नई दिल्ली : ईरान के साथ जारी युद्ध और मिडिल ईस्ट की अस्थिरता के बीच अब पाकिस्तान एक बार फिर अमेरिका की रडार पर आ गया है। दिलचस्प बात यह है कि अमेरिकी राष्ट्रपति डोनाल्ड ट्रंप एक तरफ पाकिस्तान के प्रधानमंत्री शहबाज शरीफ और सेना प्रमुख जनरल असीम मुनीर की खुलकर तारीफ करते नजर आ रहे हैं, लेकिन जमीनी हकीकत इससे बिल्कुल अलग है।
अमेरिकी खुफिया एजेंसियां पाकिस्तान को लेकर गंभीर खतरे की चेतावनी दे रही हैं। नीतिगत तौर पर अमेरिका भले ही 'दोस्ती का लॉलीपॉप' दे रहा हो, लेकिन सुरक्षा के स्तर पर वह पूरी तरह 'अलर्ट मोड' में है।
बैलिस्टिक मिसाइल: अमेरिका तक पहुँचने की बढ़ती मारक क्षमता
अमेरिकी खुफिया रिपोर्ट के मुताबिक, पाकिस्तान लगातार अपनी बैलिस्टिक मिसाइल तकनीक को मजबूत कर रहा है। अमेरिका को सबसे बड़ी चिंता इस बात की है कि पाकिस्तान अब इंटरकॉन्टिनेंटल बैलिस्टिक मिसाइल (ICBM) विकसित करने की राह पर है, जिसकी जद में सीधे अमेरिका आ सकता है।
इन मिसाइलों में परमाणु और पारंपरिक दोनों तरह के हथियार ले जाने की क्षमता है। इसी खतरे को देखते हुए अमेरिका ने हाल ही में पाकिस्तान के नेशनल डेवलपमेंट कॉम्प्लेक्स (NDC) समेत कई संस्थाओं पर प्रतिबंध भी लगाए थे।
आतंकवाद: पुराना खतरा अब भी वैश्विक सिरदर्द
पाकिस्तान को लेकर अमेरिका की दूसरी सबसे बड़ी चिंता आतंकवाद है। मार्च 2026 की शुरुआत में कराची में अमेरिकी कॉन्सुलेट पर हुए हमले के बाद अमेरिका ने हाई अलर्ट जारी किया था। अमेरिकी एजेंसियों का मानना है कि पाकिस्तान में सक्रिय TRF, TTP, ISIS-K और अल-कायदा से जुड़े नेटवर्क न सिर्फ क्षेत्र के लिए, बल्कि पूरी दुनिया के लिए खतरा हैं।
रिपोर्ट में कहा गया है कि ये संगठन भारत और पाकिस्तान के बीच तनाव बढ़ाकर परमाणु युद्ध जैसी स्थिति पैदा कर सकते हैं, जिसका उदाहरण अप्रैल 2025 का पहलगाम हमला है।
परमाणु हथियार: "टॉप-टियर न्यूक्लियर थ्रेट" की श्रेणी में पाकिस्तान
अमेरिका की 'एनुअल थ्रेट असेसमेंट रिपोर्ट' में पाकिस्तान को सीधे तौर पर "टॉप-टियर न्यूक्लियर थ्रेट" की श्रेणी में रखा गया है। पहले अमेरिका की चिंता सिर्फ इस बात तक सीमित थी कि परमाणु हथियार कहीं आतंकियों के हाथ न लग जाएं, लेकिन अब चिंता का दायरा बढ़ गया है।
पाकिस्तान की बढ़ती परमाणु क्षमता खुद एक रणनीतिक खतरे के रूप में देखी जा रही है। अमेरिका 2001 के बाद से लगातार यह सुनिश्चित करने की कोशिश करता रहा है कि पाकिस्तान का परमाणु जखीरा सुरक्षित रहे और इसके लिए उसने कई 'आपातकालीन सैन्य योजनाएं' भी तैयार की हैं।
FATF और आर्थिक दबाव की रणनीति
इन खतरों को देखते हुए अमेरिका लगातार पाकिस्तान पर कूटनीतिक और आर्थिक दबाव बनाए हुए है। पाकिस्तान को FATF की निगरानी में रखना, मिसाइल संस्थानों पर प्रतिबंध लगाना, संपत्तियां फ्रीज करना और "डू नॉट ट्रैवल" जैसी एडवाइजरी जारी करना इसी सोची-समझी रणनीति का हिस्सा है। एक तरफ जहाँ ट्रंप प्रशासन दोस्ती का हाथ बढ़ा रहा है, वहीं दूसरी तरफ खुफिया तंत्र पाकिस्तान के हर कदम की बारीकी से निगरानी कर रहा है।