लखनऊ: उत्तर प्रदेश की राजधानी लखनऊ के निराला नगर स्थित राष्ट्रीय स्वयंसेवक संघ के कार्यालय 'भारती भवन' में बुधवार को एक बेहद महत्वपूर्ण बैठक संपन्न हुई। मुख्यमंत्री योगी आदित्यनाथ ने संघ प्रमुख मोहन भागवत से मुलाकात की।
करीब 45 मिनट तक चली इस बंद कमरे की बैठक में उत्तर प्रदेश के आगामी 2027 विधानसभा चुनाव को लेकर रणनीतिक खाका खींचा गया और सरकार व संगठन के बीच तालमेल को लेकर गंभीर चर्चा हुई।
हिंदुत्व की धार और काशी-मथुरा का एजेंडा
बैठक में सबसे अहम चर्चा यूपी में हिंदुत्व के एजेंडे को और धार देने पर हुई। सूत्रों के अनुसार, अयोध्या में राम मंदिर निर्माण के बाद अब काशी और मथुरा जैसे कोर मुद्दों को वैचारिक और सामाजिक रूप से आगे बढ़ाने की तैयारी है। संघ और सरकार का मानना है कि सांस्कृतिक राष्ट्रवाद की लहर को बरकरार रखने के लिए इन मुद्दों पर स्पष्ट रुख अपनाना जरूरी है।
2 लाख कार्यकर्ताओं की फौज और 'लाभार्थी संपर्क'
मिशन 2027 को फतेह करने के लिए संघ ने एक विशाल जमीनी नेटवर्क तैयार करने का प्लान बनाया है:-
2 लाख कार्यकर्ता: संघ के करीब 2 लाख समर्पित कार्यकर्ताओं को बड़ी जिम्मेदारी दी जा सकती है।
घर-घर दस्तक: ये कार्यकर्ता घर-घर जाकर सरकार की योजनाओं का संदेश देंगे और सीधे लाभार्थियों से संपर्क साधेंगे। इसका उद्देश्य सरकार के कामकाज का फीडबैक लेना और वोट बैंक को मजबूत करना है।
SIR अभियान और अवैध घुसपैठियों पर शिकंजा
बैठक में SIR अभियान को लेकर संगठन और सरकार के बीच बेहतर तालमेल बनाने पर जोर दिया गया।
भाजपा समर्थकों को इस अभियान में सक्रिय रहने का संदेश दिया गया है।
इसके अलावा, प्रदेश में अवैध बांग्लादेशियों और घुसपैठियों की पहचान कर उन पर सख्त कार्रवाई करने की रणनीति पर भी मंथन हुआ, जो आंतरिक सुरक्षा और डेमोग्राफी के लिहाज से अहम है।
सोशल इंजीनियरिंग और 'तीसरी पारी' का लक्ष्य
सीएम योगी और मोहन भागवत की इस चर्चा में सोशल इंजीनियरिंग के जरिए हर वर्ग के वोट को साधने की रणनीति बनी। बूथ स्तर तक नेटवर्क को अभेद्य बनाने की कवायद शुरू हो गई है।
लक्ष्य स्पष्ट है—'डबल इंजन' सरकार की तीसरी पारी सुनिश्चित करना। इसके लिए संघ और सरकार अब संयुक्त रूप से मिशन मोड में काम करेंगे।