Video: मुंबई का बॉस कौन? | क्या उद्धव–राज बंधू ‘ठाकरे ब्रांड’ का किला बचा पाएंगे? | निकाय चुनाव पर बड़ा खुलासा
महाराष्ट्र की सियासत एक बार फिर निर्णायक मोड़ पर खड़ी है। 15 और 16 तारीख को मुंबई समेत राज्य के 29 नगर निगमों और नगर पालिकाओं के लिए मतदान और मतगणना की प्रक्रिया शुरू होने जा रही है। स्थानीय निकाय चुनाव भले ही नाम से “स्थानीय” हों, लेकिन महाराष्ट्र में इनका महत्व किसी विधानसभा चुनाव से कम नहीं माना जाता।
मुंबई: जहां सत्ता का मतलब है ‘असली बॉस’
मुंबई नगर निगम को दुनिया के सबसे अमीर नगर निकायों में गिना जाता है। इसका सालाना बजट करीब 78,000 करोड़ रुपये है, जो देश के कई छोटे राज्यों के कुल बजट से भी ज्यादा है। यही वजह है कि मुंबई की सत्ता पर काबिज़ होने वाला ही राजनीति में ‘मुंबई का बॉस’ कहलाता है।
इतिहास गवाह है कि भले ही मुख्यमंत्री कोई भी रहा हो, लेकिन मुंबई की राजनीति पर लंबे समय तक ठाकरे ब्रांड का दबदबा बना रहा। बालासाहेब ठाकरे ने इसी नगर निगम की ताकत के दम पर शिवसेना को एक अजेय राजनीतिक शक्ति बनाया था। अब एक बार फिर सवाल उठ रहा है- क्या यह विरासत बच पाएगी?
अस्तित्व की लड़ाई: 20 साल बाद साथ आए ठाकरे बंधु
इस चुनाव की सबसे बड़ी और चौंकाने वाली बात है- करीब दो दशक बाद उद्धव ठाकरे और राज ठाकरे का एक मंच पर आना।
उद्धव ठाकरे और राज ठाकरे का साथ आना सिर्फ सत्ता की गणित नहीं, बल्कि ठाकरे परिवार के राजनीतिक अस्तित्व की लड़ाई माना जा रहा है।
दूसरी ओर, एकनाथ शिंदे की शिवसेना और भारतीय जनता पार्टी (bjp) पूरी ताकत के साथ मैदान में हैं। कांग्रेस और अजित पवार गुट भी अपनी-अपनी जमीन तलाश रहे हैं, लेकिन मुख्य मुकाबला साफ तौर पर ठाकरे बनाम बीजेपी–शिंदे गठबंधन के बीच सिमटता दिख रहा है।
तीन साल की देरी और बदला हुआ सियासी माहौल
ये चुनाव असल में 2022 में होने थे, लेकिन कानूनी पेचीदगियों के चलते इन्हें करीब तीन साल टाल दिया गया। इस दौरान महाराष्ट्र की राजनीति पूरी तरह बदल चुकी है। सत्ता से हाशिए पर पहुंचे ठाकरे परिवार के लिए यह चुनाव “करो या मरो” जैसा है।
‘चर्चा’ में हुआ बड़ा मंथन
इन सभी सवालों के जवाब तलाशने के लिए हरिभूमि और INH के प्रधान संपादक डॉ. हिमांशु द्विवेदी ने एक विशेष “चर्चा” की ।
इस चर्चा में शामिल रहे-
- बृजमोहन श्रीवास्तव (प्रवक्ता NCP ( अजित गुट )
- शरद नायक ( राजनीतिक विश्लेषक
- घनश्याम दुबे ( प्रवक्ता शिवसेना UBT
- अवधूत बाघ ( प्रवक्ता भाजपा )
बड़ा सवाल-
आखिर मुंबई का बॉस कौन होगा?
क्या ठाकरे बंधु मिलकर ‘ठाकरे ब्रांड’ को फिर से मजबूती दे पाएंगे या शिंदे–बीजेपी की रणनीति इस किले को ढहा देगी?
प्रवक्ताओं ने अपने-अपने तर्क रखे, रणनीतियों पर बात की और कई बड़े खुलासे किए।
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