India-EU Mega Trade Deal: 'मदर ऑफ ऑल डील्स' से बदलेगी दुनिया की आर्थिक तस्वीर, ट्रंप के टैरिफ का होगा अंत

मदर ऑफ ऑल डील्स से बदलेगी दुनिया की आर्थिक तस्वीर, ट्रंप के टैरिफ का होगा अंत
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यह डील 27 देशों के यूरोपीय बाजार और 140 करोड़ से अधिक आबादी वाले भारतीय बाजार को एक सूत्र में बांधेगी।

यह डील ट्रंप के टैरिफ का मुकाबला करने और भारतीय निर्यात को यूरोप में नई पहचान दिलाने में मदद करेगी।

नई दिल्ली : ​भारत और यूरोपीय संघ (EU) ने आखिरकार दुनिया के सबसे बड़े मुक्त व्यापार समझौतों में से एक को अंतिम रूप दे दिया है। यूरोपीय आयोग की अध्यक्ष उर्सुला वॉन डेर लेयन और प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी की मौजूदगी में इस ऐतिहासिक डील की घोषणा की गई।

यह समझौता ऐसे समय में आया है जब अमेरिकी राष्ट्रपति डोनाल्ड ट्रंप की "अमेरिका फर्स्ट" और भारी टैरिफ वाली नीतियों ने वैश्विक व्यापार में अनिश्चितता पैदा कर दी है।

यह डील 27 देशों के यूरोपीय बाजार और 140 करोड़ से अधिक आबादी वाले भारतीय बाजार को एक सूत्र में बांधेगी, जो मिलकर वैश्विक जीडीपी का लगभग एक चौथाई हिस्सा हैं।

​ट्रंप के भारी टैरिफ के खिलाफ भारत का अभेद्य सुरक्षा कवच

​डोनाल्ड ट्रंप द्वारा भारतीय निर्यात पर लगाए गए 50% तक के भारी टैरिफ ने भारतीय कंपनियों के लिए अमेरिकी बाजार में बहुत मुश्किलें खड़ी कर दी हैं। ऐसे में यूरोपीय संघ के साथ यह समझौता भारत के लिए एक मजबूत विकल्प और सुरक्षा कवच की तरह काम करेगा।

अब भारतीय निर्यातक अमेरिका पर अपनी निर्भरता कम करके यूरोप के समृद्ध बाजारों में अपना माल बिना किसी अतिरिक्त शुल्क के भेज सकेंगे।

यह डील सीधे तौर पर ट्रंप की संरक्षणवादी नीतियों को चुनौती देती है और वैश्विक मंच पर भारत की स्थिति को एक वैकल्पिक व्यापारिक केंद्र के रूप में और अधिक मजबूत करती है।

​भारतीय कपड़ा और गारमेंट सेक्टर को मिलेगी नई संजीवनी

​इस समझौते के तहत भारत के श्रम-प्रधान क्षेत्रों, विशेषकर कपड़ा उद्योग को सबसे बड़ा लाभ मिलने की उम्मीद है।

यूरोपीय संघ में भारतीय कपड़ों पर फिलहाल लगभग 10% की ड्यूटी लगती है, जो इस समझौते के लागू होने के बाद पूरी तरह समाप्त या न्यूनतम हो जाएगी।

इससे अंतरराष्ट्रीय बाजार में भारतीय कपड़ा उद्योग की प्रतिस्पर्धात्मक क्षमता बढ़ेगी और भारत, बांग्लादेश व वियतनाम जैसे देशों को कड़ी टक्कर दे पाएगा। यह बदलाव न केवल निर्यात को बढ़ाएगा बल्कि देश के भीतर लाखों नए रोजगार के अवसर भी पैदा करेगा।

​चमड़ा उद्योग और आईटी सेवाओं के लिए खुलेंगे प्रगति के द्वार

​आगरा और कानपुर जैसे शहरों के चमड़ा और फुटवियर उद्योग के लिए यूरोप एक बहुत बड़ा और आकर्षक बाजार बनने जा रहा है। शून्य शुल्क की सुविधा मिलने से भारतीय चमड़ा उत्पादों की मांग यूरोपीय देशों में तेजी से बढ़ेगी।

इसके साथ ही, भारत के आईटी क्षेत्र और पेशेवर सेवाओं के लिए भी यह समझौता वरदान साबित होगा। अब भारतीय सॉफ्टवेयर इंजीनियरों और अन्य पेशेवरों के लिए यूरोप में काम करना और अपनी सेवाएं देना पहले से कहीं अधिक आसान होगा, जिससे भारत के 'सर्विस एक्सपोर्ट' में एक बड़ा उछाल देखने को मिलेगा।

​यूरोपीय लग्जरी कारों और वाइन पर गिरेगी टैरिफ की ऊंची दीवारें

​यूरोपीय संघ लंबे समय से भारत में अपनी कारों और शराब पर लगने वाले ऊंचे आयात शुल्क को कम करने की मांग करता रहा है।

इस समझौते के तहत भारत ने लग्जरी यूरोपीय कारों पर लगने वाले 110% के भारी शुल्क को घटाकर शुरुआती तौर पर 40% करने पर सहमति जताई है, जिसे भविष्य में और भी कम किया जा सकता है।

इससे वोक्सवैगन, मर्सिडीज-बेंज और बीएमडब्ल्यू जैसी कंपनियों के लिए भारतीय बाजार में विस्तार करना आसान होगा। इसी तरह, प्रीमियम यूरोपीय वाइन के लिए भी बाजार के रास्ते खुलेंगे, जिससे भारतीय उपभोक्ताओं को अधिक विकल्प मिल सकेंगे।

​चीन पर वैश्विक निर्भरता कम करने की रणनीतिक साझेदारी

​यह समझौता केवल व्यापार और मुनाफे तक सीमित नहीं है, बल्कि इसके पीछे एक बहुत बड़ी वैश्विक रणनीतिक चाल भी छिपी है। भारत और यूरोपीय संघ दोनों ही अपनी 'सप्लाई चेन' के लिए चीन पर निर्भरता को कम करना चाहते हैं।

इस डील के जरिए यूरोपीय कंपनियां अपने विनिर्माण केंद्र चीन से हटाकर भारत में स्थानांतरित करने के लिए प्रेरित होंगी। इससे भारत के 'मेक इन इंडिया' अभियान को जबरदस्त मजबूती मिलेगी और भारत एक वैश्विक मैन्युफैक्चरिंग हब के रूप में अपनी पहचान स्थापित कर पाएगा।

​भारतीय उत्पादों के लिए जीआई टैग और निवेश की सुरक्षा

​व्यापार समझौते के साथ-साथ दोनों पक्ष निवेश सुरक्षा और 'जियोग्राफिकल इंडिकेशंस' को सुरक्षित करने पर भी काम कर रहे हैं। इसका सीधा मतलब यह है कि दार्जिलिंग चाय, कोल्हापुरी चप्पल और कांगड़ा पेंटिंग जैसे विशिष्ट भारतीय उत्पादों को यूरोप में कानूनी सुरक्षा प्रदान की जाएगी।

इससे इन उत्पादों की नकल को रोका जा सकेगा और अंतरराष्ट्रीय स्तर पर इनकी ब्रांड वैल्यू बढ़ेगी। बदले में, भारत भी शैंपेन और खास किस्म के यूरोपीय पनीर जैसे उत्पादों को अपने बाजार में वैसी ही कानूनी सुरक्षा प्रदान करेगा।

​पर्यावरण मानक और कार्बन टैक्स की चुनौती का समाधान

​इस पूरी वार्ता में 'कार्बन बॉर्डर एडजस्टमेंट मैकेनिज्म' यानी कार्बन टैक्स एक जटिल मुद्दा रहा है, क्योंकि यूरोपीय संघ के पर्यावरण मानक बहुत सख्त हैं।

भारत का हमेशा से यह तर्क रहा है कि विकासशील देशों पर ऐसे कड़े टैक्स नहीं थोपे जाने चाहिए। इस समझौते में दोनों पक्षों ने एक मध्यमार्गी रास्ता अपनाते हुए सहमति बनाई है कि पर्यावरण की सुरक्षा और व्यापारिक हितों के बीच संतुलन कायम रखा जाएगा।

इससे यह सुनिश्चित होगा कि भारतीय स्टील और एल्युमीनियम जैसे प्रमुख उद्योगों पर कार्बन टैक्स का बहुत ज्यादा नकारात्मक असर न पड़े।

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