प्रिंस एंड्रयू को सैंड्रिंघम एस्टेट से हिरासत में लिया गया। पब्लिक ऑफिस में मिसकंडक्ट और जेफरी एपस्टीन कनेक्शन की जांच जारी।

नई दिल्ली : ब्रिटेन के शाही परिवार से जुड़ी एक और बड़ी खबर ने देश की राजनीति और अंतरराष्ट्रीय कूटनीति में हलचल मचा दी है। प्रिंस एंड्रयू, जो किंग चार्ल्स तृतीय के छोटे भाई हैं, को “मिसकंडक्ट इन पब्लिक ऑफिस” यानी सार्वजनिक पद पर कदाचार के संदेह में गिरफ्तार किए जाने की पुष्टि प्रमुख मीडिया रिपोर्ट्स में की गई है।

बताया गया है कि गुरुवार सुबह करीब 8 बजे सैंड्रिंघम एस्टेट के वुड फार्म स्थित उनके निवास से उन्हें हिरासत में लिया गया। संयोग से उसी दिन उनका 66वां जन्मदिन भी था। पुलिस ने बर्कशायर और नॉरफ़ॉक में अन्य ठिकानों पर भी तलाशी अभियान चलाया है। Thames Valley Police ने बयान में कहा कि 60 वर्ष से अधिक आयु के एक व्यक्ति को हिरासत में लिया गया है और जांच जारी है।

क्या है मामला?

यह पूरा घटनाक्रम दिवंगत अमेरिकी कारोबारी जेफरी एपस्टीन से जुड़े नए दस्तावेजों के बाद तेज हुआ है। आरोप है कि ट्रेड एनवॉय (व्यापार दूत) के रूप में कार्य करते समय एंड्रयू ने गोपनीय सरकारी सूचनाएं साझा की थीं। वे 2001 में इस पद पर नियुक्त हुए थे और 2011 में विवादों के चलते पद छोड़ना पड़ा था।

एपस्टीन मामले में पहले भी गंभीर आरोप लग चुके हैं। वर्जीनिया गिफ्रे ने 2001 में आरोप लगाया था कि 17 वर्ष की उम्र में उनका यौन शोषण किया गया। एंड्रयू ने हमेशा इन आरोपों से इनकार किया है। गिफ्रे की अप्रैल 2025 में आत्महत्या से मृत्यु हो गई थी।

prince Andrew arrested over misconduct amid Epstein row

कानूनी स्थिति और आगे की राह

“मिसकंडक्ट इन पब्लिक ऑफिस” ब्रिटेन में गंभीर अपराध है। इसमें यह साबित करना होता है कि किसी सार्वजनिक पद पर रहते हुए जानबूझकर अधिकारों का दुरुपयोग किया गया। दोष सिद्ध होने पर अधिकतम सजा उम्रकैद तक हो सकती है। फिलहाल जांच शुरुआती चरण में है और अभी कोई औपचारिक चार्जशीट दाखिल नहीं हुई है।

किंग चार्ल्स ने कहा है कि कानून को अपना काम करने दिया जाएगा और वे जांच का पूरा समर्थन करते हैं। यह मामला शाही परिवार की छवि और ब्रिटेन की संस्थागत साख- दोनों के लिए महत्वपूर्ण माना जा रहा है। आने वाले दिनों में जांच की दिशा और संभावित कानूनी कार्रवाई पर पूरी दुनिया की नजर रहेगी।

प्रिंस एंड्रयू से उनके शाही खिताब छीन लिए गए

ब्रिटेन के शाही परिवार में विवादों के बीच प्रिंस एंड्रयू की शाही हैसियत पर बड़ा असर उस वक्त पड़ा था, जब किंग चार्ल्स तृतीय ने अक्टूबर 2025 में अपने छोटे भाई से ‘प्रिंस’ का संबोधन सहित कई आधिकारिक शाही उपाधियां और सैन्य सम्मान वापस ले लिए थे। इसके साथ ही उन्हें विंडसर स्थित उनके निवास ‘रॉयल लॉज’ खाली करने का निर्देश दिया गया था, जिसके बाद वे वहां से चले गए थे।

65 वर्षीय एंड्रयू, दिवंगत क्वीन एलिजाबेथ द्वितीय के दूसरे पुत्र हैं। लंबे समय से उनका नाम अमेरिकी वित्तीय कारोबारी और दोषी यौन अपराधी जेफरी एपस्टीन से जुड़ता रहा है। उपाधियां वापस लिए जाने के बाद अब उन्हें औपचारिक रूप से “एंड्रयू माउंटबेटन-विंडसर” कहा जाता है। उन्हें ‘ड्यूक ऑफ यॉर्क’ की उपाधि के उपयोग से भी रोका गया है।

वर्जीनिया गिफ्रे के आरोप और प्रभाव

एपस्टीन प्रकरण में वर्जीनिया गिफ्रे (वर्जीनिया रॉबर्ट्स गिफ्रे) के आरोपों ने अंतरराष्ट्रीय स्तर पर व्यापक चर्चा को जन्म दिया। उन्होंने 2011 में एपस्टीन के कथित यौन तस्करी नेटवर्क का खुलासा करते हुए कई प्रभावशाली व्यक्तियों के नाम लिए। गिफ्रे ने दावा किया था कि किशोरावस्था में उन्हें नेटवर्क में फंसाया गया और कुछ मुलाकातों में प्रिंस एंड्रयू का भी उल्लेख किया। एंड्रयू ने इन आरोपों से लगातार इनकार किया है।

वर्जीनिया गिफ्रे बाद के वर्षों में यौन शोषण पीड़ितों के लिए मुखर आवाज बनीं। अप्रैल 2025 में 41 वर्ष की आयु में उनका निधन हो गया। उनकी आत्मकथा Nobody's Girl: A Memoir of Surviving Abuse and Fighting for Justice 21 अक्टूबर 2025 को मरणोपरांत प्रकाशित हुई, जिसमें उन्होंने अपने अनुभवों और न्याय की लड़ाई का विस्तृत वर्णन किया।

शाही छवि पर असर

इन घटनाक्रमों ने प्रिंस एंड्रयू की सार्वजनिक भूमिका को लगभग समाप्त कर दिया और शाही परिवार की साख पर भी प्रभाव डाला। उपाधियां वापस लिए जाने और आधिकारिक कर्तव्यों से अलग किए जाने को राजशाही की छवि बचाने के प्रयास के रूप में देखा गया।

मामले से जुड़ी कानूनी और सार्वजनिक बहसें अब भी समय-समय पर सामने आती रहती हैं, और यह प्रकरण आधुनिक ब्रिटिश राजशाही के सबसे विवादित अध्यायों में से एक माना जा रहा है।