नई दिल्ली : बांग्लादेश की राजनीति में एक बड़ा उलटफेर और सत्ता परिवर्तन आधिकारिक रूप से संपन्न हो गया है। बांग्लादेश नेशनलिस्ट पार्टी के प्रमुख तारिक रहमान ने देश के नए प्रधानमंत्री के रूप में शपथ ले ली है। राजधानी ढाका स्थित नेशनल पार्लियामेंट में आयोजित एक गरिमामय समारोह के दौरान उन्हें पद और गोपनीयता की शपथ दिलाई गई।
लंबे समय तक निर्वासन में रहने और राजनीतिक संघर्ष के बाद तारिक रहमान की सत्ता में वापसी को उनके समर्थकों द्वारा एक बड़ी जीत के रूप में देखा जा रहा है।
निर्वासन से सत्ता के शिखर तक का सफर
तारिक रहमान, जो बांग्लादेश की पूर्व प्रधानमंत्री बेगम खालिदा जिया के बेटे हैं, लंबे समय तक लंदन में निर्वासन में थे। उनके ऊपर कई कानूनी मामले और आरोप थे, लेकिन हालिया राजनीतिक घटनाक्रमों और देश में हुए बड़े बदलावों के बाद उनके लिए वापसी का रास्ता साफ हुआ। उनके प्रधानमंत्री बनने के साथ ही बांग्लादेश में अवामी लीग के लंबे शासन के बाद अब बीएनपी की सरकार का दौर शुरू हो गया है।
नेशनल पार्लियामेंट में सुरक्षा के कड़े इंतजाम
शपथ ग्रहण समारोह के मद्देनजर पूरे ढाका और विशेष रूप से नेशनल पार्लियामेंट के आसपास सुरक्षा की अभूतपूर्व व्यवस्था की गई थी। समारोह में सेना के शीर्ष अधिकारी, विभिन्न देशों के राजनयिक और बीएनपी के दिग्गज नेता शामिल हुए।
तारिक रहमान ने शपथ लेने के बाद अपने संक्षिप्त संबोधन में देश में लोकतंत्र की बहाली और कानून के शासन को सर्वोच्च प्राथमिकता देने की बात कही।
देश के सामने खड़ी चुनौतियां
प्रधानमंत्री की कुर्सी संभालते ही तारिक रहमान के सामने चुनौतियों का पहाड़ खड़ा है। बांग्लादेश फिलहाल आर्थिक अस्थिरता, कानून-व्यवस्था की बिगड़ती स्थिति और राजनीतिक विभाजन के दौर से गुजर रहा है। उन्होंने अपने संबोधन में वादा किया है कि उनकी सरकार बिना किसी भेदभाव के सभी नागरिकों के विकास के लिए काम करेगी और पड़ोसी देशों के साथ संबंधों को नई मजबूती प्रदान करेगी।
समर्थकों में भारी उत्साह
तारिक रहमान के शपथ लेते ही पूरे बांग्लादेश में बीएनपी कार्यकर्ताओं ने जश्न मनाना शुरू कर दिया। ढाका की सड़कों पर हजारों की संख्या में लोग झंडे लेकर निकले और इसे 'लोकतंत्र की नई सुबह' करार दिया।
राजनीतिक विश्लेषकों का मानना है कि तारिक रहमान के नेतृत्व में बांग्लादेश की विदेश नीति और आंतरिक शासन व्यवस्था में बड़े बदलाव देखने को मिल सकते हैं।