बलूचिस्तान में 40 घंटे का खूनी तांडव: BLA के 'ऑपरेशन हेरोफ' से दहली पाकिस्तानी सेना, 100 से ज्यादा जवानों की मौत ! बेबस हुए जनरल मुनीर

BLA ने 100 से अधिक सैनिकों को मारने का दावा किया है।
नई दिल्ली : पाकिस्तान का बलूचिस्तान प्रांत इस समय भीषण 'गृह युद्ध' की आग में झुलस रहा है। बलूच लिबरेशन आर्मी (BLA) ने 'ऑपरेशन हेरोफ' के जरिए पाकिस्तानी सेना पर अब तक का सबसे बड़ा और सुनियोजित हमला किया है।
40 घंटों तक चले इस खूनी संघर्ष ने न केवल पाकिस्तानी सेना को भारी शारीरिक चोट पहुंचाई है, बल्कि सेना प्रमुख जनरल असीम मुनीर के उस भरोसे को भी हिला दिया है जो वे देश की सुरक्षा को लेकर जताते रहे हैं।
बलूचों के इस आक्रामक रुख ने पाकिस्तान के भीतर और बाहर एक नई बहस छेड़ दी है कि क्या पाकिस्तानी फौज अकेले इस विद्रोह को दबा पाएगी?
40 घंटे का खूनी संघर्ष और BLA का चौंकाने वाला दावा
BLA ने 'ऑपरेशन हेरोफ' के दौरान हुई तबाही की एक विस्तृत सूची जारी की है। बलूच विद्रोहियों का दावा है कि इस 40 घंटे के संघर्ष में उन्होंने पाकिस्तानी सेना के 100 से अधिक जवानों को ढेर कर दिया है और दर्जनों को गंभीर रूप से घायल किया है।
BLA के मुताबिक, उन्होंने सेना के कई कैंपों पर कब्जा किया, गाड़ियों को आग के हवाले कर दिया और रणनीतिक रूप से महत्वपूर्ण हाईवे को घंटों तक बंद रखा। हालांकि पाकिस्तानी सेना इन आंकड़ों को काफी कम बता रही है, लेकिन मौके से आ रही तस्वीरें और वीडियो BLA के दावों को मजबूती दे रहे हैं।
जनरल मुनीर की सेना पर संकट: जनता का उठ रहा भरोसा
इस भीषण हमले के बाद पाकिस्तान के आम नागरिकों और विशेषज्ञों के बीच जनरल असीम मुनीर की सेना की क्षमता पर सवाल उठने लगे हैं।
लोगों का मानना है कि सेना केवल राजनीति और सत्ता के गलियारों में सक्रिय है, जबकि सीमा पर और बलूचिस्तान जैसे अशांत क्षेत्रों में वह विद्रोहियों के सामने बेबस नजर आ रही है।
BLA द्वारा किए गए फिदायीन हमलों और घात लगाकर किए गए वार ने यह साबित कर दिया है कि मुनीर की आर्मी अकेले इस मोर्चे को संभालने में सक्षम नहीं दिख रही है, जिससे पाकिस्तान के सुरक्षित भविष्य पर गहरा संकट मंडरा रहा है।
BLA की रणनीति: 'गोरिल्ला वॉर' और फिदायीन दस्ते
बलूच लड़ाकों ने पाकिस्तानी सेना के खिलाफ एक बेहद सोची-समझी रणनीति अपनाई है। BLA ने अपनी परंपरागत गोरिल्ला युद्ध नीति को अब हाई-टेक हमलों और 'मजीद ब्रिगेड' जैसे फिदायीन दस्तों के साथ जोड़ दिया है।
उनकी रणनीति केवल हमला करने तक सीमित नहीं है, बल्कि वे संचार माध्यमों, पुलों और रेलवे लाइनों को नष्ट कर पाकिस्तानी सेना की सप्लाई चेन को पूरी तरह काट रहे हैं। बलूचों का मुख्य उद्देश्य पाकिस्तानी फौज को उनके अपने ही कैंपों में कैद कर देना और उन्हें भारी वित्तीय व मनोवैज्ञानिक नुकसान पहुंचाना है।
कितने ताकतवर हैं बलूच लड़ाके और क्या है उनकी ताकत?
एक अनुमान के मुताबिक, BLA और उसके सहयोगी संगठनों के पास हजारों की संख्या में प्रशिक्षित लड़ाके हैं। इनमें पुरुषों के साथ-साथ शिक्षित युवा और महिलाएं भी शामिल हैं, जो 'आजाद बलूचिस्तान' के लिए जान देने को तैयार हैं।
उनकी सबसे बड़ी ताकत स्थानीय लोगों का समर्थन और बलूचिस्तान का दुर्गम इलाका है, जिससे वे परिचित हैं। वे अब केवल छोटे हथियारों तक सीमित नहीं हैं, बल्कि उनके पास आधुनिक राइफलें और विस्फोटक भी मौजूद हैं। बलूचों का यह बढ़ता संगठन पाकिस्तान के लिए अस्तित्व का संकट बनता जा रहा है।
