यूनिट्स का उपयोग कर 'ग्राउंड रेड्स' की तैयारी कर रहा है, ताकि टर्मिनल को नष्ट करने के बजाय उसे अपने नियंत्रण में लिया जा सके।

होर्मुज पर 'सर्जिकल स्ट्राइक' और कब्जा
होर्मुज दुनिया का सबसे संवेदनशील तेल मार्ग है। ईरान ने कई बार इसे बंद करने की धमकी दी है, लेकिन अब अमेरिका ने 'प्रि-एम्प्टिव स्ट्राइक' की योजना बनाई है। इस प्लान के तहत, अमेरिकी नौसेना के युद्धपोत 'यूएसएस त्रिपोली' और अन्य स्ट्राइक ग्रुप्स होर्मुज के रणनीतिक बिंदुओं पर कब्जा करेंगे।

इसका उद्देश्य न केवल ईरानी नौसेना की घेराबंदी करना है, बल्कि यह सुनिश्चित करना भी है कि वैश्विक तेल आपूर्ति में एक प्रतिशत की भी गिरावट न आए। अमेरिका इस क्षेत्र में अपनी स्थायी सैन्य चौकियां स्थापित करने की दिशा में भी विचार कर रहा है।

​पेंटागन का 'ग्राउंड रेड्स' और स्पेशल ऑपरेशंस प्लान 
यह केवल हवाई हमला नहीं होगा। पेंटागन की नई रणनीति में ईरान के भीतर सीमित 'ग्राउंड ऑपरेशंस' भी शामिल हैं। इसमें ईरान के मिसाइल लॉन्चिंग साइट्स और परमाणु केंद्रों को निशाना बनाने के लिए विशेष सैन्य टुकड़ियों को जमीन पर उतारने की योजना है।

अमेरिका का मानना है कि केवल मिसाइल हमलों से ईरान के 'प्रॉक्सी नेटवर्क' और भूमिगत सैन्य ठिकानों को पूरी तरह खत्म नहीं किया जा सकता। 'ऑपरेशन अंतिम प्रहार' के तहत, अमेरिकी सेना ईरान के तटीय क्षेत्रों में अपनी पैठ मजबूत करेगी ताकि तेहरान पर मनोवैज्ञानिक और सैन्य दबाव बनाया जा सके।

​ईरान की 'ताबूत' वाली चेतावनी और युद्ध का खतरा 
अमेरिका की इस घातक योजना की भनक लगते ही ईरान ने भी अपने तेवर और कड़े कर लिए हैं। ईरान की रिवोल्यूशनरी गार्ड्स (IRGC) ने चेतावनी दी है कि खार्ग द्वीप की ओर बढ़ने वाला कोई भी अमेरिकी सैनिक जिंदा वापस नहीं जाएगा।

ईरान ने अपनी 'खलीद-फारस' एंटी-शिप मिसाइलों को सक्रिय कर दिया है और होर्मुज में हजारों समुद्री माइन्स बिछाने की धमकी दी है। वैश्विक कूटनीतिज्ञों का मानना है कि यदि अमेरिका अपने इस 'अंतिम प्रहार' वाले प्लान पर आगे बढ़ता है, तो यह सदी का सबसे भीषण और विनाशकारी युद्ध साबित हो सकता है, जिसका असर पूरी दुनिया की अर्थव्यवस्था पर पड़ेगा।

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