200 रुपये के मानदेय से 8 बार विधायक बनने तक का सफर: नहीं रहे संघर्ष के प्रतीक विजय सिंह गोंड

नहीं रहे संघर्ष के प्रतीक विजय सिंह गोंड
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विजय सिंह गोंड पिछले काफी समय से किडनी संबंधी गंभीर समस्याओं से ग्रसित थे।

सोनभद्र की दुद्धी सीट से सपा विधायक विजय सिंह गोंड का लखनऊ PGI में निधन हो गया। 8 बार विधायक रहे गोंड पिछले 3 महीनों से कोमा में थे।

लखनऊ : सोनभद्र की दुद्धी विधानसभा से समाजवादी पार्टी के कद्दावर विधायक और आदिवासियों के हक की आवाज बुलंद करने वाले नेता विजय सिंह गोंड का लखनऊ के पीजीआई अस्पताल में निधन हो गया है।

लगभग तीन महीनों से गंभीर बीमारी और कोमा से जूझ रहे गोंड ने इलाज के दौरान अंतिम सांस ली। उनके निधन से न केवल समाजवादी पार्टी, बल्कि उत्तर प्रदेश की राजनीति और विशेषकर जनजातीय समाज ने अपना सबसे बड़ा पैरवीकार खो दिया है।

लंबी बीमारी और संघर्षपूर्ण अंतिम क्षण

विजय सिंह गोंड पिछले काफी समय से किडनी संबंधी गंभीर समस्याओं से ग्रसित थे। उनकी दोनों किडनियां पूरी तरह काम करना बंद कर चुकी थीं, जिसके कारण उन्हें लखनऊ के पीजीआई में भर्ती कराया गया था।

पिछले तीन महीनों से उनकी स्थिति अत्यंत नाजुक बनी हुई थी और वे वेंटिलेटर के सहारे कोमा में थे। डॉक्टरों के भरसक प्रयासों के बावजूद उनके स्वास्थ्य में सुधार नहीं हुआ और अंततः गुरुवार सुबह उन्होंने इस नश्वर संसार को त्याग दिया। उनके निधन की सूचना मिलते ही सोनभद्र से लेकर लखनऊ तक शोक की लहर दौड़ गई।

प्रारंभिक जीवन और संघर्ष की शुरुआत

विजय सिंह गोंड का जन्म एक साधारण आदिवासी परिवार में हुआ था। उनकी राजनीतिक यात्रा किसी फिल्मी कहानी से कम नहीं है। 1979 में उन्होंने अपने करियर की शुरुआत महज 200 रुपये के मानदेय पर की थी।

संसाधनों के अभाव के बावजूद उनके मन में समाज सेवा और आदिवासियों के अधिकारों के प्रति अटूट लगन थी। इसी संघर्ष और जनता के प्रति उनके समर्पण ने उन्हें राजनीति की मुख्यधारा में स्थापित किया।

रिकॉर्ड 8 बार विधायक बनने का गौरव

उत्तर प्रदेश की राजनीति में विजय सिंह गोंड एक ऐसा नाम थे, जिनके कद का अंदाजा इसी बात से लगाया जा सकता है कि वे 8 बार विधायक निर्वाचित हुए।

उन्होंने पहली बार 1980 में निर्दलीय चुनाव जीतकर अपनी राजनीतिक धमक दिखाई थी। इसके बाद वे कांग्रेस और फिर समाजवादी पार्टी के साथ जुड़े रहे। उनकी लोकप्रियता का आलम यह था कि क्षेत्र बदलने और राजनीतिक लहरों के बावजूद जनता ने उन पर हमेशा भरोसा जताया। उन्हें उत्तर प्रदेश में आदिवासी राजनीति का 'पितामह' माना जाता है।

आरक्षण के लिए सुप्रीम कोर्ट तक लड़ी लड़ाई

विजय सिंह गोंड केवल चुनाव जीतने वाले नेता नहीं थे, बल्कि वे एक दूरदर्शी समाज सुधारक भी थे। सोनभद्र की दुद्धी और ओबरा जैसी सीटों को अनुसूचित जनजाति (ST) के लिए आरक्षित कराने में उनका सबसे बड़ा योगदान रहा।

इस हक को पाने के लिए उन्होंने सड़क से लेकर सुप्रीम कोर्ट तक लंबी कानूनी लड़ाई लड़ी। उनकी इसी मेहनत का नतीजा है कि आज इन क्षेत्रों में आदिवासियों को राजनीतिक प्रतिनिधित्व मिल पा रहा है।

समाजवादी पार्टी के प्रति निष्ठा और सम्मान

वे समाजवादी पार्टी के संस्थापक मुलायम सिंह यादव के बेहद करीबी माने जाते थे और अखिलेश यादव के भी भरोसेमंद साथियों में से एक थे। उनके निधन की खबर मिलते ही सपा प्रमुख अखिलेश यादव स्वयं पीजीआई अस्पताल पहुंचे और उनके पार्थिव शरीर को नमन किया।

अखिलेश यादव ने उनके परिजनों को ढांढस बंधाया और कहा कि विजय सिंह गोंड का जाना समाजवादी पार्टी के लिए एक ऐसी क्षति है जिसे कभी पूरा नहीं किया जा सकेगा।

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