'स्पेशल ट्रेड स्टेटस': अमेरिका में भारत को 18% टैरिफ फायदा, चीन-पाकिस्तान को बड़ा झटका

यह समझौता अमेरिका की 'फ्रेंडशोरिंग' नीति का हिस्सा माना जा रहा है।
नई दिल्ली: वैश्विक व्यापार के मोर्चे पर भारत के लिए एक बड़ी और सुखद खबर सामने आई है। अमेरिका के साथ हुए हालिया व्यापारिक समझौते के बाद भारत को चीन, पाकिस्तान और बांग्लादेश जैसे प्रतिस्पर्धियों के मुकाबले जबरदस्त बढ़त हासिल हो गई है।
नए नियमों के तहत अब भारतीय उत्पादों पर अमेरिका में लगने वाले टैरिफ में भारी कटौती की गई है, जिससे अमेरिकी बाजार में भारतीय सामान अब चीन और पाकिस्तान के मुकाबले कहीं ज्यादा सस्ता और प्रतिस्पर्धी हो जाएगा।
इस समझौते को 'मेक इन इंडिया' अभियान के लिए एक मील का पत्थर माना जा रहा है।
भारतीय निर्यातकों के लिए 18 प्रतिशत का बड़ा फायदा
इस नए ट्रेड डील की सबसे बड़ी विशेषता टैरिफ स्ट्रक्चर में किया गया बदलाव है। आंकड़ों के अनुसार, भारत को अब चीन और अन्य पड़ोसी देशों के मुकाबले लगभग 18 प्रतिशत तक का टैरिफ एडवांटेज प्राप्त होगा।
इसका सीधा मतलब यह है कि अगर कोई अमेरिकी कंपनी चीन या पाकिस्तान से माल मंगाती है, तो उसे भारी टैक्स देना होगा, जबकि भारत से आयात करने पर उसे बड़ी रियायत मिलेगी।
यह कदम अमेरिकी कंपनियों को अपनी सप्लाई चेन चीन से हटाकर भारत की ओर मोड़ने के लिए प्रेरित करेगा।
चीन और पाकिस्तान के लिए बड़ा झटका
अमेरिका और चीन के बीच जारी ट्रेड वॉर के बीच इस समझौते ने चीन की कमर तोड़ दी है। अब तक अमेरिकी बाजार में कपड़ा, इलेक्ट्रॉनिक्स और इंजीनियरिंग सामानों के मामले में बांग्लादेश और पाकिस्तान जैसे देश भारत को कड़ी टक्कर देते थे, लेकिन 18% के टैरिफ अंतर ने उनकी गणित बिगाड़ दी है।
विशेषज्ञों का मानना है कि इस डील के बाद अमेरिका में चीन का वर्चस्व कम होगा और भारत एक 'ग्लोबल मैन्युफैक्चरिंग हब' के रूप में अपनी स्थिति और मजबूत करेगा।
इन प्रमुख सेक्टरों को मिलेगी नई रफ्तार
इस समझौते का सबसे सकारात्मक असर भारत के टेक्सटाइल, लेदर, जेम्स एंड ज्वेलरी, और इंजीनियरिंग गुड्स पर पड़ेगा। टैरिफ में कमी आने से अमेरिका में भारतीय कपड़ों और जूतों की मांग तेजी से बढ़ेगी।
इसके अलावा, आईटी और फार्मास्युटिकल सेक्टर को भी इस नए व्यापारिक माहौल से बूस्ट मिलने की उम्मीद है। भारतीय निर्यातकों का मानना है कि इस डील से आने वाले वित्तीय वर्ष में भारत के कुल निर्यात में रिकॉर्ड बढ़ोतरी दर्ज की जा सकती है।
'फ्रेंडशोरिंग' की दिशा में मजबूत कदम
यह समझौता अमेरिका की 'फ्रेंडशोरिंग' नीति का हिस्सा माना जा रहा है, जहाँ अमेरिका अपने भरोसेमंद मित्र देशों के साथ व्यापारिक संबंधों को प्राथमिकता दे रहा है।
भारत और अमेरिका के बीच बढ़ती रणनीतिक नजदीकी अब आर्थिक समृद्धि का रास्ता खोल रही है। इस डील से न केवल भारत का विदेशी मुद्रा भंडार बढ़ेगा, बल्कि देश के भीतर लाखों नए रोजगार के अवसर भी पैदा होंगे।
वाणिज्य मंत्रालय के सूत्रों के अनुसार, भारत अब अन्य यूरोपीय देशों के साथ भी इसी तरह के समझौतों के लिए बातचीत तेज कर रहा है।
