पाक-अफगान सीमा विवाद अब युद्ध में बदल चुका है, जिसमें 300 से अधिक मौतें और 500 घायल होने की खबर है।

नई दिल्ली : पाकिस्तान और अफगानिस्तान के बीच सीमा विवाद ने अब एक खूनी जंग का रूप ले लिया है। पिछले कुछ दिनों से जारी हवाई हमलों और जमीनी संघर्ष में दोनों पक्षों के 300 से अधिक लोगों के मारे जाने और 500 से अधिक के घायल होने की खबर है।

जहां तालिबान ने पाकिस्तान के भीतर घुसकर सैन्य ठिकानों को निशाना बनाया है, वहीं पाकिस्तान ने 'ऑपरेशन गजब-लिल-हक' के तहत अफगानिस्तान के कई प्रांतों में भारी बमबारी की है। इस तनाव के बीच वैश्विक राजनीति भी गरमा गई है, विशेषकर पूर्व अमेरिकी राष्ट्रपति डोनाल्ड ट्रंप के बयान और पाकिस्तान द्वारा भारत पर लगाए गए आरोपों ने मामले को और पेचीदा बना दिया है।

​जंग का ताज़ा मंजर: 300 मौतें और भारी तबाही

​सीमा पर जारी इस संघर्ष में तबाही का मंजर भयावह होता जा रहा है। आधिकारिक और मीडिया रिपोर्ट्स के अनुसार, अब तक 300 से ज्यादा लोगों की जान जा चुकी है, जिनमें सैनिक और आम नागरिक दोनों शामिल हैं। घायलों की संख्या 500 के पार पहुँच गई है। पाकिस्तान की ओर से किए गए हवाई हमलों में अफगानिस्तान के काबुल, कंधार, पक्तिया और नंगरहार जैसे प्रांतों को भारी नुकसान पहुँचा है, जबकि तालिबान ने जवाबी कार्रवाई में कई पाकिस्तानी सैन्य चौकियों को तबाह करने का दावा किया है।

​डोनाल्ड ट्रंप का बयान: "पाकिस्तान अच्छा प्रदर्शन कर रहा"

​इस युद्ध के बीच अमेरिका के पूर्व राष्ट्रपति डोनाल्ड ट्रंप का बयान चर्चा का विषय बना हुआ है। ट्रंप ने पाकिस्तान की सैन्य कार्रवाई पर टिप्पणी करते हुए कहा कि "पाकिस्तान अच्छा प्रदर्शन कर रहा है"। जब उनसे पूछा गया कि क्या अमेरिका इस संघर्ष में दखल देगा, तो उन्होंने कहा कि वे दखल दे सकते हैं, लेकिन उनके पाकिस्तान के साथ बहुत अच्छे संबंध हैं। ट्रंप के इस बयान को पाकिस्तान के लिए एक कूटनीतिक समर्थन के रूप में देखा जा रहा है।

​पाकिस्तान का भारत पर गंभीर आरोप

​हमेशा की तरह अपनी आंतरिक विफलताओं को छिपाने के लिए पाकिस्तान ने इस जंग के पीछे भी भारत का हाथ होने का दावा किया है। पाकिस्तानी सैन्य प्रवक्ता ने आरोप लगाया कि पाकिस्तान में होने वाले आतंकी हमलों और मौजूदा अस्थिरता के पीछे भारत की भूमिका है।

पाकिस्तान का कहना है कि इन गतिविधियों के लिए अफगान तालिबान के क्षेत्रों का इस्तेमाल किया जा रहा है, जिसे भारत का कथित समर्थन प्राप्त है। हालाँकि, भारत ने इन निराधार आरोपों को हमेशा की तरह सिरे से खारिज कर दिया है।

​विवाद की मुख्य जड़: 132 साल पुराना डूरंड लाइन विवाद

​पाकिस्तान और अफगानिस्तान के बीच इस कड़वाहट की मुख्य वजह 'डूरंड लाइन' है। 1893 में ब्रिटिश भारत और तत्कालीन अफगान सरकार के बीच हुए इस समझौते को तालिबान और कोई भी अफगान सरकार कभी मान्यता नहीं देती। 2430 किलोमीटर लंबी यह रेखा पश्तून समुदायों को दो देशों में बांटती है।

तालिबान का तर्क है कि यह समझौता जबरन थोपा गया था और इसे अब खत्म माना जाना चाहिए। यही वजह है कि सीमा पर बाड़ लगाने को लेकर अक्सर दोनों देशों के बीच गोलीबारी होती रहती है।

​तालिबान का 'मिशन बदला' और पाकिस्तानी चौकियों पर कब्जा

​अफगानिस्तान के रक्षा मंत्रालय ने दावा किया है कि उन्होंने पाकिस्तान की सीमा के भीतर घुसकर करारा जवाब दिया है। तालिबान के अनुसार, उनके लड़ाकों ने पाकिस्तान की 19 सैन्य चौकियों और दो प्रमुख बेस पर कब्जा कर लिया है। उन्होंने एक वीडियो भी साझा किया है जिसमें पाकिस्तानी सैन्य ठिकानों पर बमबारी और तबाही के दृश्य दिखाए गए हैं। तालिबान ने चेतावनी दी है कि यदि पाकिस्तान ने अपने हवाई हमले बंद नहीं किए, तो उसे और अधिक घातक परिणाम भुगतने होंगे।

​पाकिस्तानी सेना का 'ऑपरेशन गजब-लिल-हक'

​जवाब में पाकिस्तान ने 'ऑपरेशन गजब-लिल-हक' (Operation Ghazab-Lil-Haq) शुरू किया है। पाकिस्तानी वायुसेना ने न केवल सीमावर्ती इलाकों बल्कि अफगानिस्तान के बड़े शहरों में भी एयरस्ट्राइक की है। पाकिस्तानी सेना के प्रवक्ता अहमद शरीफ चौधरी के अनुसार, इस ऑपरेशन में अब तक 274 तालिबान लड़ाके मारे गए हैं और उनके कई टैंक और बख्तरबंद गाड़ियां नष्ट कर दी गई हैं। पाकिस्तान का दावा है कि उन्होंने कई अफगान चौकियों पर दोबारा नियंत्रण पा लिया है।

​पाकिस्तान में कड़ा निंदा प्रस्ताव

​तालिबान द्वारा पाकिस्तानी ठिकानों पर किए गए ड्रोन हमलों के बाद, पाकिस्तान के गृह मंत्रालय ने सुरक्षा चिंताओं को देखते हुए पूरे देश में निजी ड्रोन उड़ाने पर तत्काल प्रतिबंध लगा दिया है। वहीं, पाकिस्तान की सीनेट और संसद में अफगानिस्तान के खिलाफ एक कड़ा निंदा प्रस्ताव पास किया गया है। पाकिस्तान ने चेतावनी दी है कि भविष्य में किसी भी उकसावे पर वे "कड़ा और निर्णायक" जवाब देंगे। प्रधानमंत्री शहबाज शरीफ ने भी सेना मुख्यालय का दौरा कर 'जीरो टॉलरेंस' की नीति दोहराई है।

​अंतरराष्ट्रीय प्रतिक्रिया

​इस युद्ध ने न केवल क्षेत्रीय स्थिरता को खतरे में डाला है, बल्कि एक बड़ा मानवीय संकट भी पैदा कर दिया है। सीमावर्ती इलाकों से हजारों लोग पलायन कर रहे हैं। संयुक्त राष्ट्र और पड़ोसी देशों ने दोनों पक्षों से संयम बरतने की अपील की है। पाकिस्तान के सूचना मंत्री ने तालिबान सरकार को 'गैर-कानूनी' बताते हुए आरोप लगाया कि वहां महिलाओं और अल्पसंख्यकों के अधिकारों का हनन हो रहा है, जिससे कूटनीतिक स्तर पर दरार और चौड़ी हो गई है।