Video- वेनेजुएला पर US का हमला: तानाशाही का अंत या अंतरराष्ट्रीय कानून की हत्या? जानिए सच

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डोनाल्ड ट्रंप के नेतृत्व में अमेरिका ने वेनेजुएला पर सैन्य हमला किया। राष्ट्रपति मादुरो की गिरफ्तारी, तेल भंडार पर कब्जा और अंतरराष्ट्रीय कानून पर उठे सवाल- वीडियो में जानिए पूरा सच।

कल तक खुद को दुनिया में शांति का सबसे बड़ा दूत बताने वाले और नोबेल शांति पुरस्कार की खुली चाहत रखने वाले डोनाल्ड ट्रंप ने 2026 की शुरुआत में ऐसा कदम उठाया, जिसने वैश्विक राजनीति को झकझोर दिया है।

अमेरिका और वेनेजुएला के बीच लंबे समय से चले आ रहे विवाद को कूटनीति से सुलझाने के बजाय, ट्रंप प्रशासन ने सैन्य कार्रवाई का रास्ता चुना। आरोप है कि इस हमले में न सिर्फ एक संप्रभु देश की सीमाओं का उल्लंघन हुआ, बल्कि वेनेजुएला के राष्ट्रपति निकोलस मादुरो (Nicolás Maduro) और उनकी पत्नी को हिरासत में लेकर अमेरिका ले जाया गया।

नोबेल की चाहत से युद्ध की हकीकत तक

अपने कार्यकाल में ट्रंप बार-बार यह दावा करते रहे कि उन्होंने दुनिया में कई युद्ध रुकवाए हैं। यहां तक कि वे ऐसे पहले अमेरिकी राष्ट्रपति बने जिन्होंने सार्वजनिक रूप से खुद के लिए नोबेल शांति पुरस्कार की मांग की।

लेकिन 2026 की इस कार्रवाई ने उनके तमाम दावों पर सवाल खड़े कर दिए हैं। जो नेता युद्ध रोकने की बात करते थे, वही अब एक देश पर सैन्य हमला करते नजर आए, यही विरोधाभास आज दुनिया को सबसे ज्यादा परेशान कर रहा है।

अंतरराष्ट्रीय मंच पर संप्रभुता का चीरहरण

यह हमला केवल सैन्य कार्रवाई नहीं, बल्कि अंतरराष्ट्रीय कानून की आत्मा पर चोट है। किसी संप्रभु राष्ट्र में घुसकर वहां के निर्वाचित राष्ट्रपति को बंदी बनाना वैश्विक व्यवस्था के लिए खतरनाक संकेत माना जा रहा है।

ट्रंप इसे “तानाशाही का अंत” बता रहे हैं, लेकिन अंतरराष्ट्रीय राजनीति के जानकार इसे अमेरिका की नई विस्तारवादी नीति के रूप में देख रहे हैं।

तेल के भंडार पर सीधी नजर

इस पूरे घटनाक्रम का सबसे विवादास्पद पहलू वेनेजुएला के प्राकृतिक संसाधन हैं। दुनिया के सबसे बड़े तेल भंडारों में शामिल वेनेजुएला लंबे समय से अमेरिका की रणनीतिक रुचि का केंद्र रहा है।

ट्रंप ने यह घोषणा कर दी है कि अब अमेरिकी कंपनियां वहां के तेल कुओं पर नियंत्रण करेंगी। इतना ही नहीं, युद्ध के खर्च की भरपाई वेनेजुएला के खनिज संसाधनों को बेचकर करने की बात ने इस कार्रवाई को “आर्थिक लूट” के आरोपों के घेरे में ला दिया है।

कठपुतली सरकार और आगे का खतरा

अमेरिका द्वारा वेनेजुएला की चुनी हुई सरकार को भंग कर उपराष्ट्रपति को नया राष्ट्रपति घोषित करना इस बात का संकेत माना जा रहा है कि वॉशिंगटन अब वहां की सत्ता सीधे नियंत्रित करना चाहता है।

लोकतंत्र की रक्षा के नाम पर उठाया गया यह कदम पूरे दक्षिण अमेरिका में अस्थिरता पैदा कर सकता है। अब निगाहें इस पर टिकी हैं कि क्या संयुक्त राष्ट्र इसमें हस्तक्षेप करेगा या यह घटना एक नई वैश्विक व्यवस्था की शुरुआत बनेगी।

सबसे बड़ा सवाल

इस हमले के बाद कई सवाल उठ रहे हैं, लेकिन सबसे अहम यही है-

वेनेजुएला पर US का हमला: तानाशाही का अंत या अंतरराष्ट्रीय कानून की हत्या?

विशेष चर्चा

हरिभूमि और INH के प्रधान संपादक डॉ. हिमांशु द्विवेदी ने इस पूरे घटनाक्रम पर एक विशेष चर्चा की, जिसमें वैश्विक राजनीति पर इसके असर को समझने की कोशिश की गई।

इस चर्चा में शामिल रहे:

  • मंजीव पुरी (पूर्व राजनयिक)
  • ( ले.ज ) रि. राज कादयान (रक्षा विशेषज्ञ)

यहां देखें पूरी चर्चा का वीडियो

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