संगम तट पर आस्था का 'प्रयागवाल नगर': सुरक्षा,स्वच्छता और सुविधा के अभेद्य कवच में सजेगा माघ मेला 2026

सुरक्षा,स्वच्छता और सुविधा के अभेद्य कवच में सजेगा माघ मेला 2026
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आधुनिकता के साथ-साथ इस मेले में परंपराओं का भी संगम दिखेगा।

सीएम योगी आदित्यनाथ ने सुरक्षा, स्वच्छता और 950 बीघे में बसे 'प्रयागवाल नगर' की व्यवस्थाओं की समीक्षा की। मेले में AI सर्विलांस, क्यूआर कोड और बाइक टैक्सी के साथ सख्त सुरक्षा घेरा रहेगा।

प्रयागराज : उत्तर प्रदेश की आध्यात्मिक राजधानी प्रयागराज में संगम की रेती पर तंबुओं का एक नया आध्यात्मिक शहर बस चुका है।

3 जनवरी, पौष पूर्णिमा के पवित्र स्नान के साथ 'माघ मेला 2026' का विधिवत आगाह होने जा रहा है। संयम, साधना और भक्ति की त्रिवेणी में इस बार 12 से 15 करोड़ श्रद्धालुओं के आगमन की संभावना है।

मुख्यमंत्री योगी आदित्यनाथ ने स्पष्ट निर्देश दिए हैं कि मेला क्षेत्र में 'अराजकता' के लिए कोई स्थान नहीं है और हर श्रद्धालु की सुरक्षा व सुविधा राज्य सरकार की सर्वोच्च प्राथमिकता है। 44 दिनों तक चलने वाले इस मेले में 4 लाख से अधिक कल्पवासी जप-तप करेंगे।

मुख्यमंत्री की सख्त समीक्षा: अधिकारियों को फील्ड पर उतरने के निर्देश

मुख्यमंत्री योगी आदित्यनाथ ने वीडियो कॉन्फ्रेंसिंग के माध्यम से उच्चस्तरीय समीक्षा बैठक कर अधिकारियों को कड़े लहजे में निर्देशित किया है। सीएम ने कहा कि किसी भी श्रद्धालु को असुविधा नहीं होनी चाहिए।

उन्होंने प्रयागराज सहित वाराणसी, अयोध्या और मथुरा जैसे प्रमुख केंद्रों के अधिकारियों को घाटों की स्वच्छता, निर्बाध बिजली, और महिलाओं के लिए विशेष चेंजिंग रूम बनाने के निर्देश दिए।

मुख्यमंत्री ने साफ किया कि वरिष्ठ अधिकारी केवल कार्यालय में न बैठें, बल्कि स्वयं फील्ड पर उतरकर व्यवस्थाओं का निरीक्षण करें।

प्रयागवाल नगर: पहली बार कल्पवासियों के लिए 950 बीघे का नया शहर

इस वर्ष माघ मेले में एक ऐतिहासिक पहल की गई है। कल्पवासियों की भारी संख्या को देखते हुए प्रशासन ने मेला क्षेत्र में पहली बार 'प्रयागवाल नगर' के नाम से एक अलग शहर बसाया है।

लगभग 950 बीघे में फैला यह नगर विशेष रूप से कल्पवासियों के जप-तप और संकल्प के लिए आरक्षित किया गया है।

कुल 800 हेक्टेयर में फैले मेला क्षेत्र में इस बार श्रद्धालुओं की सुगमता के लिए घाटों की लंबाई में भी 50 प्रतिशत की वृद्धि की गई है, ताकि मुख्य स्नान पर्वों पर भीड़ का दबाव कम रहे।

स्नान पर्वों का कार्यक्रम: 3 जनवरी से 15 फरवरी तक आस्था का प्रवाह

माघ मेला 2026 के मुख्य स्नान पर्वों की तिथियां निर्धारित हो चुकी हैं। इसकी शुरुआत 3 जनवरी को 'पौष पूर्णिमा' से होगी, जिसमें 15 से 25 लाख श्रद्धालुओं के आने का अनुमान है।

इसके बाद 14 जनवरी को मकर संक्रांति, 18 जनवरी को मौनी अमावस्या, 23 जनवरी को बसंत पंचमी, 01 फरवरी को माघी पूर्णिमा और 15 फरवरी को महाशिवरात्रि के साथ मेले का समापन होगा। सीएम ने इन तिथियों पर स्वास्थ्य सेवाओं, एम्बुलेंस और गोताखोरों की अतिरिक्त तैनाती के निर्देश दिए हैं।

सुरक्षा का हाई-टेक घेरा: AI सर्विलांस और सोशल मीडिया पर पैनी नजर

मेले की सुरक्षा को इस बार आर्टिफिशियल इंटेलिजेंस और डिजिटल तकनीक से लैस किया गया है। भीड़ प्रबंधन के लिए AI सर्विलांस और रीयल टाइम मॉनिटरिंग का उपयोग होगा।

अफवाह फैलाने वालों पर सख्ती बरतने के लिए एक विशेष सोशल मीडिया सेल सक्रिय रहेगा। मुख्यमंत्री ने स्पष्ट किया है कि संगठनों के नाम पर दबाव बनाने वाले या गुंडागर्दी करने वाले तत्वों के खिलाफ कठोरतम कार्रवाई की जाएगी।

साथ ही, अवैध टैक्सी स्टैंडों को हटाकर जाम की समस्या से मुक्ति दिलाने के भी निर्देश दिए गए हैं।

नवाचार और सुविधाएं: ऐप आधारित टैक्सी और QR कोड का उपयोग

श्रद्धालुओं की सुविधा के लिए पहली बार मेला क्षेत्र में ऐप आधारित 'बाइक टैक्सी' की शुरुआत की जा रही है। जगह-जगह क्यूआर कोड और हाई-टेक सूचना केंद्र स्थापित किए गए हैं।

यातायात को सुगम बनाने के लिए सड़कों से अवैध अतिक्रमण हटाने और लोक निर्माण विभाग को स्थाई हेलीपैड के लिए भूमि चिन्हित करने के निर्देश दिए गए हैं।

इसके अतिरिक्त, शीत लहर को देखते हुए रैन बसेरों में अलाव और प्रकाश की चाक-चौबंद व्यवस्था की गई है ताकि कोई भी खुले में सोने को मजबूर न हो।

स्वच्छता और पर्यावरण: जीरो लिक्विड डिस्चार्ज मॉडल और प्लास्टिक मुक्त मेला

माघ मेला 2026 को 'जीरो लिक्विड डिस्चार्ज मॉडल' पर विकसित किया जा रहा है। पूरे मेला क्षेत्र में सिंगल यूज प्लास्टिक पर पूर्ण प्रतिबंध रहेगा।

स्वच्छता सुनिश्चित करने के लिए 16,650 शौचालय बनाए गए हैं और 3300 सफाई मित्र 24×7 तैनात रहेंगे। सीएम ने नगर विकास विभाग को निर्देश दिए हैं कि संक्रामक रोगों को रोकने के लिए शुद्ध पेयजल और साफ-सफाई पर विशेष ध्यान दिया जाए।

नाविकों और होटलों द्वारा मनमाना किराया वसूलने पर भी रोक लगाने के सख्त आदेश दिए गए हैं।

विरासत का सम्मान: लोक अभिलेखों और पांडुलिपियों का प्रदर्शन

आधुनिकता के साथ-साथ इस मेले में परंपराओं का भी संगम दिखेगा। इस बार मेला क्षेत्र में श्रद्धालुओं को 19वीं और 20वीं शताब्दी के माघ मेलों से जुड़े दुर्लभ लोक अभिलेख और पांडुलिपियां देखने को मिलेंगी।

यह प्रदर्शनी आगंतुकों को प्रयागराज के गौरवशाली इतिहास और मेले के प्राचीन स्वरूप से परिचित कराएगी। मुख्यमंत्री के विजन के अनुसार, यह मेला आस्था, सुरक्षा, स्वच्छता और संवेदनशील प्रशासन की एक अनूठी मिसाल पेश करेगा।


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