Middle East Conflict: ईरान और अमेरिका-इजरायल गठबंधन के बीच जारी जंग के 20वें दिन तनाव उस स्तर पर पहुँच गया है जहाँ से पीछे हटना नामुमकिन लग रहा है। अमेरिकी रक्षा मंत्री पीट हेगसेथ ने गुरुवार को एक कड़ा बयान जारी करते हुए कहा है कि ईरान आज अब तक के सबसे भीषण हमलों का सामना करेगा।
हेगसेथ ने स्पष्ट किया कि अमेरिका इस युद्ध को किसी समझौते के तहत नहीं, बल्कि अपनी शर्तों पर खत्म करेगा। इस बयान के बाद मिडिल ईस्ट में 'टोटल वॉर' का खतरा और भी गहरा गया है।
"ईरान देखेगा सबसे बड़ी स्ट्राइक": पीट हेगसेथ की खुली चेतावनी
अमेरिकी रक्षा मंत्री ने मीडिया से बात करते हुए कहा कि ईरानी नेतृत्व और उनके सैन्य ठिकानों को भारी कीमत चुकानी होगी। उन्होंने कहा, "ईरान आज फिर से सबसे बड़े हमलों का गवाह बनेगा।"
यह बयान उस वक्त आया है जब अमेरिका पहले ही दक्षिण ईरान में दुनिया की सबसे बड़ी प्राकृतिक गैस फील्ड 'साउथ पार्स' को निशाना बना चुका है। हेगसेथ के मुताबिक, अमेरिका का मकसद ईरान की हमला करने की क्षमता को पूरी तरह पंगु बनाना है।
हमारी शर्तों पर खत्म होगी जंग: ट्रंप प्रशासन का कड़ा रुख
राष्ट्रपति डोनाल्ड ट्रंप के नेतृत्व में अमेरिका ने इस बार कूटनीतिक नरमी के बजाय सैन्य श्रेष्ठता की नीति अपनाई है। हेगसेथ ने जोर देकर कहा कि "गल्फ वॉर अमेरिका की शर्तों पर ही समाप्त होगा।" अमेरिका अब किसी भी तरह के 'बैक-डोर नेगोशिएशन' या आधे-अधूरे युद्धविराम के मूड में नहीं है।
वाशिंगटन का सीधा संदेश है कि जब तक ईरान का परमाणु कार्यक्रम और उसके मिसाइल ठिकाने पूरी तरह खत्म नहीं हो जाते, हमले जारी रहेंगे।
साउथ पार्स के बाद अब नए टारगेट: क्या निशाने पर है तेहरान?
बुधवार को साउथ पार्स गैस फील्ड पर हुए हमले के बाद अब चर्चा है कि अमेरिका के अगले निशाने पर ईरान के परमाणु संयंत्र और राजधानी तेहरान के महत्वपूर्ण प्रशासनिक केंद्र हो सकते हैं। रक्षा विशेषज्ञों का मानना है कि अमेरिका 'बंकर बस्टर' बमों के जरिए उन सुरंगों और अंडरग्राउंड ठिकानों को नष्ट करने की योजना बना रहा है जहाँ ईरान ने अपना परमाणु जखीरा और कमांड सेंटर छिपा रखा है।
वैश्विक ऊर्जा संकट और खाड़ी देशों में खौफ
हेगसेथ के इस बयान ने वैश्विक तेल बाजार में हड़कंप मचा दिया है। ईरान पहले ही सऊदी अरब और यूएई को धमकी दे चुका है कि यदि उनके हवाई क्षेत्र का उपयोग हुआ तो वे भी सुरक्षित नहीं रहेंगे।
दूसरी ओर, भारत जैसे देश जो कच्चे तेल के लिए खाड़ी क्षेत्र पर निर्भर हैं, उनकी चिंताएं बढ़ गई हैं। ट्रंप प्रशासन की इस 'आर-पार' की नीति ने पूरी दुनिया को दो ध्रुवों में बांट दिया है।