अयोध्या में सजेगा ऋषियों का दरबार: राम मंदिर परिसर में खुलेंगे 7 नए उप-मंदिर, पुजारियों की होगी बंपर भर्ती

इन मंदिरों में पूजा-अर्चना के लिए ट्रस्ट बड़े पैमाने पर पुजारियों की भर्ती और प्रशिक्षण कर रहा है, जिससे रामायण दर्शन और भव्य होगा।
अयोध्या : अयोध्या में राम जन्मभूमि परिसर अब केवल मुख्य मंदिर तक सीमित नहीं रहेगा, बल्कि इसे एक भव्य धार्मिक संकुल के रूप में विकसित किया जा रहा है।
श्री राम जन्मभूमि तीर्थ क्षेत्र ट्रस्ट ने परिसर के भीतर सात महत्वपूर्ण उप-मंदिरों के निर्माण और उन्हें भक्तों के लिए खोलने की योजना को अंतिम रूप दे दिया है। इन मंदिरों में रामायण काल के प्रमुख पात्रों और ऋषियों की प्रतिमाएं स्थापित की जाएंगी, जिससे श्रद्धालुओं को संपूर्ण रामायण दर्शन का अनुभव हो सकेगा।
इन नए मंदिरों में नियमित पूजा-पाठ और अनुष्ठान के लिए ट्रस्ट ने बड़े पैमाने पर नए पुजारियों की भर्ती प्रक्रिया शुरू करने का भी निर्णय लिया है।
रामायण काल के सात महान पात्रों को समर्पित होंगे उप-मंदिर
राम मंदिर परिसर के परकोटे के भीतर और आसपास सात अलग-अलग उप-मंदिरों का निर्माण कार्य तेजी से चल रहा है। ये मंदिर महर्षि वाल्मीकि, महर्षि वशिष्ठ, महर्षि विश्वामित्र, महर्षि अगस्त्य, निषाद राज, माता शबरी और देवी अहिल्या को समर्पित होंगे।
ट्रस्ट का मानना है कि इन मंदिरों की स्थापना से समाज के हर वर्ग और रामायण के हर महत्वपूर्ण प्रसंग को उचित सम्मान मिलेगा।
इन मंदिरों के खुलने से श्रद्धालुओं की भीड़ का प्रबंधन भी बेहतर होगा क्योंकि भक्त मुख्य मंदिर के साथ-साथ इन विग्रहों के दर्शन के लिए भी समय व्यतीत कर सकेंगे।
पुजारियों की भर्ती के लिए कड़े मानक और चयन प्रक्रिया
नए मंदिरों के संचालन के लिए ट्रस्ट को बड़ी संख्या में प्रशिक्षित और योग्य पुजारियों की आवश्यकता है। इसके लिए एक औपचारिक भर्ती अभियान चलाया जा रहा है, जिसमें उम्मीदवारों की योग्यता के लिए कड़े मानक तय किए गए हैं।
भर्ती होने वाले पुजारियों को न केवल वेदों और कर्मकांड का गहरा ज्ञान होना चाहिए, बल्कि उनकी जीवनशैली और आचरण भी रामानंदीय परंपरा के अनुरूप होना अनिवार्य है।
चयनित पुजारियों को नियुक्ति से पहले विशिष्ट प्रशिक्षण दिया जाएगा ताकि वे रामलला की सेवा और उप-मंदिरों की मर्यादा के अनुसार अनुष्ठान संपन्न कर सकें।
गुरुकुल पद्धति से प्रशिक्षित होंगे नए अर्चक
ट्रस्ट ने पुजारियों की भर्ती के साथ-साथ उनके प्रशिक्षण के लिए एक व्यवस्थित ढांचा तैयार किया है। भर्ती किए गए नए पुजारियों को अयोध्या के वरिष्ठ संतों और विद्वानों के मार्गदर्शन में गुरुकुल पद्धति से प्रशिक्षित किया जाएगा।
इसमें उन्हें मंदिर की सुरक्षा, श्रद्धालुओं के साथ व्यवहार और विशिष्ट उत्सवों के दौरान होने वाले विशेष पूजन विधानों की बारीकियां सिखाई जाएंगी। यह प्रशिक्षण सुनिश्चित करेगा कि सभी उप-मंदिरों में सेवा-पूजा की पद्धति एक समान और शास्त्रसम्मत बनी रहे।
श्रद्धालुओं के लिए बढ़ेंगी सुविधाएं और धार्मिक अनुभव
इन उप-मंदिरों के खुलने से अयोध्या आने वाले रामभक्तों का धार्मिक अनुभव और भी समृद्ध हो जाएगा।
ट्रस्ट परिसर के भीतर ऐसे रास्तों का निर्माण कर रहा है जिससे श्रद्धालु क्रमवार तरीके से सभी सात ऋषियों और पात्रों के दर्शन कर सकें। इन मंदिरों के आसपास हरियाली और बैठने की व्यवस्था भी की जा रही है ताकि लोग वहां बैठकर ध्यान और सुमिरन कर सकें।
यह पहल न केवल धार्मिक है, बल्कि अयोध्या को विश्व स्तरीय आध्यात्मिक केंद्र बनाने की दिशा में एक बड़ा कदम मानी जा रही है।
सुरक्षा और प्रबंधन की नई रूपरेखा
बड़ी संख्या में पुजारियों की नियुक्ति और नए मंदिरों के खुलने से परिसर की सुरक्षा व्यवस्था में भी बदलाव किए जाएंगे। प्रत्येक उप-मंदिर के लिए अलग से सुरक्षा घेरा और सीसीटीवी निगरानी सुनिश्चित की जा रही है।
पुजारियों और सेवादारों के लिए विशेष पहचान पत्र जारी किए जाएंगे ताकि परिसर की सुरक्षा के साथ कोई समझौता न हो।
साथ ही, श्रद्धालुओं की बढ़ती संख्या को देखते हुए मंदिर प्रशासन ने भीड़ प्रबंधन के लिए डिजिटल टोकन और कतार प्रणाली को और अधिक प्रभावी बनाने की योजना बनाई है।
