ईरान और अमेरिका के बीच तनाव कम होने और अस्थायी युद्धविराम की खबरों के बीच पाकिस्तान में एक अजीबोगरीब मांग उठ रही है। पाकिस्तानी सोशल मीडिया और मीडिया रिपोर्ट्स में दावा किया जा रहा है कि इस्लामाबाद ने एक विनाशकारी युद्ध को टालने में सबसे अहम भूमिका निभाई है।
पाकिस्तानी पंजाब विधानसभा में मुस्लिम लीग-नवाज (PML-N) के राणा मोहम्मद अरशद ने एक प्रस्ताव रखकर प्रधानमंत्री शहबाज शरीफ, सेना प्रमुख फील्ड मार्शल असीम मुनीर और विदेश मंत्री इशाक डार को नोबेल शांति पुरस्कार देने की सिफारिश की है।
डोनाल्ड ट्रंप ने की पाकिस्तान की तारीफ?
पाकिस्तानी मीडिया का दावा है कि अमेरिकी राष्ट्रपति डोनाल्ड ट्रंप ने पीएम शहबाज शरीफ और आर्मी चीफ असीम मुनीर की कोशिशों की सराहना की है। स्कॉटलैंड के पूर्व फर्स्ट मिनिस्टर हमजा यूसुफ ने भी 'एक्स' (X) पर लिखा कि पाकिस्तान अपने मध्यस्थता प्रयासों के लिए आभार का हकदार है।
उन्होंने यहां तक कह दिया कि मध्यस्थता का केंद्र अब यूरोप से हटकर पूर्व की ओर खिसक गया है। इसी माहौल के बीच 11 अप्रैल को पाकिस्तान में अमेरिका और ईरान के डेलिगेशन की बैठक होनी है, जिसकी सुरक्षा के लिए अमेरिका से 30 सदस्यों की टीम इस्लामाबाद पहुँच चुकी है।
विदेशी पत्रकारों का करारा तंज- 'भारत में मिल जाओ'
जहां पाकिस्तानी अपनी पीठ थपथपा रहे हैं, वहीं अंतरराष्ट्रीय स्तर पर उनका मजाक भी उड़ रहा है। हमजा यूसुफ की तारीफ पर पलटवार करते हुए ब्रिटेन के चर्चित पत्रकार टोमी रॉबिन्सन ने तीखा तंज कसा। रॉबिन्सन ने पाकिस्तान में आतंकियों को पनाह मिलने की ओर इशारा करते हुए लिखा, "पाकिस्तान को फिर से भारत बना दो।
मुझे उस देश पर भरोसा नहीं है जिसने ओसामा बिन लादेन को छिपाकर पनाह दी।" सोशल मीडिया पर कई विदेशी यूजर्स ने भी पाकिस्तानियों की इस मांग को 'मूर्खतापूर्ण' करार देते हुए पुराने इतिहास की याद दिलाई।
होर्मुज स्ट्रेट पर ट्रंप की नाराजगी
इस कूटनीतिक ड्रामे के बीच जमीनी हालात अब भी तनावपूर्ण हैं। डोनाल्ड ट्रंप ने जानकारी दी है कि ईरान होर्मुज स्ट्रेट से गुजरने वाले टैंकरों से 'फीस' वसूल रहा है, जिसे उन्होंने तुरंत बंद करने की चेतावनी दी है। दूसरी ओर, इजरायली सेना ने लेबनान में हिजबुल्ला के लॉन्च साइट्स पर हमले शुरू कर दिए हैं।
इन सबके बीच पाकिस्तान अपनी मेजबानी और मध्यस्थता के दावों के जरिए अंतरराष्ट्रीय मंच पर अपनी साख बचाने की कोशिश कर रहा है, जिसे दुनिया फिलहाल शक की निगाह से देख रही है।