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खुलासा! मरने के बाद क्या होता है, आत्मा ऐसे तय करती है धरती से यमलोक तक का सफ़र

जीते जी क्या होता है? यह तो हम सभी जानते है लेकिन हमें यह नहीं पता होता कि मरने के बाद क्या होता है? मरने के बाद जो भी होता है वह हमारी कल्पना से बिलकुल परे होता है।

खुलासा! मरने के बाद क्या होता है, आत्मा ऐसे तय करती है धरती से यमलोक तक का सफ़र
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जीते जी क्या होता है? यह तो हम सभी जानते है लेकिन हमें यह नहीं पता होता कि मरने के बाद क्या होता है? मरने के बाद जो भी होता है वह हमारी कल्पना से बिलकुल परे होता है।
मरने के बाद होने वाली चीजों को जानकर आप भी बहुत हैरान हो रहे जाएंगे। जब कोई मरता है तो सबसे पहले उसके शरीर से आत्मा निकल जाती है लेकिन उसका शरीर कहीं पर नहीं जाता।
ऐसा इसलिए होता है क्योंकि मनुष्य का शरीर सिर्फ एक गाड़ी होता है जो कि जिंदगी भर आत्मा को लेकर घुमता है और जब गाड़ी खराब हो जाती है। यानि जब शरीर पुराना या खराब हो जाता है तो आत्मा शरीर से बाहर निकल जाती है। जिसके बाद आत्मा का आपना एक सफर शुरू होता है। यमदूत पृथ्वी पर आकर आत्मा को अपने साथ यमलोक ले जाते है।
आत्मा का सफर यमलोक तक-
    • मरने के 13 दिन तक आत्मा घर से बाहर नहीं जाती वह घर में ही रहती है और आत्मा कभी नहीं मरती है।
    • जब 13 दिन बाद घरवालें श्राद्ध कर देते है। तब आत्मा को लेने के लिए यमदूत आते है और वह आत्मा को खिचंते हुए ले जाते है।
    • आत्मा को यमलोक पहुंचने में पूरा 1 साल लगता है और इस एक साल में आत्मा को 16 जगह रूककर यमलोक तक जाना होता है।
    • अगर कोई आत्मा जीते जी किसी शरीर में रहकर भगवान की पूजा करती है तो उसे लेने के लिए भगवान किसी गाड़ी को भेज देते हैं।
    • यमलोक पुहचंते समय 16 जगह में से हर एक जगह पर आपके कर्म के हिसाब से आपको खाना पिना चप्पल दी जाती है। हर एक महिने में एक बार खाना दिया जाता है।
    • हर एक महिने में अलग अलग तरह की सजा दी जाती है। किसी महिने आग के गोले पर चलना होता है, तो किसी महिने कोड़े से पिटाई, किसी महिने भयानक चीजों से डराया जाता है।
    • ऐसे ही यह यात्रा 11 महिने तक चलती है जिसके बाद आत्मा यमलोक पहुंचती है।
    • 11 महिने बाद जब आत्मा एक साल बाद यमलोक पहुंच जाती है तो वहां आत्मा के पाप पुण्य का हिसाब किया जाता है।
    • अंत में पृथ्वी पर रहकर हमने जो कर्म किए होते है। उसके हिसाब से ही आत्मा को नर्क या स्वर्ग में भेजा जाता है। जिसके बाद आत्मा का सफर पूरा होता है।

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