विश्व युद्ध की दस्तक: ईरान की अमेरिका और इजरायल को सीधी चेतावनी, कहा- 'गुस्ताखी की तो मिलिट्री बेस को बना देंगे कब्रिस्तान'

इजरायल इस पूरे विवाद में सबसे अधिक सक्रिय और सतर्क दिखाई दे रहा है।
नई दिल्ली : पश्चिम एशिया में युद्ध के बादल अब और गहरे हो गए हैं। ईरान और अमेरिका के बीच दशकों से चला आ रहा तनाव अब उस खतरनाक मुहाने पर पहुंच गया है जहा एक छोटी सी सैन्य गलती विश्व युद्ध का रूप ले सकती है।
ईरान ने आधिकारिक तौर पर घोषणा की है कि यदि अमेरिका या इजरायल ने उसकी सीमाओं के भीतर कोई भी सैन्य हिमाकत की, तो वह 'कयामत' बरपा देगा।
ईरान की ओर से यह चेतावनी ऐसे समय आई है जब खाड़ी क्षेत्र में अमेरिकी युद्धपोतों की हलचल तेज हो गई है। ईरान ने स्पष्ट संदेश दिया है कि उसकी मिसाइलें अब केवल बचाव के लिए नहीं, बल्कि निर्णायक हमले के लिए तैनात हैं।
ईरान का 'फर्स्ट स्ट्राइक' अल्टीमेटम और मिसाइल शक्ति का प्रदर्शन
ईरान की संसद के अध्यक्ष मोहम्मद बागेर कलिबाफ ने तेहरान में एक उच्च स्तरीय सत्र के दौरान वैश्विक शक्तियों को कड़ा संदेश दिया। उन्होंने कहा कि ईरान अब 'हमले का इंतजार' करने की पुरानी रक्षा नीति को त्याग चुका है।
अब यदि ईरान की संप्रभुता या उसके परमाणु संयंत्रों को जरा सा भी खतरा महसूस हुआ, तो वह प्री-एम्पटिव स्ट्राइक करेगा। ईरानी रिवोल्यूशनरी गार्ड्स ने दावा किया है कि उनकी लंबी दूरी की मिसाइलें न केवल इजरायल के हर कोने तक पहुँचने में सक्षम हैं, बल्कि कतर, बहरीन और यूएई में स्थित अमेरिकी सैन्य अड्डों को भी पलक झपकते ही तबाह कर सकती हैं।
ट्रंप प्रशासन का कड़ा रुख और अमेरिकी सैन्य विकल्पों की तैयारी
अमेरिकी राष्ट्रपति डोनाल्ड ट्रंप ने ईरान के भीतर चल रहे नागरिक विद्रोह को वैश्विक मुद्दा बनाते हुए ईरानी शासन को घेरा है। ट्रंप ने अपने ताजा बयानों में कहा है कि अमेरिका "ईरान के वीर नागरिकों" को मरते हुए नहीं देख सकता।
पेंटागन के सूत्रों के हवाले से खबर है कि अमेरिका ने फारस की खाड़ी में बी-52 बमवर्षक विमानों और विमान वाहक पोतों की तैनाती बढ़ा दी है।
ट्रंप ने स्पष्ट चेतावनी दी है कि यदि प्रदर्शनकारियों पर हिंसा नहीं रुकी, तो अमेरिका ईरान के कमांड सेंटर्स और तेल रिफाइनरियों पर "सर्जिकल स्ट्राइक" करने से पीछे नहीं हटेगा। व्हाइट हाउस अब ईरान पर "अधिकतम दबाव" की नीति को सैन्य कार्रवाई के स्तर तक ले जाने पर विचार कर रहा है।
इजरायल की 'रेड लाइन' और क्षेत्रीय सुरक्षा का संकट
इजरायल इस पूरे विवाद में सबसे अधिक सक्रिय और सतर्क दिखाई दे रहा है। इजरायली प्रधानमंत्री और रक्षा मंत्रालय ने सेना को 'वॉर मोड' में रहने का आदेश दिया है।
इजरायल का मानना है कि ईरान अपनी आंतरिक अस्थिरता और जनता के गुस्से से ध्यान भटकाने के लिए इजरायल के खिलाफ युद्ध छेड़ सकता है। इजरायल ने अपनी 'रेड लाइन' साफ कर दी है यदि ईरान ने परमाणु संवर्धन की सीमा पार की या अपने प्रॉक्सी संगठनों के जरिए इजरायल पर हमला किया, तो इजरायल तेहरान के भीतर सीधे टारगेट हिट करेगा। इजरायली वायुसेना ने हाल ही में लंबी दूरी के हमलों का अभ्यास भी किया है, जो सीधे तौर पर ईरान के लिए एक संकेत है।
ईरान में उग्र आंतरिक विद्रोह और मानवाधिकारों का हनन
ईरान के भीतर हालात अब नियंत्रण से बाहर होते दिख रहे हैं। देश के 31 प्रांतों के 80 से अधिक शहरों में सरकार विरोधी प्रदर्शनों ने हिंसक रूप ले लिया है। प्रदर्शनकारी अब केवल आर्थिक सुधार नहीं, बल्कि 'इस्लामी गणतंत्र' के अंत की मांग कर रहे हैं।
मानवाधिकार संगठनों की रिपोर्ट के अनुसार, ईरानी सुरक्षा बलों ने प्रदर्शनों को कुचलने के लिए घातक हथियारों का प्रयोग किया है, जिसमें अब तक 200 से अधिक लोगों की जान जा चुकी है।
शासन ने पूरे देश में इंटरनेट पर प्रतिबंध लगा दिया है ताकि सुरक्षा बलों की कार्रवाई के वीडियो दुनिया तक न पहुँच सकें। खामेनेई प्रशासन इन प्रदर्शनों को विदेशी साजिश करार दे रहा है, जबकि जनता बुनियादी अधिकारों की मांग पर अड़ी है।
वैश्विक ऊर्जा संकट और विश्व अर्थव्यवस्था पर पड़ने वाला प्रभाव
विशेषज्ञों का मानना है कि यदि यह तनाव वास्तविक युद्ध में बदलता है, तो इसकी कीमत पूरी दुनिया को चुकानी होगी। ईरान के पास 'हॉर्मुज जलडमरूमध्य' को बंद करने की ताकत है, जो दुनिया का सबसे महत्वपूर्ण तेल मार्ग है।
यदि यह मार्ग बाधित होता है, तो वैश्विक बाजार में कच्चे तेल की आपूर्ति ठप हो जाएगी, जिससे पेट्रोल-डीजल की कीमतें आसमान छूने लगेंगी।
भारत जैसे देशों के लिए यह स्थिति और भी गंभीर हो सकती है, क्योंकि हमारी ऊर्जा जरूरतों का बड़ा हिस्सा इसी क्षेत्र से आता है।
इस युद्ध की आहट ने न केवल खाड़ी देशों, बल्कि पूरे वैश्विक शेयर बाजार और अर्थव्यवस्था में अनिश्चितता का माहौल पैदा कर दिया है।
