चर्चा में: सोमनाथ पर अभिमान, नेहरू पर घमासान- PM मोदी के ब्लॉग से इतिहास पर सियासी जंग; देखें वीडियो
प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी के सोमनाथ मंदिर पर लिखे हालिया ब्लॉग ने भारतीय राजनीति में एक नया विवाद खड़ा कर दिया है। इस लेख में सोमनाथ के इतिहास, पुनरुत्थान और भारतीय सभ्यता की दृढ़ता का जिक्र करते हुए मोदी ने पूर्व प्रधानमंत्री जवाहरलाल नेहरू की उस आपत्ति को फिर से उजागर किया, जिसमें नेहरू ने मंदिर पुनर्निर्माण और उद्घाटन में सरकारी भागीदारी का विरोध किया था। इससे भाजपा और कांग्रेस के बीच पुराने वैचारिक मतभेद फिर से गरमा गए हैं, जिसमें धर्मनिरपेक्षता, इतिहास दर्शन और सांस्कृतिक स्वाभिमान जैसे मुद्दे प्रमुखता से उठ रहे हैं।
सोमनाथ मंदिर भारत के बारह ज्योतिर्लिंगों में प्रथम माना जाता है और आध्यात्मिक आस्था का प्रमुख प्रतीक है। इतिहास बताता है कि 1026 में अफगान आक्रांता महमूद गजनवी ने मंदिर पर हमला कर उसे लूटा और ज्योतिर्लिंग को खंडित किया। इसके बावजूद सोमनाथ का इतिहास विनाश और पुनर्निर्माण की अनुपम गाथा रहा, जितनी बार इसे तोड़ा गया, उतनी ही भव्यता से इसे फिर खड़ा किया गया।
स्वतंत्रता के बाद सोमनाथ के पुनरुद्धार की पहल तत्कालीन गृह मंत्री सरदार वल्लभभाई पटेल ने की, लेकिन वे इसे पूरा देखने से पहले दिवंगत हो गए। मंदिर के उद्घाटन (1951) के लिए तत्कालीन राष्ट्रपति डॉ. राजेंद्र प्रसाद को आमंत्रित किया गया।
इसी पर विवाद हुआ- नेहरू ने प्रसाद को सलाह दी कि राष्ट्रपति के रूप में धार्मिक आयोजन में शामिल होना भारत की धर्मनिरपेक्ष छवि को प्रभावित कर सकता है। प्रसाद ने इस सलाह को अस्वीकार कर दिया और निजी हैसियत से कार्यक्रम में भाग लिया, जहां उन्होंने अपनी आस्था और जड़ों से जुड़ाव का अधिकार जताया।
पीएम मोदी ने अपने ब्लॉग में नेहरू के इसी रुख का उल्लेख करते हुए सोमनाथ को भारतीय सभ्यता की अदम्य भावना का प्रतीक बताया। भाजपा नेता सुधांशु त्रिवेदी ने इसे आगे बढ़ाते हुए कांग्रेस पर हमला बोला।
उन्होंने नेहरू की पुस्तक 'डिस्कवरी ऑफ इंडिया' का हवाला देते हुए आरोप लगाया कि नेहरू ने गजनवी जैसे आक्रांताओं का महिमामंडन किया और उन्हें केवल लुटेरा बताकर उनके धार्मिक उद्देश्य को छिपाया। त्रिवेदी के अनुसार, यह इतिहास की विकृति का उदाहरण है, जो कांग्रेस की नीतियों में दिखता है।
यह बहस न केवल इतिहास के पन्नों को खंगाल रही है, बल्कि वर्तमान राजनीति में भी धर्म, संस्कृति और धर्मनिरपेक्षता के सवालों को नई धार दे रही है।
सवाल उठ रहे हैं कि,
- क्या 1000 साल पहले हमारी आस्था के केंद्र को कुचला जाना हमारे लिए गौरव का विषय है या शर्म का?
- क्या हमें अतीत की इन गलतियों से सीखने की जरूरत है?
- क्या पंडित नेहरू की केवल नीति गलत थी या उनकी नियत पर भी सवाल उठाया जाना चाहिए?
इसी पृष्ठभूमि में हरिभूमि व INH के प्रधान संपादक डॉ. हिमांशु द्विवेदी ने विशेष ‘चर्चा’ की।
मुख्य विषय रहा-
"सोमनाथ पर अभिमान और नेहरू पर घमासान"
इस खास पेशकश में शामिल हुए-
- डॉ. वीरेंद्र सिंह चौहान ( भाजपा प्रवक्ता )
- पीयूष बबेले ( वरिष्ठ नेता कांग्रेस )
- रमेश शर्मा ( वरिष्ठ पत्रकार
- डॉ. राम पुनियानी (लेखक एवं इतिहासकार )
किसने क्या कहा- देखिए पूरी बहस का वीडियो
