Video: क्या I-PAC मामले में ममता बनर्जी की मुश्किलें बढ़ सकती हैं? | एक क्लिक में समझें पूरी सियासी लड़ाई
पश्चिम बंगाल में 2026 के विधानसभा चुनाव से पहले सियासी तापमान तेजी से बढ़ता नजर आ रहा है। एक ओर मुख्यमंत्री ममता बनर्जी चौथी बार सत्ता में वापसी की रणनीति पर काम कर रही हैं, तो दूसरी ओर भारतीय जनता पार्टी (bjp) उन्हें कड़ी चुनौती देने के लिए आक्रामक रुख अपनाए हुए है।
इसी राजनीतिक खींचतान के बीच चुनावी रणनीतिकार कंपनी I-PAC और टीएमसी से जुड़े नेता प्रतीक जैन के ठिकानों पर (ईडी) की छापेमारी ने विवाद को और गहरा कर दिया है।
छापेमारी पर ममता का पलटवार
ईडी की कार्रवाई पर ममता बनर्जी ने तीखी प्रतिक्रिया दी और इसे “रणनीति चुराने की साजिश” करार दिया। उनका आरोप है कि भाजपा राजनीतिक तौर पर मुकाबला करने में असफल होने के बाद केंद्रीय एजेंसियों का सहारा ले रही है।
ममता बनर्जी खुद छापेमारी स्थल पर पहुंचीं और दावा किया कि वहां मौजूद चुनावी रणनीति से जुड़ी फाइलें सुरक्षित रखने के लिए वे उन्हें अपने साथ ले आईं। इसे लेकर सत्तारूढ़ऑल इंडिया तृणमूल (TMC) और भाजपा के बीच बयानबाजी तेज हो गई।
कोर्ट में क्या हुआ?
मामला जब कलकत्ता हाई कोर्ट पहुंचा तो टीएमसी ने याचिका दायर कर मांग की कि ईडी को कथित रणनीतिक दस्तावेज सार्वजनिक करने से रोका जाए। ईडी ने अदालत में दलील दी कि उन्होंने कोई दस्तावेज जब्त नहीं किया, बल्कि मुख्यमंत्री ने स्वयं हस्तक्षेप करते हुए फाइलें उठाईं। कोर्ट ने ईडी के पक्ष और सुप्रीम कोर्ट में लंबित एक अन्य मामले का हवाला देते हुए टीएमसी की याचिका खारिज कर दी।
फैसले के राजनीतिक मायने
हाई कोर्ट का यह फैसला तकनीकी तौर पर ईडी के पक्ष में माना जा रहा है। भाजपा इसे मुख्यमंत्री की “अराजक राजनीति” बता रही है, जबकि टीएमसी का कहना है कि यह केंद्र की कथित तानाशाही के खिलाफ उनकी लड़ाई का हिस्सा है। कानूनी स्तर पर राहत न मिलना टीएमसी के लिए चुनाव से पहले एक झटका जरूर माना जा रहा है।
‘चर्चा’ में हुआ बड़ा मंथन
इस पूरे प्रकरण पर हरिभूमि और INH के प्रधान संपादक डॉ. हिमांशु द्विवेदी ने विशेष कार्यक्रम “चर्चा” आयोजित की। इस खास पेशकश में शामिल हुए-
- सोफिया खान (नेता TMC)
- संजीव कौशिक (राजनीतिक विश्लेषक)
- कुशल पांडेय (प्रवक्ता भाजपा)
- डॉ प्रदीप शर्मा (वरिष्ठ अधिवक्ता सुप्रीम कोर्ट)
चर्चा में आज का बड़ा सवाल रहा-
क्या I-PAC मामले में ममता बनर्जी की मुश्किलें बढ़ सकती हैं?
प्रवक्ताओं ने अपने-अपने तर्क रखे और कानूनी व राजनीतिक पहलुओं पर विस्तार से चर्चा की।
आगे क्या?
बंगाल चुनाव से पहले यह “फाइल कांड” सियासी बहस का बड़ा मुद्दा बन चुका है। अब सबकी नजर सुप्रीम कोर्ट पर टिकी है।
यहां क्लिक करें और जानें, इस मामले का बंगाल की राजनीति पर कितना गहरा असर पड़ सकता है।
