उत्तराखंड में जनगणना 2027 के पहले चरण के तहत 'स्वगणना' आज से शुरू हो रही है। पोर्टल 24 अप्रैल तक खुला रहेगा, जहां लोग मोबाइल से अपनी जानकारी खुद भर सकेंगे।

उत्तराखंड में जनगणना 2027 की प्रक्रिया शुक्रवार से आधिकारिक तौर पर शुरू हो गई है। इस बार की जनगणना में तकनीक का व्यापक इस्तेमाल किया जा रहा है। राज्यपाल लेफ्टिनेंट जनरल गुरमीत सिंह (सेनि) ने शुक्रवार सुबह 10 बजे देहरादून के लोकभवन में इस प्रक्रिया का औपचारिक शुभारंभ किया। वहीं, मुख्यमंत्री पुष्कर सिंह धामी शुक्रवार शाम को अपने आवास पर डिजिटल माध्यम से अपनी स्वगणना करेंगे।

पहले चरण में मकानों के सूचीकरण और गणना का कार्य किया जा रहा है, जिसमें जनता को पहली बार खुद की जानकारी ऑनलाइन दर्ज करने यानी 'स्वगणना' की सुविधा दी गई है।

​पोर्टल 24 अप्रैल तक खुला, देने होंगे 33 जवाब
आम नागरिकों के लिए विभाग की आधिकारिक वेबसाइट se.census.gov.in गुरुवार रात 12 बजे से खोल दी गई है। भवन स्वामी अपने मोबाइल, लैपटॉप या टैबलेट के जरिए इस पोर्टल पर लॉगिन कर सकते हैं।

स्वगणना की यह खिड़की 24 अप्रैल की रात 12 बजे तक खुली रहेगी। पोर्टल पर कुल 33 प्रश्न पूछे गए हैं, जिनके उत्तर विकल्पों के माध्यम से देने होंगे। यह प्रक्रिया पूरी तरह पेपरलेस और डिजिटल है। स्वगणना की समय सीमा समाप्त होने के बाद, 25 अप्रैल से जनगणना प्रगणक घर-घर जाकर मकानों का भौतिक सत्यापन और सूचीकरण करेंगे।

​नाम, भाषा और जिओ टैगिंग में बरतें सावधानी
जनगणना निदेशालय ने नागरिकों के लिए विशेष दिशा-निर्देश जारी किए हैं। फॉर्म भरते समय परिवार के मुखिया का नाम और भाषा के चयन में विशेष सावधानी बरतने की सलाह दी गई है। इस बार की जनगणना में जिओ टैगिंग का महत्वपूर्ण रोल है, जिससे भवनों की सटीक लोकेशन चिह्नित की जाएगी। इसलिए भवन स्वामियों को निर्देश दिया गया है कि वे स्वगणना का कार्य अपने घर पर ही रहकर करें।

एक बार फॉर्म सबमिट करने के बाद उसमें किसी भी प्रकार का संशोधन या बदलाव संभव नहीं होगा, इसलिए सबमिट करने से पहले विवरणों की अच्छी तरह जांच कर लें।

​एक भवन, एक मोबाइल नंबर का नियम
प्रशासन ने डेटा की पारदर्शिता और सुरक्षा बनाए रखने के लिए सख्त नियम बनाए हैं। एक भवन की गणना के लिए केवल एक ही मोबाइल नंबर का उपयोग किया जा सकेगा। इसका उद्देश्य डेटा के दोहराव को रोकना है।

स्वगणना का यह कार्य पूरी तरह स्वैच्छिक है, लेकिन डिजिटल इंडिया के इस दौर में इसे नागरिक भागीदारी की एक बड़ी मिसाल के रूप में देखा जा रहा है। पोर्टल पर स्वगणना करने के बाद नागरिकों को एक रेफरेंस नंबर मिलेगा, जिसे उन्हें प्रगणकों के आने पर दिखाना होगा, जिससे उनका समय और मेहनत दोनों बचेंगे।