सपा का नया चुनावी दांव: PDA पंचांग' के जरिए 2027 की चुनावी बिसात, क्या बदलेगा यूपी का सियासी मिजाज?

अब सबकी नजरें इस बात पर टिकी हैं कि जनता इस 'PDA पंचांग' को किस तरह स्वीकार करती है।
लखनऊ: समाजवादी पार्टी के राष्ट्रीय अध्यक्ष अखिलेश यादव ने साल 2026 की शुरुआत एक अनोखे अंदाज में की है। उत्तर प्रदेश विधानसभा चुनाव 2027 से पहले सपा ने अपना 'PDA पंचांग' जारी कर चुनावी बिगुल फूंक दिया है।
इस पंचांग को केवल एक कैलेंडर के रूप में नहीं, बल्कि पिछड़ों, दलितों और अल्पसंख्यकों को एकजुट करने के एक बड़े राजनीतिक हथियार के रूप में देखा जा रहा है।
अखिलेश यादव इस पंचांग के जरिए घर-घर तक अपनी सामाजिक न्याय की विचारधारा को पहुंचाने की कोशिश कर रहे हैं।
पंचांग के जरिए सामाजिक न्याय का नया संदेश
समाजवादी पार्टी का यह विशेष पंचांग महापुरुषों के विचारों और सामाजिक एकता के संदेशों से सुसज्जित है। इसमें डॉ. भीमराव अंबेडकर, डॉ. राम मनोहर लोहिया और नेताजी मुलायम सिंह यादव जैसे दिग्गजों की जयंती और उनके संघर्षों को प्रमुखता दी गई है।
पार्टी का मानना है कि यह कैलेंडर लोगों को उनके अधिकारों और सामाजिक न्याय के प्रति जागरूक करेगा, जिससे जमीनी स्तर पर एक मजबूत राजनीतिक आधार तैयार हो सके।
चुनावी वर्ष से पहले माहौल बनाने की कवायद
उत्तर प्रदेश जैसे बड़े राज्य में चुनावी जमीन तैयार करने के लिए समय और रणनीति दोनों की आवश्यकता होती है। अखिलेश यादव ने 2026 की शुरुआत में ही इसे लॉन्च करके यह साफ कर दिया है कि वे भाजपा के खिलाफ किसी भी मोर्चे पर पीछे नहीं रहना चाहते।
पंचांग के माध्यम से सपा कार्यकर्ता अब गांव-गांव जाकर लोगों से जुड़ेंगे, जिससे पार्टी को चुनाव से काफी पहले एक संगठनात्मक बढ़त मिलने की उम्मीद है।
भाजपा के सांस्कृतिक एजेंडे का जवाब
अक्सर देखा जाता है कि भाजपा विभिन्न सांस्कृतिक और धार्मिक प्रतीकों के जरिए जनता तक पहुँच बनाती है। इसी की काट के रूप में अखिलेश यादव ने 'PDA' (पिछड़ा, दलित, अल्पसंख्यक) का अपना पंचांग पेश किया है।
यह पंचांग समाजवादी विचारधारा को एक सांस्कृतिक पुट देने की कोशिश है, ताकि विपक्षी दल के हिंदुत्व और सांस्कृतिक कार्ड का मुकाबला सामाजिक न्याय के कार्ड से किया जा सके।
क्या 2027 में गेमचेंजर साबित होगा PDA कार्ड?
सियासी जानकारों का मानना है कि अखिलेश यादव की यह रणनीति बेहद सोच-समझकर तैयार की गई है। यदि यह पंचांग और इसके पीछे का संदेश ग्रामीण इलाकों और दलित-पिछड़ा वर्ग के घरों तक मजबूती से पहुँच जाता है, तो आगामी विधानसभा चुनावों में समाजवादी पार्टी के पक्ष में एक बड़ी लहर पैदा हो सकती है। अब सबकी नजरें इस बात पर टिकी हैं कि जनता इस 'PDA पंचांग' को किस तरह स्वीकार करती है।
