कश्मीर पर अमेरिका का बड़ा स्टैंड: शेयर किया भारत का 'अखंड' नक्शा; पाकिस्तान को लगी मिर्ची

India-US Trade Deal: Signal changes with Kashmir map, giving India a strategic advantage
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India-US Interim Trade Framework में USTR द्वारा साझा किए गए भारत के आधिकारिक नक्शे ने हलचल मचा दी है। जम्मू-कश्मीर और लद्दाख को अभिन्न दिखाकर अमेरिका ने भारत के रुख का समर्थन किया, साथ ही टैरिफ में बड़ी राहत दी।

भारत-अमेरिका व्यापार समझौते के बाद अमेरिकी व्यापार प्रतिनिधि (USTR) ने भारत का पूर्ण क्षेत्रीय मानचित्र साझा किया है। इसमें जम्मू-कश्मीर और लद्दाख को भारत का अभिन्न अंग दिखाया गया है, जिसे पाकिस्तान के लिए बड़ा कूटनीतिक झटका माना जा रहा है।

India US Trade Deal: भारत और अमेरिका के बीच हुई ट्रेड डील (Interim Trade Framework) ने न केवल आर्थिक बल्कि रणनीतिक चर्चाओं को भी जन्म दे दिया है। अमेरिकी व्यापार प्रतिनिधि (USTR) द्वारा इस समझौते की घोषणा के लिए साझा किए गए एक पोस्ट ने सबका ध्यान अपनी ओर खींच लिया। इस पोस्ट में भारत का जो आधिकारिक मानचित्र दिखाया गया है, वह नई दिल्ली के उस रुख का समर्थन करता नजर आ रहा है जिसे भारत दशकों से वैश्विक मंचों पर रखता आया है।

नक्शे में जम्मू-कश्मीर और लद्दाख को दिखाया अभिन्न अंग
USTR द्वारा साझा किए गए इन्फोग्राफिक में भारत के पूर्ण क्षेत्रीय दावे को प्रदर्शित किया गया है। इसमें केंद्र शासित प्रदेश जम्मू-कश्मीर और लद्दाख को पूरी तरह से भारतीय सीमा के भीतर दिखाया गया है। खास बात यह है कि इस नक्शे में पाक अधिकृत कश्मीर (PoK) या चीन प्रशासित अक्साई चिन के लिए कोई अलग सीमांकन, छायांकन या 'डॉटेड लाइन्स' (बिंदीदार रेखाएं) नहीं दी गई हैं। यह चित्रण बिल्कुल वैसा ही है जैसा भारत सरकार 2019 के पुनर्गठन के बाद अपने राजनीतिक मानचित्रों में उपयोग करती है।



ऐतिहासिक स्टैंड से अलग अमेरिका का नया संकेत
ऐतिहासिक रूप से अमेरिका आधिकारिक मानचित्रों और बयानों में जम्मू-कश्मीर को अक्सर एक 'विवादित क्षेत्र' के रूप में वर्णित करता आया है और भारत-पाकिस्तान संबंधों में तटस्थता बनाए रखने की कोशिश करता रहा है। हालांकि, इस बार एक महत्वपूर्ण व्यापारिक घोषणा के साथ भारत के पूर्ण मानचित्र का उपयोग करना इस्लामाबाद के लिए एक स्पष्ट और कड़ा संदेश माना जा रहा है।

विशेषज्ञों का मानना है कि वाशिंगटन ने चुपचाप लेकिन स्पष्ट रूप से कश्मीर पर भारत की अखंडता को लेकर अपना समर्थन प्रदर्शित किया है।

समझौते से किसे क्या मिला?
6 फरवरी 2026 को घोषित इस अंतरिम फ्रेमवर्क के तहत अमेरिकी निर्यातकों को भारतीय बाजार में बड़ी राहत मिली है। इसके तहत अमेरिकी ड्राई फ्रूट्स, सोरघम और अनाज उत्पादकों को शुल्क मुक्त या कम शुल्क पर भारतीय बाजार तक पहुंच मिलेगी। इसके बदले में, भारतीय माल पर अमेरिकी टैरिफ को 50 प्रतिशत से घटाकर 18 प्रतिशत करने का निर्णय लिया गया है। इससे भारतीय निर्यातकों पर दबाव कम होगा और दोनों देशों के बीच व्यापारिक संबंधों का एक नया अध्याय शुरू होगा।

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