संगम पर 'शंकराचार्य' विवाद: अविमुक्तेश्वरानंद मुद्दे पर बंटा संत समाज, आखिर कब ख़त्म होगा ये टकराव? Video
प्रयागराज की पावन धरती पर मौनी अमावस्या के दिन जो हुआ, उसने देशभर में बहस छेड़ दी। ज्योतिष पीठ के शंकराचार्य स्वामी अविमुक्तेश्वरानंद और माघ मेला प्रशासन के बीच पालकी से संगम स्नान को लेकर हुआ टकराव अब केवल एक घटना नहीं, बल्कि धर्म, परंपरा, कानून और राजनीति के बीच की जटिल लड़ाई बन चुका है।
क्या है पूरा विवाद?
- मौनी अमावस्या पर पालकी के साथ संगम स्नान को लेकर प्रशासन और शंकराचार्य के बीच टकराव
- प्रशासन न्यायिक आदेश और कानून का हवाला दे रहा है
- समर्थक इसे धार्मिक परंपराओं का अपमान बता रहे हैं
बड़ा सवाल: क्या संत समाज बंट रहा है?
इस पूरे घटनाक्रम ने संत समाज को भी दो हिस्सों में बांट दिया है।
समर्थकों की दलीलें
जब अन्य पीठों के शंकराचार्य उन्हें ‘शंकराचार्य’ संबोधित करते हैं, तो सरकार को आपत्ति क्यों?
यह मामला केवल प्रोटोकॉल नहीं, बल्कि सनातन परंपरा से जुड़ा है। आलोचकों का मानना है कि स्वामी अविमुक्तेश्वरानंद की तेज और मुखर राजनीतिक टिप्पणियों के लिए जाने जाते हैं। शायद यही सरकार और उनके बीच टकराव की असली वजह है।
योगी राज में यह विवाद क्यों?
यह पूरा मामला ऐसे प्रदेश में सामने आया है, जहां खुद एक संत यानि योगी आदित्यनाथ मुख्यमंत्री हैं।
ऐसे में सवाल उठता है-
क्या यह सिर्फ धार्मिक मर्यादा का सवाल है? या इसके पीछे सियासत की गहरी परतें छिपी हैं?
आम सनातनी की चिंता
भारत दुनिया का इकलौता देश है जहां हिंदू आस्था और संत परंपरा की जड़ें बेहद गहरी हैं। अगर ‘शंकराचार्य’ जैसे सर्वोच्च पद कोर्ट-कचहरी और प्रशासनिक विवादों में उलझे रहेंगे, तो आम सनातनी आखिर किससे उम्मीद करेगा?
“चर्चा” में हुआ गहन विश्लेषण
इन तमाम सवालों पर हरिभूमि और IHN के प्रधान संपादक डॉ. हिमांशु द्विवेदी ने कार्यक्रम “चर्चा” में विस्तार से मंथन किया।
इस खास चर्चा में शामिल रहे
- जगदीश सिंह– प्रवक्ता, सपा
- महंत रामदूत दास– हिंदू धर्म गुरु
- स्वामी नारायणाचार्य शांडिल्य– पीठाधीश्वर, श्रृंगवेरपुर
- आशीष तिवारी– प्रवक्ता, बीजेपी
सभी पक्षों ने न सिर्फ अपनी राय रखी, बल्कि कई अहम और चौंकाने वाले खुलासे भी किए।
यहां देखें “चर्चा” का पूरा वीडियो
