यूपी के शिक्षकों के लिए बड़ा फैसला: अब छुट्टी के दिन 'जबरन ड्यूटी' पर नहीं बुला पाएंगे अधिकारी, सरकार जारी करेगी सख्त गाइडलाइन

सरकार के इस रुख का प्रदेश के लाखों शिक्षकों ने स्वागत किया है।
लखनऊ: उत्तर प्रदेश की योगी सरकार ने राज्य के बेसिक और माध्यमिक शिक्षा विभाग के शिक्षकों के लिए एक ऐतिहासिक निर्णय लिया है।
अब किसी भी शिक्षक को उनके साप्ताहिक अवकाश या राजपत्रित अवकाश के दिन स्कूल आने या किसी विभागीय कार्य के लिए जबरन मजबूर नहीं किया जा सकेगा।
शासन स्तर पर इस संबंध में सहमति बन गई है और जल्द ही बेसिक शिक्षा निदेशालय द्वारा सभी जिला बेसिक शिक्षा अधिकारियों और खंड शिक्षा अधिकारियों को स्पष्ट निर्देश जारी किए जा रहे हैं।
शिक्षकों की लंबे समय से चल रही मांग पर मुहर
उत्तर प्रदेश के विभिन्न शिक्षक संगठनों द्वारा लंबे समय से यह शिकायत की जा रही थी कि रविवार या अन्य त्योहारों की छुट्टियों के दिन भी उन्हें ट्रेनिंग, सर्वे या मीटिंग के नाम पर स्कूल बुला लिया जाता है।
शिक्षकों का तर्क था कि इससे न केवल उनका निजी जीवन प्रभावित होता है, बल्कि मानसिक तनाव भी बढ़ता है। सरकार ने अब इन शिकायतों का संज्ञान लेते हुए साफ कर दिया है कि अवकाश के दिन केवल आपातकालीन स्थितियों को छोड़कर किसी भी शिक्षक को काम पर नहीं बुलाया जाएगा।
मनमानी करने वाले अधिकारियों पर गिरेगी गाज
नए निर्देशों के अनुसार, यदि कोई अधिकारी बिना किसी ठोस या वैधानिक कारण के शिक्षकों को छुट्टी के दिन ड्यूटी पर बुलाता है, तो इसे अनुशासनहीनता माना जाएगा।
शासन ने स्पष्ट किया है कि यदि बहुत अनिवार्य स्थिति में शिक्षक को छुट्टी के दिन काम करना पड़ता है, तो उसे उसके बदले 'प्रतिकार अवकाश' अनिवार्य रूप से दिया जाना चाहिए।
अक्सर देखा गया था कि शिक्षक काम तो करते थे, लेकिन उन्हें बदले में छुट्टी नहीं मिलती थी, अब इस नियम को सख्ती से लागू किया जाएगा।
डिजिटल हाजिरी और ऑनलाइन ट्रेनिंग पर भी स्पष्टीकरण
सरकार डिजिटल हाजिरी और ऑनलाइन डेटा एंट्री के कामों को लेकर भी शिक्षकों के भार को कम करने पर विचार कर रही है। विभाग का मानना है कि शिक्षकों का मुख्य कार्य शिक्षण है, इसलिए उन्हें गैर-जरूरी गैर-शैक्षणिक कार्यों से मुक्त रखा जाना चाहिए।
छुट्टियों के दिन होने वाली ऑनलाइन ट्रेनिंग को भी अब कार्यदिवस के भीतर ही आयोजित करने की योजना बनाई जा रही है।
शिक्षक संगठनों ने किया फैसले का स्वागत
सरकार के इस रुख का प्रदेश के लाखों शिक्षकों ने स्वागत किया है। शिक्षक नेताओं का कहना है कि इस फैसले से शिक्षकों के सम्मान की रक्षा होगी और वे अधिक ऊर्जा के साथ बच्चों को पढ़ा सकेंगे।
अधिकारियों द्वारा अवकाश के दिन मीटिंग बुलाने की परंपरा पर अब पूरी तरह से अंकुश लगेगा। यह निर्णय न केवल सरकारी शिक्षकों बल्कि सहायता प्राप्त विद्यालयों के शिक्षकों पर भी समान रूप से लागू होने की संभावना है।
