ईरान में गृहयुद्ध और युद्ध की आहट: 10 हजार भारतीय छात्र फंसे, कश्मीरी परिवारों ने की सरकार से 'एयरलिफ्ट' की गुहार

10 हजार भारतीय छात्र फंसे, कश्मीरी परिवारों ने की सरकार से एयरलिफ्ट की गुहार
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श्रीनगर में कश्मीरी अभिभावकों ने सरकार से छात्रों को एयरलिफ्ट करने की अपील की है क्योंकि इंटरनेट बंद होने से संपर्क टूट गया है।

नई दिल्ली : ​ईरान में अयातुल्ला अली खामेनेई शासन के खिलाफ जारी हिंसक विरोध प्रदर्शनों और इस बीच अमेरिका व इजरायल के साथ बढ़ते सैन्य तनाव ने वहां रह रहे भारतीयों के लिए संकट पैदा कर दिया है।

वर्तमान में ईरान में करीब 10 हजार भारतीय छात्र पढ़ाई कर रहे हैं, जिनमें से एक बड़ी संख्या जम्मू-कश्मीर के छात्रों की है। तेहरान और अन्य प्रमुख शहरों में बिगड़ते हालात को देखते हुए कश्मीरी छात्रों के अभिभावकों ने प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी और विदेश मंत्रालय से अपने बच्चों को सुरक्षित वापस लाने के लिए 'ऑपरेशन गंगा' जैसा रेस्क्यू मिशन चलाने की भावुक अपील की है।

​विदेश मंत्रालय की सख्त एडवाइजरी और 'लीव ईरान' का निर्देश

​भारत के विदेश मंत्रालय ने 14 जनवरी 2026 को एक ताजा और सख्त एडवाइजरी जारी की है। इसमें भारतीय नागरिकों को स्पष्ट रूप से सलाह दी गई है कि वे अगली सूचना तक ईरान की यात्रा से पूरी तरह बचें।

वहीं, तेहरान स्थित भारतीय दूतावास ने वहां मौजूद छात्रों, तीर्थयात्रियों और व्यवसायियों से कहा है कि वे उपलब्ध व्यावसायिक उड़ानों के जरिए तुरंत ईरान छोड़ दें।

दूतावास ने सभी भारतीयों को अपने पासपोर्ट और पहचान दस्तावेज हर समय तैयार रखने और विरोध प्रदर्शन वाले क्षेत्रों से दूर रहने के निर्देश दिए हैं।

​इंटरनेट ब्लैकआउट और कश्मीरी अभिभावकों की बढ़ती बेचैनी

​श्रीनगर के प्रेस एन्क्लेव में बुधवार को दर्जनों चिंतित माता-पिता एकत्रित हुए और सरकार से हस्तक्षेप की मांग की।

अभिभावकों का कहना है कि ईरान में इंटरनेट सेवाओं के ठप्प होने के कारण वे अपने बच्चों से संपर्क नहीं कर पा रहे हैं। कई परिजनों ने बताया कि उनके बच्चों के पास घर वापस आने के लिए टिकट खरीदने के पैसे नहीं हैं या इंटरनेट बंद होने के कारण वे ऑनलाइन ट्रांजेक्शन नहीं कर पा रहे हैं।

छात्रों ने अपने परिजनों को बताया है कि दूतावास ने उन्हें अपने स्तर पर निकलने को कहा है, लेकिन हवाई टिकटों की कीमतें आसमान छू रही हैं और उड़ानें रद्द हो रही हैं, जिससे वे बीच मझधार में फंस गए हैं।

​हवाई क्षेत्र का संकट और उड़ानों पर असर

​जंग की आशंका के चलते ईरान के हवाई क्षेत्र में जोखिम बढ़ गया है, जिसके कारण अंतरराष्ट्रीय एयरलाइंस अपनी उड़ानों को डायवर्ट कर रही हैं।

भारतीय विमानन कंपनियों ने भी प्रभावित क्षेत्रों के ऊपर से उड़ान न भरने का फैसला किया है, जिससे उड़ानों की संख्या कम हो गई है और किराया काफी बढ़ गया है।

यह उन छात्रों के लिए एक बड़ी बाधा बन गया है जो तुरंत देश छोड़ना चाहते हैं। व्यापारिक दृष्टि से भी चाबहार पोर्ट और भारत-ईरान के बीच होने वाले आयात-निर्यात पर इस संकट की काली छाया मंडराने लगी है।

​मेडिकल छात्रों का बड़ा संकट

​ईरान भारतीय छात्रों के लिए किफायती एमबीबीएस की पढ़ाई का एक बड़ा केंद्र है। 10 हजार छात्रों में से अधिकतर मेडिकल के छात्र हैं जो अलग-अलग प्रांतों के छात्रावासों में रह रहे हैं।

विरोध प्रदर्शनों के हिंसक होने और सुरक्षा बलों की कार्रवाई के बीच विश्वविद्यालय और हॉस्टल खाली कराए जा रहे हैं। जम्मू-कश्मीर छात्र संघ (JKSA) ने भी केंद्र सरकार को पत्र लिखकर अनुरोध किया है कि कश्मीरी छात्रों की सुरक्षा सुनिश्चित करने के लिए ईरानी अधिकारियों के साथ कूटनीतिक स्तर पर बातचीत की जाए और जरूरत पड़ने पर उन्हें एयरलिफ्ट करने के लिए विशेष विमान भेजे जाएं।

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