उत्तर प्रदेश में 'राजशाही' के प्रतीक का अंत: अब 'जन भवन' कहलाएगा राजभवन, राज्यपाल आवास का नाम बदला

नाम परिवर्तन के पीछे मुख्य तर्क यह दिया जा रहा है कि 'राज' शब्द सामंती मानसिकता का प्रतीक है।
लखनऊ : उत्तर प्रदेश की राजधानी लखनऊ में स्थित ऐतिहासिक राजभवन अब एक नई पहचान के साथ जाना जाएगा। प्रदेश सरकार ने एक बड़ा और ऐतिहासिक निर्णय लेते हुए राज्यपाल के आधिकारिक आवास 'राजभवन' का नाम बदलकर अब 'जन भवन' कर दिया है।

यह कदम औपनिवेशिक काल की परंपराओं को पीछे छोड़ने और लोकतांत्रिक मूल्यों को प्राथमिकता देने के उद्देश्य से उठाया गया है।
अब फाइलों से लेकर मुख्य द्वार तक, यह परिसर 'राजभवन' के बजाय 'जन भवन' के नाम से अपनी उपस्थिति दर्ज कराएगा।
जनता को समर्पित करने का संदेश
नाम परिवर्तन के पीछे मुख्य तर्क यह दिया जा रहा है कि 'राज' शब्द सामंती और औपनिवेशिक मानसिकता का प्रतीक है, जबकि भारत एक लोकतंत्र है।
सरकार का मानना है कि इस परिसर का नाम 'जन भवन' रखने से यह संदेश जाएगा कि यह सर्वोच्च संवैधानिक पद जनता के लिए है और उनके प्रति जवाबदेह है।
यह बदलाव आम नागरिक और संवैधानिक संस्थाओं के बीच की दूरी को कम करने के एक बड़े प्रयास के रूप में देखा जा रहा है।
मुख्यमंत्री और राज्यपाल की सहमति
इस निर्णय को लेकर काफी समय से चर्चा चल रही थी। शासन के उच्च पदस्थ सूत्रों के अनुसार, मुख्यमंत्री योगी आदित्यनाथ और वर्तमान राज्यपाल के बीच विचार-विमर्श के बाद इस पर अंतिम मुहर लगाई गई।
उत्तर प्रदेश देश का पहला ऐसा राज्य बन गया है जिसने राज्यपाल के आधिकारिक निवास के नाम में इस तरह का क्रांतिकारी बदलाव किया है। सरकारी आदेश जारी होने के साथ ही नाम पट्टिकाओं को बदलने की प्रक्रिया भी शुरू कर दी गई है।
औपनिवेशिक विरासतों से मुक्ति का अभियान
यह बदलाव केंद्र और राज्य सरकार के उस व्यापक अभियान का हिस्सा है, जिसके तहत गुलामी के प्रतीकों या औपनिवेशिक काल के नामों को बदला जा रहा है।
जिस तरह दिल्ली में 'राजपथ' का नाम बदलकर 'कर्तव्य पथ' किया गया, उसी तर्ज पर उत्तर प्रदेश सरकार ने भी इस संवैधानिक भवन को नया नाम दिया है। सरकार का तर्क है कि 'जन भवन' नाम रखने से लोगों में यह गौरव महसूस होगा कि यह स्थान जनता का है।
ऐतिहासिक भवन की नई पहचान
लखनऊ का यह भवन अपनी भव्यता और ऐतिहासिक वास्तुकला के लिए दुनिया भर में मशहूर है। अब इसके इतिहास के साथ एक नया अध्याय जुड़ गया है।
अधिकारियों के अनुसार, नाम बदलने के साथ-साथ इस भवन को जनता के लिए और अधिक सुलभ बनाने की योजना पर भी काम किया जा सकता है, ताकि लोग इसकी ऐतिहासिक विरासत को करीब से देख सकें और संवैधानिक प्रक्रियाओं को समझ सकें।
राजनीतिक और सामाजिक हलकों में चर्चा
सरकार के इस फैसले पर मिली-जुली प्रतिक्रियाएं देखने को मिल रही हैं। सत्ता पक्ष इसे भारतीय लोकतंत्र की जीत और जनता के प्रति सम्मान बता रहा है, वहीं विपक्षी दल इसे केवल प्रतीकात्मक बदलाव करार दे रहे हैं।
हालांकि, आम जनता के बीच इस नए नाम 'जन भवन' को लेकर काफी कौतूहल है और इसे एक सकारात्मक बदलाव के रूप में देखा जा रहा है जो शासन और जनता के बीच के संबंधों को नया अर्थ देगा।
