प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी दो दिवसीय इज़राइल के दौरे पर हैं। उन्होंने बुधवार, 25 फरवरी को इज़राइली संसद नेसेट (Knesset) को संबोधित किया। जैसे ही प्रधानमंत्री ने अपना भाषण शुरू किया, पूरा सदन खड़ा हो गया और तालियों की गड़गड़ाहट से स्वागत किया गया। यह सिर्फ एक औपचारिक संबोधन नहीं था, बल्कि दो प्राचीन सभ्यताओं के बीच गहराते रिश्तों का प्रतीक था।
प्रधानमंत्री मोदी ने कहा कि इस प्रतिष्ठित सदन के सामने खड़ा होना उनके लिए सम्मान और सौभाग्य की बात है। उन्होंने बताया कि वे 140 करोड़ भारतीयों की ओर से दोस्ती, सम्मान और साझेदारी का संदेश लेकर आए हैं।
यह क्षण केवल एक राजनयिक औपचारिकता नहीं था, बल्कि दुनिया के सबसे बड़े और सबसे पुराने लोकतंत्रों के बीच बढ़ते गहरे भरोसे का प्रतीक था। पीएम ने अपने भाषण की शुरुआत हिब्रू भाषा में अभिवादन के साथ की, जिसने इजरायली जनता का दिल जीत लिया।
इज़राइली संसद नेसेट में PM मोदी- तस्वीरें
आतंकवाद पर कड़ा प्रहार: 'जीरो टॉलरेंस' का संदेश
पीएम मोदी ने आतंकवाद के मुद्दे पर दुनिया को आईना दिखाया। उन्होंने हमास द्वारा किए गए 7 अक्टूबर के हमलों को 'क्रूर और अमानवीय' करार दिया। उन्होंने स्पष्ट रूप से कहा कि आतंकवाद का कोई धर्म या औचित्य नहीं हो सकता। भारत की ओर से उन्होंने 'जीरो टॉलरेंस' की नीति पर जोर दिया और कहा कि जब तक दुनिया आतंकवाद के खिलाफ एक सुर में नहीं बोलेगी, तब तक निर्दोषों का खून बहता रहेगा।
26/11 और 7 अक्टूबर: साझा दर्द और एकजुटता
अपने संबोधन में प्रधानमंत्री ने मुंबई के 26/11 हमले और इजरायल पर हुए 7 अक्टूबर के हमले के बीच समानताएं रेखांकित कीं। उन्होंने कहा, "हम न मुंबई का दर्द भूले हैं और न ही 7 अक्टूबर की क्रूरता को।"
पीएम मोदी ने इजरायली जनता को विश्वास दिलाया कि दुख की इस घड़ी में भारत उनके साथ कंधे से कंधा मिलाकर खड़ा है। उन्होंने कहा कि भारत उन सभी परिवारों के प्रति संवेदना व्यक्त करता है जिन्होंने आतंकवाद के कारण अपनों को खोया है।
2000 साल पुराना अटूट सांस्कृतिक रिश्ता
प्रधानमंत्री ने दोनों देशों के बीच प्राचीन संबंधों का उल्लेख करते हुए कहा कि भारत और इजरायल का नाता 2000 साल पुराना है। उन्होंने बताया कि भारत ने हमेशा यहूदी समुदाय का स्वागत किया है और भारत में वे सदियों से बिना किसी भेदभाव के सुरक्षित रहे हैं।
पीएम ने कहा कि यह रिश्ता केवल कूटनीति पर नहीं, बल्कि साझा मूल्यों, संस्कृति और आपसी सम्मान की गहरी नींव पर टिका है।
हाइफा की आजादी और भारतीय सैनिकों का बलिदान
प्रथम विश्व युद्ध के दौरान हाइफा को आजाद कराने में भारतीय सैनिकों के बलिदान को पीएम मोदी ने विशेष रूप से याद किया। उन्होंने बताया कि कैसे मैसूर, जोधपुर और हैदराबाद लांसर्स के 4000 से अधिक भारतीय सैनिकों ने अपने प्राणों की आहुति दी थी। पीएम ने इसे 'खून और त्याग का रिश्ता' बताया। उन्होंने कहा कि यह साझा इतिहास आज की हमारी रणनीतिक साझेदारी की नींव है, जिसे समय की धूल कभी धुंधला नहीं कर पाएगी।
भारत: दुनिया की तीसरी सबसे बड़ी अर्थव्यवस्था का लक्ष्य
आर्थिक मोर्चे पर पीएम मोदी ने भारत की प्रगति का विवरण नेसेट के सामने रखा। उन्होंने कहा कि भारत आज दुनिया की सबसे तेजी से बढ़ती अर्थव्यवस्था है और जल्द ही यह दुनिया की तीसरी सबसे बड़ी आर्थिक शक्ति बन जाएगा। उन्होंने इजरायली उद्योगपतियों को भारत में निवेश के लिए आमंत्रित किया और बताया कि कैसे भारत का स्टार्टअप इकोसिस्टम और डिजिटल क्रांति इजरायल की तकनीक के साथ मिलकर दुनिया में बड़ा बदलाव ला सकते हैं।
गाजा शांति पहल और मानवीय दृष्टिकोण का समर्थन
क्षेत्रीय शांति पर बात करते हुए पीएम मोदी ने संयुक्त राष्ट्र सुरक्षा परिषद द्वारा समर्थित 'गाजा शांति पहल' का दृढ़ समर्थन किया। उन्होंने स्पष्ट किया कि भारत निर्दोष नागरिकों की हत्या के खिलाफ है और शांति का पक्षधर है। पीएम ने कहा कि भारत फलस्तीन मुद्दे के न्यायपूर्ण और स्थायी समाधान के लिए प्रतिबद्ध है और संवाद के जरिए ही शांति का रास्ता निकाला जा सकता है। उन्होंने युद्धग्रस्त क्षेत्रों में मानवीय सहायता पहुंचाने की भारत की प्रतिबद्धता दोहराई।
AI और ग्लोबल इकोनॉमिक कॉरिडोर का विजन
प्रधानमंत्री ने भविष्य की तकनीक 'आर्टिफिशियल इंटेलिजेंस' (AI) और भारत-मध्य पूर्व-यूरोप आर्थिक गलियारे पर भी चर्चा की। उन्होंने कहा कि भारत में आयोजित ग्लोबल एआई समिट इस दिशा में एक बड़ा कदम था। इजरायल की तकनीक और भारत की मानवीय प्रतिभा मिलकर एआई के क्षेत्र में मानव कल्याण के लिए काम कर सकते हैं। वहीं, इकोनॉमिक कॉरिडोर के निर्माण से वैश्विक व्यापार और कनेक्टिविटी में एक नया अध्याय जुड़ेगा, जिसका लाभ इजरायल को भी मिलेगा।
भारतीय मूल के लोगों का गौरव और योगदान
पीएम मोदी ने इजरायल में रह रहे भारतीय मूल के यहूदी समुदाय और भारतीय नागरिकों की जमकर सराहना की। उन्होंने कहा कि ये लोग इजरायल की सेना से लेकर प्रयोगशालाओं तक में महत्वपूर्ण भूमिका निभा रहे हैं। उन्होंने सुंदर शब्दों में कहा कि "इजरायल आपकी पितृभूमि है और भारत आपकी मातृभूमि है।" उन्होंने भारतीय प्रवासियों को दोनों देशों के बीच का 'जीवंत पुल' बताया, जो सांस्कृतिक आदान-प्रदान और आपसी सहयोग को निरंतर बनाए हुए हैं।
जन्मदिन और इजरायल की मान्यता का रोचक संयोग
संबोधन के दौरान पीएम मोदी ने एक बेहद रोचक तथ्य साझा किया। उन्होंने बताया कि भारत ने जिस दिन (17 सितंबर 1950) इजरायल को एक स्वतंत्र राष्ट्र के रूप में मान्यता दी थी, उसी दिन उनका जन्म भी हुआ था। इस इत्तेफाक को उन्होंने एक दैवीय संकेत बताया और कहा कि शायद इसीलिए उनकी नियति में दोनों देशों के रिश्तों को नई ऊंचाइयों पर ले जाना लिखा था। इस निजी उल्लेख ने इजरायली नेताओं और जनता के बीच उनके प्रति सम्मान और अपनापन बढ़ा दिया।
'वसुधैव कुटुंबकम' और शांति का मार्ग
भाषण के समापन में प्रधानमंत्री ने भारतीय दर्शन 'वसुधैव कुटुंबकम' का संदेश दिया। उन्होंने कहा कि शांति का मार्ग हमेशा कठिन होता है, लेकिन मानवता के भविष्य के लिए यही एकमात्र विकल्प है। उन्होंने इजरायल को विश्वास दिलाया कि भारत हमेशा स्थिरता, सुरक्षा और शांति के प्रयासों में उनके साथ खड़ा रहेगा। उनके इस संदेश ने वैश्विक मंच पर भारत को एक 'विश्व बंधु' और जिम्मेदार वैश्विक शक्ति के रूप में स्थापित किया।
'स्पीकर ऑफ द क्नेसेट मेडल' से सर्वोच्च सम्मान
इजरायल की संसद ने पीएम मोदी को अपने सर्वोच्च सम्मान 'स्पीकर ऑफ द क्नेसेट मेडल' से नवाजा। यह पदक इजरायल और भारत के बीच रणनीतिक साझेदारी को प्रगाढ़ करने और दोनों देशों के लोगों को करीब लाने में उनके असाधारण नेतृत्व के लिए दिया गया। यह सम्मान दर्शाता है कि इजरायल के लिए भारत और पीएम मोदी की मित्रता का क्या महत्व है। मेडल स्वीकार करते हुए पीएम मोदी ने इसे 140 करोड़ भारतीयों का सम्मान बताया।