धर्मसत्ता बनाम राजसत्ता: अविमुक्तेश्वरानंद पर प्रशासन सख्त, माघ मेले से स्थायी प्रतिबंध की चेतावनी; रामानुजाचार्य ने दी आंदोलन की धमकी

प्रशासन ने चेतावनी दी है कि नियमों के उल्लंघन के चलते उन्हें मेले से प्रतिबंधित किया जा सकता है।
प्रयागराज: संगम नगरी प्रयागराज माघ मेला क्षेत्र में मौनी अमावस्या के दिन हुई अव्यवस्था को लेकर प्रशासन ने स्वामी अविमुक्तेश्वरानंद सरस्वती के खिलाफ कड़ा रुख अख्तियार कर लिया है। संगम क्षेत्र में सुरक्षा घेरा तोड़ने और प्रतिबंधित मार्ग पर बग्घी ले जाने के गंभीर आरोपों के बाद, अब प्रशासन उनकी संस्था को आवंटित जमीन और सभी सरकारी सुविधाएं वापस लेने की तैयारी में है।
प्रशासन ने उन्हें चेतावनी दी है कि उनके इन कृत्यों के कारण उन्हें भविष्य में माघ मेले में प्रवेश से हमेशा के लिए प्रतिबंधित किया जा सकता है।
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- शंकराचार्य विवाद के बीच मुख्यमंत्री योगी आदित्यनाथ ने बड़ा बयान देते हुए कहा कि किसी भी व्यक्ति को सनातन परंपराओं को बाधित करने का अधिकार नहीं है और एक सच्चे संत के लिए राष्ट्र और धर्म से बढ़कर कुछ भी नहीं होता। उन्होंने स्पष्ट शब्दों में कहा कि संत समाज का दायित्व है कि वह समाज को जोड़ने का काम करे, न कि भ्रम या विवाद की स्थिति पैदा करे।
- शंकराचार्य स्वामी अविमुक्तेश्वरानंद ने प्रशासन पर नाराजगी जताते हुए कहा कि प्रशासन सिर्फ नोटिस भेजने का खेल खेल रहा है। उन्होंने साफ कहा, “अभी तक मेरा मौनी अमावस्या का स्नान नहीं हुआ है, तो बसंत पंचमी का स्नान कैसे कर सकता हूं? पहले मुझे मौनी अमावस्या का स्नान कराया जाए, उसके बाद ही दूसरा स्नान संभव है।”
- प्रसिद्ध कथावाचक अनिरुद्धाचार्य महाराज शंकराचार्य स्वामी अविमुक्तेश्वरानंद से मिलने उनके शिविर पहुंचे थे, लेकिन मुलाकात नहीं हो पाई। बताया जा रहा है कि उस समय स्वामी अविमुक्तेश्वरानंद प्रेरणा यात्रा पर निकले हुए थे।
- जगद्गुरु रामानुजाचार्य ने इस पूरे मामले पर प्रशासन से पहल करने की मांग की है। उन्होंने कहा कि प्रशासन को शंकराचार्य स्वामी अविमुक्तेश्वरानंद से माफी मांगकर विवाद को समाप्त करना चाहिए। साथ ही चेतावनी दी कि यदि जरूरत पड़ी तो संत समाज दिल्ली में आंदोलन करने से भी पीछे नहीं हटेगा।

बैरियर तोड़कर संगम नोज तक बग्घी ले जाने का आरोप
18 जनवरी 2026 को मौनी अमावस्या के पावन पर्व पर स्वामी अविमुक्तेश्वरानंद पर त्रिवेणी पांटून पुल नंबर 02 पर लगे सुरक्षा बैरियर को जबरन तोड़ने का आरोप है।
नोटिस के अनुसार, संगम अपर मार्ग पर बिना अनुमति के वे बग्घी पर सवार होकर भीड़ के बीच घुसे, जबकि सुरक्षा कारणों से उस संवेदनशील क्षेत्र में किसी भी प्रकार के वाहन का प्रवेश पूरी तरह वर्जित था।
लाखों श्रद्धालुओं की सुरक्षा और भगदड़ की आशंका
मेला प्रशासन का कहना है कि उस समय संगम पर स्नानार्थियों की अत्यधिक भीड़ थी और लाउडस्पीकर से लगातार केवल पैदल आवागमन के निर्देश दिए जा रहे थे।
प्रतिबंधित क्षेत्र में बग्घी ले जाने के प्रयास से वहां भगदड़ जैसी स्थिति उत्पन्न हो सकती थी, जिससे श्रद्धालुओं की जान को गंभीर खतरा पैदा हो गया। प्रशासन ने इसे सुरक्षा व्यवस्था को छिन्न-भिन्न करने वाला कृत्य माना है।
प्रशासनिक कार्य में बाधा और पुलिस से विवाद
नोटिस में उल्लेख है कि जब सुरक्षा बलों और मेला प्रशासन ने स्वामी जी को वाहन ले जाने से रोका, तो वहां विवाद की स्थिति उत्पन्न की गई।
लाखों की संख्या में स्नान कर रहे श्रद्धालुओं के बीच सुरक्षा नियमों की अनदेखी करने से पुलिस को भीड़ प्रबंधन में अत्यधिक कठिनाइयों का सामना करना पड़ा। इसे प्रशासनिक आदेशों की सीधी अवहेलना बताया गया है।
शंकराचार्य पद के उपयोग पर कानूनी सवाल
प्रशासन ने स्वामी जी द्वारा 'शंकराचार्य' पद के उपयोग पर भी आपत्ति जताई है। नोटिस में कहा गया है कि उनके आधिकारिक रूप से शंकराचार्य होने पर माननीय सर्वोच्च न्यायालय द्वारा रोक लगाई गई है।
इसके बावजूद मेले में स्वयं को शंकराचार्य बताते हुए बोर्ड लगाना न्यायालय की अवमानना की श्रेणी में आता है।
24 घंटे का अल्टीमेटम और सुविधाएं निरस्त करने की चेतावनी
मेला प्राधिकरण ने स्वामी अविमुक्तेश्वरानंद को 24 घंटे के भीतर स्पष्टीकरण देने का निर्देश दिया है। प्रशासन ने साफ किया है कि यदि संतोषजनक जवाब नहीं मिला, तो उनकी संस्था को दी गई भूमि और बिजली-पानी जैसी सभी सुविधाएं तत्काल प्रभाव से निरस्त कर दी जाएंगी।
इसके साथ ही, उन्हें सदैव के लिए माघ मेले में प्रवेश से प्रतिबंधित करने का निर्णय भी लिया जा सकता है।
