'मैं निर्दोष हूं और आज भी राष्ट्रपति हूं': अमेरिकी कोर्ट में निकोलस मादुरो ने नार्को-टेररिज्म के आरोपों को नकारा

रूस, चीन और ईरान जैसे देशों ने इस कार्रवाई को अंतरराष्ट्रीय कानून का उल्लंघन बताते हुए मादुरो का समर्थन किया है।
नई दिल्ली : वेनेजुएला के राष्ट्रपति निकोलस मादुरो ने अमेरिका की एक अदालत में खुद पर लगे नार्को-टेररिज्म और ड्रग तस्करी के गंभीर आरोपों को पूरी तरह खारिज कर दिया है।
न्यूयॉर्क में चल रही इस ऐतिहासिक कानूनी कार्यवाही के दौरान मादुरो ने न केवल अपनी बेगुनाही का दावा किया, बल्कि अपनी संवैधानिक स्थिति को दोहराते हुए कहा कि वे अभी भी वेनेजुएला के वैध राष्ट्रपति हैं।
इस मामले ने न केवल कानूनी गलियारों में बल्कि अंतरराष्ट्रीय राजनीति में भी एक बड़ा विवाद खड़ा कर दिया है, क्योंकि पहली बार किसी मौजूदा राष्ट्राध्यक्ष पर इस तरह के आपराधिक मुकदमे का दबाव बनाया जा रहा है।
न्यूयॉर्क की अदालत में बहस
सुनवाई के दौरान अदालत का माहौल काफी गंभीर रहा। निकोलस मादुरो ने न्यायाधीश के सामने स्पष्ट किया कि उन पर लगाए गए सभी आरोप निराधार हैं।
उन्होंने अमेरिकी न्याय विभाग की दलीलों को चुनौती देते हुए कहा कि यह मामला तथ्यों पर नहीं, बल्कि राजनीतिक द्वेष पर आधारित है। मादुरो के वकीलों ने तर्क दिया कि यह पूरी प्रक्रिया अंतरराष्ट्रीय प्रोटोकॉल का उल्लंघन है।
नार्को-टेररिज्म और तस्करी के गंभीर आरोप
अमेरिकी अभियोजकों ने मादुरो पर 'कार्टेल ऑफ द संस' नामक संगठन चलाने का आरोप लगाया है। शिकायत के अनुसार, मादुरो ने कोलंबियाई विद्रोही समूह FARC के साथ मिलकर पिछले दो दशकों में सैकड़ों टन कोकीन अमेरिका भेजने की साजिश रची।
कोर्ट में पेश दस्तावेजों में दावा किया गया है कि मादुरो ने नशीले पदार्थों को एक हथियार के रूप में इस्तेमाल किया ताकि अमेरिकी समाज को अस्थिर किया जा सके।
अमेरिकी कानून की सख्त धाराएं
इस मामले में मादुरो पर नार्को-टेररिज्म षड्यंत्र, कोकीन आयात करने की साजिश और भारी हथियारों के अवैध इस्तेमाल जैसी खतरनाक धाराएं लगाई गई हैं।
अमेरिकी संघीय कानून के तहत, यदि ये आरोप सिद्ध होते हैं, तो इसमें कम से कम 20 साल और अधिकतम आजीवन कारावास की सजा का प्रावधान है।
अमेरिका ने मादुरो की गिरफ्तारी सुनिश्चित करने के लिए पहले से ही 15 मिलियन डॉलर का इनाम घोषित कर रखा है।
संप्रभुता और राजनीतिक साजिश का तर्क
मादुरो ने अदालत में अपनी दलील देते हुए कहा कि यह मुकदमा वेनेजुएला की संप्रभुता पर सीधा हमला है।
उन्होंने आरोप लगाया कि वाशिंगटन उनकी सरकार को गिराने और वेनेजुएला के प्राकृतिक संसाधनों, विशेषकर तेल पर नियंत्रण पाने के लिए इस तरह के हथकंडे अपना रहा है।
उनके अनुसार, वे एक निर्वाचित नेता हैं और उन पर किसी दूसरे देश की अदालत में मुकदमा चलाना अवैध है।
राजनयिक छूट का कानूनी पेच
इस केस का सबसे पेचीदा हिस्सा 'सॉवरेन इम्युनिटी' है। अंतरराष्ट्रीय नियमों के अनुसार, किसी देश के प्रमुख को पद पर रहते हुए आपराधिक मुकदमों से छूट मिलती है।
हालांकि, अमेरिकी सरकार का पक्ष है कि वे मादुरो को वेनेजुएला का वैध राष्ट्रपति स्वीकार नहीं करते, इसलिए उन्हें किसी भी प्रकार की राजनयिक छूट नहीं दी जा सकती। यही बिंदु इस केस को वैश्विक कानूनी बहस का केंद्र बना रहा है।
वैश्विक महाशक्तियों की प्रतिक्रिया
मादुरो के इस ट्रायल ने दुनिया को दो हिस्सों में बांट दिया है। रूस, चीन और ईरान जैसे देशों ने इस कार्रवाई को अंतरराष्ट्रीय कानून का उल्लंघन बताते हुए मादुरो का समर्थन किया है। उनका कहना है कि यह अमेरिका की 'दादागीरी' का उदाहरण है।
वहीं, अमेरिका के यूरोपीय और लैटिन अमेरिकी सहयोगी देश इस मुकदमे को भ्रष्टाचार और नार्को-स्टेट के खिलाफ एक जरूरी कदम मान रहे हैं।
वेनेजुएला में आंतरिक असंतोष और विरोध
इस खबर के बाद वेनेजुएला की राजधानी काराकस सहित कई शहरों में भारी विरोध प्रदर्शन देखे गए हैं। मादुरो के समर्थक इसे "साम्राज्यवादी साजिश" बताकर सड़कों पर उतर आए हैं।
दूसरी ओर, देश के विपक्षी दल इसे एक ऐतिहासिक अवसर मान रहे हैं और उम्मीद कर रहे हैं कि इस मुकदमे से देश में राजनीतिक परिवर्तन का रास्ता साफ होगा।
अंतरराष्ट्रीय संबंधों पर भविष्य का प्रभाव
इस मुकदमे का फैसला जो भी हो, लेकिन इसने अमेरिका और वेनेजुएला के बीच कूटनीतिक बातचीत के सारे रास्ते लगभग बंद कर दिए हैं। जानकारों का मानना है कि यदि यह ट्रायल लंबा खींचता है, तो लैटिन अमेरिका में अस्थिरता बढ़ सकती है।
यह मामला भविष्य में दुनिया भर के राष्ट्राध्यक्षों के लिए एक उदाहरण बनेगा कि क्या किसी देश की अदालत दूसरे देश के नेता को कटघरे में खड़ा कर सकती है।
