गाजियाबाद ट्रिपल सुसाइड: 'सॉरी पापा! हमें कोरियन से प्यार है'; सुसाइड नोट में खुला के-पॉप और ऑनलाइन एडिक्शन का खौफनाक सच

सॉरी पापा! हमें कोरियन से प्यार है; सुसाइड नोट में खुला के-पॉप और ऑनलाइन एडिक्शन का खौफनाक सच
X

विशेषज्ञों का कहना है कि डिजिटल दुनिया में बच्चों का 'आइडेंटिटी क्राइसिस' एक गंभीर बीमारी का रूप ले रहा है।

गाजियाबाद में तीन बहनों ने कोरियन संस्कृति और के-पॉप के प्रति अपनी चरम दीवानगी के चलते जान दे दी। सुसाइड नोट से पता चलता है कि वे खुद को मानसिक रूप से भारतीय नहीं बल्कि कोरियाई मानती थीं और वास्तविक दुनिया से पूरी तरह कट चुकी थीं।

गाजियाबाद: जिले के लोनी इलाके में तीन सगी बहनों द्वारा आत्महत्या किए जाने के मामले में पुलिस को एक पॉकेट डायरी से 8 पन्नों का सुसाइड नोट मिला है। इस नोट ने इस पूरी त्रासदी के पीछे की वजहों से पर्दा उठा दिया है।

सुसाइड नोट में बहनों ने अपने पिता से माफी मांगते हुए ऐसी बातें लिखी हैं, जो आज के डिजिटल युग में बच्चों के मानसिक स्वास्थ्य और 'के-पॉप' (Korean Pop) के प्रति उनके खतरनाक जुनून पर बड़े सवाल खड़े करती हैं।

​'पापा आप भारतीय, हम कोरियाई'

​सुसाइड नोट की शुरुआत में ही बहनों ने अपनी पहचान को लेकर लिखा, "पापा, आप भारतीय हैं, लेकिन हम खुद को कोरियाई मानती हैं। ऐसे में हम किसी भारतीय से शादी कैसे कर सकती हैं?" क्योंकि हाल ही में लड़कियों के पिता ने कहा था कि वह उनकी जल्दी शादी करवा देंगे। उन्होंने खुद को मानसिक रूप से पूरी तरह से कोरियाई मान लिया था।
​'देवु को कोरियन बनाना चाहती थीं बहनें, बॉलीवुड और कार्टून किरदारों से थी नफरत'
​सुसाइड नोट में बहनों ने अपने घर के छोटे बच्चे 'देवु' को लेकर जो लिखा, वह सबसे ज्यादा हैरान करने वाला है। उन्होंने लिखा, "हम देवु को कोरियन लवर बनाना चाहती थीं, लेकिन घर वालों ने उसे बॉलीवुड और भारतीय संस्कृति की ओर धकेल दिया।
हमें अक्षिता और अनाया जैसे नामों से नफरत थी।" बहनों ने नोट में अपनी टीना मम्मी का जिक्र करते हुए लिखा कि जब वे देवु को 'लीनो भइया' और 'कुईना दीदी' जैसे कोरियन रिश्ते बताते थे, तो घर वाले उन्हें टोकते थे और पढ़ाई पर ध्यान देने को कहते थे।
यह बात उन्हें इतनी बुरी लगी कि उन्होंने देवु को अपना दुश्मन मान लिया और खुद को घरवालों से पूरी तरह अलग कर लिया।
​'मार से अच्छी मौत लगेगी': परिवार से ज्यादा कोरियन सितारों को दी जगह
​सुसाइड नोट के शब्द बच्चों के भीतर की गहरी कड़वाहट को बयां करते हैं। उन्होंने साफ लिखा, "हम घरवालों की मार खाने के लिए इस दुनिया में नहीं आए हैं, मार से बढ़िया हमें मौत अच्छी लगेगी। हम घरवालों से ज्यादा के-पॉप और कोरियन स्टार्स को चाहते हैं, वे हमारी जान हैं।"
उन्होंने घरवालों को 'इंडिया और बॉलीवुड' की श्रेणी में रखकर खुद को 'कोरियन और के-पॉप' घोषित कर दिया था। यह एक स्पष्ट 'आइडेंटिटी क्राइसिस' का मामला है जहाँ बच्चों ने अपनी वास्तविक जड़ों को पूरी तरह काट दिया था।
​सुसाइड नोट में पसंदीदा चीजों की लंबी लिस्ट: गेम्स और एनीमेशन का तिलिस्म
​बहनों ने सुसाइड नोट में अपनी उन तमाम पसंदीदा चीजों का जिक्र किया है जिनके लिए वे जीती थीं। इस लिस्ट में कोरियन बीएल ड्रामा, चाइना और जापान के एक्टर्स, थाईलैंड के सांग्स और हॉलीवुड की 'वेडनेसडे एडम्स' जैसे डार्क कैरेक्टर्स शामिल थे।
सिर्फ इतना ही नहीं, वे 'पोपी प्ले टाइम', 'द बेबी इन येलो', 'इविल नन' और 'आइसक्रीम मेन' जैसे डरावने गेम्स के प्रति भी दीवानी थीं। शिनचेन, डोरेमोन और डिज्नी प्रिंसेस जैसे कार्टूनों के साथ-साथ 'टेक्नो गेमर्स' जैसे यूट्यूबर्स उनके जीवन का अभिन्न हिस्सा बन चुके थे, जिसे उन्होंने लिखा कि "हम इन्हें अपने दिल से भी ज्यादा पसंद करते थे।"
​के-पॉप और कोरियन संस्कृति के प्रति सनक
​डायरी के पन्नों में साफ लिखा है कि वे अपने परिवार या पिता से ज्यादा के-पॉप और कोरियन कलाकारों से प्यार करती थीं। उन्होंने लिखा, "सॉरी पापा! के-पॉप को हम तुमसे ज्यादा चाहते हैं।"
पुलिस जांच में सामने आया है कि तीनों बहनें दिन-रात कोरियन ड्रामे (K-dramas) देखती थीं और उनके सोशल मीडिया अकाउंट्स भी इसी तरह के कंटेंट से भरे हुए थे। उनका यह जुनून धीरे-धीरे एक सनक में तब्दील हो गया था।
​8 पन्नों का सुसाइड नोट और 'सॉरी' का जिक्र
​पुलिस को जो पॉकेट डायरी मिली है, उसमें 8 पन्नों का लंबा सुसाइड नोट है। इसमें हर बहन ने अपनी भावनाओं को अलग-अलग व्यक्त किया है। उन्होंने बार-बार 'सॉरी पापा' और 'सॉरी मम्मी' लिखा है।
उन्होंने यह भी लिखा कि वे इस दुनिया में खुद को फिट महसूस नहीं कर रही हैं और उनकी असल खुशी उसी काल्पनिक दुनिया में है जिसे वे स्क्रीन पर देखती हैं। सुसाइड नोट में किसी बाहरी व्यक्ति पर कोई आरोप नहीं लगाया गया है, बल्कि इसे एक सामूहिक भावनात्मक फैसला बताया गया है।
​ऑनलाइन गेमिंग और सोशल मीडिया एडिक्शन
​जांच में यह भी पता चला है कि लड़कियां ऑनलाइन गेमिंग और सोशल मीडिया के जरिए विदेशी लोगों के संपर्क में थीं। वे घंटों ऑनलाइन बिताती थीं, जिससे वे अपने वास्तविक परिवार और सामाजिक जीवन से पूरी तरह कट गई थीं।
इंटरनेट पर मिली 'काल्पनिक पहचान' और असल जिंदगी के बीच का तालमेल बिगड़ने के कारण वे भारी मानसिक तनाव में थीं। पुलिस अब उनके मोबाइल फोन और सर्च हिस्ट्री की बारीकी से जांच कर रही है ताकि यह पता चल सके कि क्या उन्हें किसी ने उकसाया था।
WhatsApp Button व्हॉट्सऐप चैनल से जुड़ें WhatsApp Logo

Tags

Next Story