अंतरिक्ष के नायक शुभांशु शुक्ला को 'अशोक चक्र': गणतंत्र दिवस पर राष्ट्रपति द्रौपदी मुर्मू करेंगी सम्मानित

गणतंत्र दिवस पर राष्ट्रपति द्रौपदी मुर्मू करेंगी सम्मानित
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विंग कमांडर शुभांशु शुक्ला को भारत के पहले मानवयुक्त अंतरिक्ष मिशन 'गगनयान' के लिए तैयार किया जा रहा है।

Axiom-4 मिशन के लिए चुने गए शुभांशु ने फाइटर पायलट से अंतरिक्ष यात्री तक का सफर तय कर देश का गौरव बढ़ाया है।

लखनऊ : उत्तर प्रदेश की राजधानी लखनऊ के लाल और भारतीय वायुसेना के विंग कमांडर शुभांशु शुक्ला ने एक बार फिर देश का नाम वैश्विक पटल पर रौशन किया है। गणतंत्र दिवस 2026 के पावन अवसर पर राष्ट्रपति द्रौपदी मुर्मू उन्हें देश के सर्वोच्च शांतिपूर्ण वीरता पुरस्कार 'अशोक चक्र' से नवाजेंगी।


यह सम्मान उन्हें अंतरिक्ष मिशन में उनके अदम्य साहस, उत्कृष्ट सेवा और 'Axiom-4' मिशन के जरिए भारत की नई पहचान बनाने के लिए दिया जा रहा है। शुभांशु शुक्ला का यह सफर एक फाइटर पायलट से लेकर अंतरिक्ष यात्री बनने तक की प्रेरणादायक दास्तां है।

​लखनऊ से अंतरिक्ष तक का ऐतिहासिक सफर

​लखनऊ में जन्मे और पले-बढ़े शुभांशु शुक्ला ने अपनी मेहनत और जुनून के दम पर यह मुकाम हासिल किया है। भारतीय वायुसेना में एक जांबाज फाइटर पायलट के रूप में अपनी सेवाएं देने के बाद, उनका चयन इसरो (ISRO) के महात्वाकांक्षी 'गगनयान' मिशन के लिए किया गया।

हाल ही में उन्होंने अंतरराष्ट्रीय अंतरिक्ष स्टेशन (ISS) के लिए प्रस्तावित Axiom-4 मिशन के जरिए अंतरिक्ष की गहराइयों को छूने की तैयारी पूरी की है। उनकी इस उपलब्धि ने न केवल यूपी बल्कि पूरे भारत को गौरवान्वित किया है।

​गणतंत्र दिवस पर मिलेगा सर्वोच्च सम्मान

​26 जनवरी को कर्तव्य पथ पर आयोजित होने वाले गणतंत्र दिवस समारोह में राष्ट्रपति द्वारा शुभांशु शुक्ला को अशोक चक्र प्रदान किया जाएगा। शांति काल में दिया जाने वाला यह सबसे बड़ा सैन्य सम्मान उनकी उस वीरता और समर्पण का प्रतीक है, जो उन्होंने देश के अंतरिक्ष कार्यक्रमों और वायुसेना के मिशनों में दिखाया है। वह उन चुनिंदा भारतीयों में शामिल हो गए हैं जिन्होंने अंतरिक्ष में तिरंगा लहराने का गौरव प्राप्त किया है।

​Axiom-4 और गगनयान मिशन की महत्वपूर्ण कड़ी

​विंग कमांडर शुभांशु शुक्ला को भारत के पहले मानवयुक्त अंतरिक्ष मिशन 'गगनयान' के लिए तैयार किया जा रहा है। इसके साथ ही, भारत-अमेरिका अंतरिक्ष सहयोग के तहत उन्हें 'Axiom-4' मिशन के लिए 'प्राइम एस्ट्रोनॉट' के रूप में चुना गया है।

उनकी यह उड़ान भारत के भविष्य के अंतरिक्ष अभियानों के लिए मील का पत्थर साबित होगी। विशेषज्ञों का मानना है कि शुभांशु की यह सफलता नई पीढ़ी के युवाओं के लिए विज्ञान और रक्षा क्षेत्र में करियर बनाने का नया रास्ता खोलेगी।

​यूपी और लखनऊ में जश्न का माहौल

​जैसे ही शुभांशु शुक्ला को अशोक चक्र दिए जाने की घोषणा हुई, लखनऊ सहित पूरे उत्तर प्रदेश में खुशी की लहर दौड़ गई। उनके परिजनों और शिक्षकों ने इस खबर पर गर्व व्यक्त करते हुए इसे उनकी कड़ी तपस्या का फल बताया है।

सोशल मीडिया पर भी 'लखनऊ के लाल' को बधाइयां देने वालों का तांता लगा हुआ है। मुख्यमंत्री और राज्य के अन्य गणमान्य व्यक्तियों ने भी शुभांशु की इस ऐतिहासिक उपलब्धि की सराहना की है।

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