बजट 2026: भारत ने बांग्लादेश और मालदीव की आर्थिक मदद में की कटौती, नेपाल-भूटान पर मेहरबान हुई सरकार

भारत ने बांग्लादेश और मालदीव की आर्थिक मदद में की कटौती, नेपाल-भूटान पर मेहरबान हुई सरकार
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भारत नेपाल और भूटान में निवेश बढ़ाकर भारत अपनी उत्तरी सीमाओं पर सुरक्षा और विश्वास का माहौल मजबूत करना चाहता है।

यह रणनीतिक बदलाव क्षेत्रीय सुरक्षा और भरोसेमंद द्विपक्षीय संबंधों को मजबूत करने के उद्देश्य से किया गया है, ताकि पड़ोसी देशों में बुनियादी ढांचे का विकास हो सके।

नई दिल्ली: केंद्र सरकार ने बजट 2026 में अपनी 'नेबरहुड फर्स्ट' नीति के तहत विदेशी सहायता के आवंटन में बड़े फेरबदल किए हैं। वित्त मंत्री द्वारा पेश किए गए आंकड़ों के अनुसार, भारत ने अपने दो अहम पड़ोसियों—बांग्लादेश और मालदीव—को दी जाने वाली आर्थिक सहायता में भारी कटौती की है।

वहीं दूसरी ओर, नेपाल और भूटान जैसे भरोसेमंद सहयोगियों के लिए बजट आवंटन में उल्लेखनीय वृद्धि की गई है। यह कदम दक्षिण एशिया में बदलते भू-राजनीतिक समीकरणों और भारत के रणनीतिक हितों को ध्यान में रखते हुए उठाया गया माना जा रहा है।

बांग्लादेश और मालदीव की सहायता में भारी कमी

​बजट 2026 के आंकड़ों के मुताबिक, बांग्लादेश को दी जाने वाली विकास सहायता में पिछले साल के मुकाबले बड़ी कटौती की गई है। जानकारों का मानना है कि बांग्लादेश में हालिया राजनीतिक अस्थिरता और शासन परिवर्तन के बाद परियोजनाओं की गति धीमी होना इसका एक मुख्य कारण हो सकता है।

इसी तरह, मालदीव के लिए भी आवंटित राशि कम कर दी गई है। पिछले कुछ समय में मालदीव की 'इंडिया आउट' नीति और चीन के प्रति बढ़ते झुकाव के कारण भारत ने अपनी आर्थिक रणनीति में यह बदलाव किया है।

​नेपाल और भूटान के लिए बढ़े सरकारी खजाने के द्वार

​भारत ने अपने पारंपरिक और भरोसेमंद दोस्तों, नेपाल और भूटान के प्रति अपनी प्रतिबद्धता को और मजबूत किया है। इस बजट में नेपाल को दी जाने वाली सहायता राशि में भारी बढ़ोतरी की गई है, जिससे वहां चल रही बुनियादी ढांचा परियोजनाओं और कनेक्टिविटी को गति मिलेगी।

वहीं, भूटान भारत की विदेशी सहायता का सबसे बड़ा लाभार्थी बना हुआ है। भूटान के लिए बजट में वृद्धि का उद्देश्य जलविद्युत परियोजनाओं और रणनीतिक रूप से महत्वपूर्ण सड़क निर्माण कार्यों को समय पर पूरा करना है।

​क्षेत्रीय स्थिरता और रणनीतिक निवेश पर भारत का फोकस

​विदेशी सहायता में इस बदलाव के पीछे भारत का स्पष्ट संदेश है कि वह उन देशों को प्राथमिकता दे रहा है जो क्षेत्रीय सुरक्षा और द्विपक्षीय संबंधों के प्रति गंभीर हैं। सरकार का लक्ष्य दक्षिण एशिया में चीन के बढ़ते प्रभाव को कम करना और उन देशों के साथ आर्थिक साझेदारी बढ़ाना है जो भारत के साथ मिलकर विकास की राह पर चल रहे हैं।

नेपाल और भूटान में निवेश बढ़ाकर भारत अपनी उत्तरी सीमाओं पर सुरक्षा और विश्वास का माहौल मजबूत करना चाहता है।

​अफगानिस्तान और अन्य देशों के लिए भी प्रावधान

​पड़ोसियों के अलावा, भारत ने अफगानिस्तान के मानवीय संकट को देखते हुए वहां के लोगों के लिए मदद जारी रखने का फैसला किया है। साथ ही, मॉरीशस, सेशेल्स और अफ्रीकी देशों के लिए भी बजट में संतुलित आवंटन किया गया है।

विदेश मंत्रालय के माध्यम से दी जाने वाली इस सहायता का मुख्य उद्देश्य 'वसुधैव कुटुंबकम' की भावना के साथ-साथ ग्लोबल साउथ में भारत के नेतृत्व को और अधिक प्रभावी बनाना है।

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