बांग्लादेश में हिंदुओं पर बर्बरता: दवा विक्रेता को जिंदा जलाने की कोशिश, 15 दिन में चौथी हिंसक वारदात

Hindu community attack Bangladesh
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शरियतपुर में हिंदू दवा विक्रेता को घेरकर पीटा गया, जलाने की कोशिश। 15 दिनों में चौथा हमला।

बांग्लादेश में हिंदू अल्पसंख्यकों पर हमले जारी हैं। शरियतपुर में दवा विक्रेता को पेट्रोल डालकर जलाने की कोशिश, 15 दिन में चौथी हिंसक घटना पर भारत की कड़ी प्रतिक्रिया।

बांग्लादेश में हिंदुओं पर लगातार हमले जारी हैं। नव वर्ष की पूर्व संध्या पर शरियतपुर जिले से सामने आई घटना ने एक बार फिर अल्पसंख्यकों की सुरक्षा को लेकर गंभीर चिंता पैदा कर दी है। स्थानीय हालात बताते हैं कि भय और असुरक्षा का माहौल लगातार गहराता जा रहा है।

शरियतपुर के तिलोई क्षेत्र में 50 वर्षीय हिंदू दवा विक्रेता खोकन चंद्रा दास पर कट्टरपंथी भीड़ ने उस समय हमला किया, जब वह दुकान बंद कर घर लौट रहे थे। हमलावरों ने उन्हें घेरकर धारदार हथियारों से वार किए, बेरहमी से पीटा और पेट्रोल डालकर जिंदा जलाने की कोशिश की।

जान बचाने के लिए खोकन पास के एक तालाब में कूद गए, जिससे वह जिंदा बच तो गए, लेकिन गंभीर रूप से झुलस गए। स्थानीय लोगों ने किसी तरह उन्हें बाहर निकाला और शरियतपुर सदर अस्पताल पहुंचाया, जहां उनकी हालत नाजुक बनी हुई है। हमले के पीछे की मंशा और आरोपियों की पहचान अब तक सामने नहीं आ सकी है।

दो हफ्तों में चौथी बड़ी घटना

यह घटना कोई अलग-थलग मामला नहीं है। बीते दो सप्ताह में हिंदू समुदाय पर यह चौथा बड़ा हमला बताया जा रहा है। इससे एक दिन पहले मयमनसिंह में सुल्ताना स्वेटर्स फैक्ट्री में सुरक्षा ड्यूटी पर तैनात अंसार सदस्य बजेंद्र बिस्वास की उनके ही साथी नोमान मिया ने गोली मारकर हत्या कर दी। प्रत्यक्षदर्शियों के अनुसार, यह सब एक तथाकथित मजाक से शुरू हुआ, जिसने देखते ही देखते जानलेवा रूप ले लिया।

झूठे आरोप और भीड़ की हिंसा

इससे पहले अमृत मंडल को जबरन वसूली के आरोप में भीड़ ने पीट-पीटकर मार डाला। 18 दिसंबर को दीपू चंद्र दास की ईशनिंदा के झूठे आरोप में हत्या कर शव जला देने की घटना ने भी देश को झकझोर दिया था। इन घटनाओं ने साफ कर दिया है कि भीड़ की हिंसा और अफवाहें अल्पसंख्यकों के लिए जानलेवा साबित हो रही हैं।

भारत की कड़ी प्रतिक्रिया

इन घटनाओं पर भारत ने कड़ी प्रतिक्रिया दी है। भारत ने बांग्लादेश में अल्पसंख्यकों के खिलाफ “लगातार दुश्मनी” पर गहरी चिंता जताते हुए दोषियों को सख्त सजा देने की मांग की है। बढ़ती हिंसा के बीच अब अंतरराष्ट्रीय स्तर पर भी यह सवाल उठने लगा है कि क्या बांग्लादेश में अल्पसंख्यकों को सुरक्षित जीवन मिल पा रहा है।

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