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राष्ट्रपति ट्रंप ने अपने प्रशासन को 4-6 हफ्तों के भीतर ईरान युद्ध समाप्त करने का 'फाइनल ऑर्डर' दिया है। उनका उद्देश्य मई के मध्य में होने वाले चीनी शिखर सम्मेलन से पहले शांति स्थापित करना है।

Middle East Conflict: अमेरिकी राष्ट्रपति डोनाल्ड ट्रंप ने मिडल ईस्ट में जारी ईरान युद्ध को लेकर बेहद सख्त रुख अपनाया है। उन्होंने अपने प्रशासन और सैन्य सहयोगियों को स्पष्ट निर्देश दिए हैं कि वे आने वाले कुछ ही हफ्तों में इस संघर्ष पर पूर्णविराम लगाएं।

ट्रंप का मानना है कि यह युद्ध उनके अन्य महत्वपूर्ण घरेलू और राजनीतिक एजेंडों से ध्यान भटका रहा है। व्हाइट हाउस की प्रेस सचिव कैरोलिन लेविट ने चेतावनी भरे लहजे में कहा है कि अगर तेहरान समझौते के लिए आगे नहीं बढ़ता है, तो अमेरिका पहले से भी कहीं ज्यादा कड़ा और निर्णायक हमला कर सकता है।

​युद्ध खत्म करने के लिए ट्रंप की 4-6 हफ्तों की टाइमलाइन

​वॉल स्ट्रीट जर्नल की रिपोर्ट के मुताबिक, राष्ट्रपति ट्रंप ने अपने सहयोगियों को सार्वजनिक रूप से 4 से 6 हफ्तों की एक निश्चित समयसीमा दी है। ट्रंप का लक्ष्य मई के मध्य तक इस युद्ध को पूरी तरह समाप्त करना है। इस डेडलाइन के पीछे एक बड़ा कूटनीतिक कारण भी है; दरअसल, व्हाइट हाउस के अधिकारियों ने मई के मध्य में चीनी नेता शी जिनपिंग के साथ बीजिंग में एक शिखर सम्मेलन की योजना बनाई है। ट्रंप चाहते हैं कि इस महत्वपूर्ण बैठक के शुरू होने से पहले ईरान का मुद्दा पूरी तरह सुलझ जाए ताकि वे वैश्विक स्थिरता पर ध्यान केंद्रित कर सकें।

​सैन्य दबाव और शांति वार्ता के बीच फंसा अमेरिकी प्रशासन

​वर्तमान में अमेरिकी प्रशासन सैन्य विजय और कूटनीतिक समाधान के बीच संतुलन बनाने की कोशिश कर रहा है। एक तरफ जहां ट्रंप कूटनीतिक रास्ते तलाश रहे हैं, वहीं दूसरी ओर अमेरिका ने मध्य पूर्व में अतिरिक्त सैनिक तैनात कर ईरान पर दबाव भी बढ़ा दिया है।

मध्यस्थ देशों के जरिए शुरुआती बातचीत शुरू तो हुई है, लेकिन अभी तक कोई ठोस समझौता नहीं हो सका है। रक्षा विभाग फिलहाल 'अधिकतम दबाव' की नीति पर अड़ा हुआ है, जबकि ट्रंप का प्राथमिक लक्ष्य आगामी चुनावों और आर्थिक स्थिरता को ध्यान में रखते हुए संघर्ष को सीमित करना है।

​तेल और रणनीति: समझौते के तहत ईरान के तेल तक पहुंच की योजना

​ट्रंप ने अपने सलाहकारों के सामने एक रणनीतिक विचार रखा है कि युद्ध खत्म करने के समझौते के तहत अमेरिका को ईरान के तेल भंडारों तक पहुंच मिल सकती है। हालांकि, इस पर अभी कोई ठोस योजना नहीं बनी है, लेकिन इसे एक बड़े आर्थिक लाभ के रूप में देखा जा रहा है।

ट्रंप जमीनी स्तर पर अमेरिकी सैनिकों को भेजने के विकल्प को पूरी तरह खारिज नहीं कर रहे हैं, लेकिन उन्हें चिंता है कि इससे युद्ध लंबा खिंच सकता है और अमेरिकी सैनिकों के हताहत होने की संख्या बढ़ सकती है। अब तक इस संघर्ष में लगभग 300 अमेरिकी सैनिक घायल हुए हैं और 13 की मौत हो चुकी है।

​घरेलू राजनीति और बढ़ती महंगाई का भारी दबाव

​ईरान युद्ध का असर सीधे तौर पर अमेरिकी राजनीति और अर्थव्यवस्था पर दिख रहा है। अमेरिका में बढ़ती महंगाई और जीवनयापन की बढ़ती लागत ने रिपब्लिकन पार्टी के लिए राजनीतिक स्थिति चुनौतीपूर्ण बना दी है। हाल ही में फ्लोरिडा की एक महत्वपूर्ण सीट डेमोक्रेट्स के खाते में जाने से हड़कंप मच गया है।

विशेषज्ञों का मानना है कि युद्ध के कारण बढ़ी महंगाई आगामी चुनावों में ट्रंप की पार्टी के लिए बड़ी मुसीबत बन सकती है। यही कारण है कि ट्रंप जल्द से जल्द इस मोर्चे को निपटाकर अपने घरेलू एजेंडों, जैसे इमिग्रेशन और मतदाता सुरक्षा पर ध्यान केंद्रित करना चाहते हैं।

​हॉर्मुज पर टिकी वैश्विक बाजार की नजरें

​इस पूरे द्वंद्व और कूटनीतिक हलचल के बीच वैश्विक तेल बाजार की नजरें हॉर्मुज पर टिकी हैं। यदि जल्द ही शांति समझौता नहीं होता है, तो हॉर्मुज में रुकावट जारी रह सकती है, जिससे अंतरराष्ट्रीय तेल बाजार में भारी अस्थिरता आएगी।

ट्रंप जानते हैं कि वैश्विक आर्थिक स्थिरता के लिए इस समुद्री मार्ग का सुचारू रहना अनिवार्य है। इसीलिए वे कूटनीति और सैन्य शक्ति के मिश्रण का उपयोग कर रहे हैं ताकि ईरान को बातचीत की मेज पर लाया जा सके और उनकी शर्तों पर युद्ध का अंत हो सके।

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