योगी सरकार का हंटर: यूपी के 68 हजार कर्मचारियों की सैलरी रोकी, संपत्ति का ब्योरा न देना पड़ा भारी

जो कर्मचारी जल्द से जल्द अपना विवरण पोर्टल पर अपडेट कर देंगे, उनका वेतन बहाल कर दिया जाएगा।
लखनऊ: उत्तर प्रदेश की योगी सरकार ने भ्रष्टाचार पर जीरो टॉलरेंस की नीति को आगे बढ़ाते हुए राज्य के 68,000 से अधिक सरकारी कर्मचारियों का वेतन रोक दिया है।
यह कड़ा फैसला उन कर्मियों के खिलाफ लिया गया है, जिन्होंने बार-बार चेतावनी के बावजूद अपनी चल-अचल संपत्ति का विवरण 'मानव संपदा पोर्टल' पर अपलोड नहीं किया था।
शासन के इस आदेश से प्रशासनिक गलियारों में हड़कंप मच गया है। सरकार ने स्पष्ट कर दिया है कि जब तक कर्मचारी अपनी संपत्ति का पूरा ब्योरा पोर्टल पर दर्ज नहीं करेंगे, तब तक उनका वेतन जारी नहीं किया जाएगा।
मानव संपदा पोर्टल पर संपत्ति सार्वजनिक करने का था आदेश
राज्य सरकार ने सभी सरकारी विभागों के अधिकारियों और कर्मचारियों के लिए अपनी संपत्तियों का विवरण सार्वजनिक करना अनिवार्य कर दिया था। इसके लिए 'मानव संपदा पोर्टल' पर डेटा फीड करने की अंतिम तिथि कई बार बढ़ाई गई, ताकि सभी कर्मी अपनी चल-अचल संपत्ति की जानकारी दे सकें।
हालांकि, इसके बावजूद बड़ी संख्या में कर्मचारियों ने इस निर्देश की अनदेखी की, जिसके बाद सरकार ने सख्त रुख अपनाते हुए वेतन रोकने की कार्रवाई का आदेश जारी कर दिया।
68 हजार से अधिक कर्मचारियों का रुका वेतन
विभागीय आंकड़ों के अनुसार, प्रदेश भर में लगभग 68,000 कर्मचारी ऐसे पाए गए हैं जिन्होंने अब तक पोर्टल पर अपनी संपत्ति का विवरण साझा नहीं किया है। इनमें पुलिस विभाग से लेकर शिक्षा, स्वास्थ्य और राजस्व जैसे महत्वपूर्ण विभागों के कर्मी शामिल हैं।
शासन ने निर्देश दिया है कि केवल उन्हीं कर्मचारियों को वेतन आहरित किया जाए जिन्होंने पोर्टल पर अपनी जिम्मेदारी पूरी की है। अन्य सभी का वेतन तत्काल प्रभाव से तब तक के लिए फ्रीज रहेगा जब तक वे प्रक्रिया पूरी नहीं कर लेते।
भ्रष्टाचार पर अंकुश और पारदर्शिता की कोशिश
योगी सरकार का यह फैसला प्रशासनिक पारदर्शिता सुनिश्चित करने के उद्देश्य से लिया गया है। सरकार का मानना है कि कर्मचारियों द्वारा अपनी संपत्ति का ब्योरा देने से आय से अधिक संपत्ति के मामलों और भ्रष्टाचार पर अंकुश लगाने में मदद मिलेगी।
अधिकारियों का कहना है कि यह नियम केवल छोटे कर्मचारियों के लिए ही नहीं, बल्कि बड़े अधिकारियों के लिए भी समान रूप से लागू है। इससे सरकारी तंत्र में जवाबदेही बढ़ेगी और जनता के बीच सरकार की छवि और अधिक पारदर्शी होगी।
कर्मचारी संगठनों में हलचल और आगे की राह
सरकार के इस फैसले के बाद राज्य के विभिन्न कर्मचारी संगठनों में खासी बेचैनी देखी जा रही है। कई संगठनों ने तकनीकी दिक्कतों का हवाला देते हुए पोर्टल पर डेटा फीड करने के लिए अतिरिक्त समय की मांग की है।
हालांकि, सरकार ने संकेत दिए हैं कि नियम का पालन न करने वालों के साथ कोई रियायत नहीं बरती जाएगी। जो कर्मचारी जल्द से जल्द अपना विवरण पोर्टल पर अपडेट कर देंगे, उनका वेतन बहाल कर दिया जाएगा, अन्यथा उन्हें विभागीय जांच और अन्य कानूनी कार्रवाइयों का भी सामना करना पड़ सकता है।
