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लखनऊ : उत्तर प्रदेश विधानसभा में आज वित्त वर्ष 2026-27 का बजट पेश होने से पहले ही सियासी पारा चढ़ गया है। सदन की कार्यवाही शुरू होने से पहले समाजवादी पार्टी के विधायकों ने विधानसभा परिसर में अनोखे और आक्रामक अंदाज में विरोध प्रदर्शन किया। विपक्ष के इस तेवर ने साफ कर दिया है कि बजट सत्र के दौरान सदन के भीतर और बाहर सरकार को कड़ी घेराबंदी का सामना करना पड़ेगा।
मुखौटे पहनकर सपा विधायकों का प्रदर्शन
समाजवादी पार्टी के विधायक आज सुबह विधानसभा की सीढ़ियों पर गले में तख्तियां डालकर और चेहरों पर मुखौटे पहनकर पहुंचे। विधायकों का यह प्रदर्शन बेरोजगारी, बढ़ती महंगाई और कानून व्यवस्था जैसे मुद्दों पर केंद्रित था। सपा विधायकों ने आरोप लगाया कि सरकार सिर्फ आंकड़ों की बाजीगरी कर रही है, जबकि आम जनता और किसान समस्याओं से जूझ रहे हैं।
तख्तियों और नारों से गूंजा विधानसभा परिसर
हाथों में सरकार विरोधी स्लोगन लिखी तख्तियां लेकर सपा विधायक जमकर नारेबाजी करते दिखे। विपक्ष के नेताओं का कहना है कि यह बजट केवल विज्ञापनों तक सीमित है और इसमें युवाओं के रोजगार या किसानों की आय बढ़ाने के लिए कोई ठोस रोडमैप नहीं है। समाजवादी पार्टी ने इस बजट को 'जनविरोधी' करार देते हुए सदन के बाहर अपना कड़ा विरोध दर्ज कराया।
रोजगार और महंगाई पर सरकार को घेरा
प्रदर्शन के दौरान विधायकों ने कहा कि प्रदेश का युवा सड़कों पर है और भर्ती परीक्षाओं में धांधली रुकने का नाम नहीं ले रही है। मुखौटे पहनकर किए गए इस प्रदर्शन के जरिए उन्होंने सरकार पर तंज कसते हुए कहा कि प्रशासन का चेहरा जनता के सामने कुछ और है और हकीकत कुछ और। विधायकों ने मांग की कि सरकार केवल बड़े वादे न करे, बल्कि बजट में युवाओं के लिए वास्तविक रोजगार के अवसरों का खुलासा करे।
किसानों और कानून व्यवस्था पर तीखे सवाल
विपक्ष ने छुट्टा पशुओं की समस्या और गन्ना मूल्य भुगतान जैसे मुद्दों को भी प्रमुखता से उठाया। सपा विधायकों का दावा है कि पिछला बजट भी केवल कागजों पर रहा और धरातल पर विकास कार्य ठप पड़े हैं। इस विरोध प्रदर्शन के कारण विधानसभा परिसर में सुरक्षा के कड़े इंतजाम किए गए और भारी पुलिस बल तैनात रहा।
हंगामेदार सत्र के आसार
बजट पेश होने से ठीक पहले विपक्ष के इस रुख से संकेत मिल रहे हैं कि वित्त मंत्री सुरेश खन्ना का बजट भाषण हंगामे की भेंट चढ़ सकता है। समाजवादी पार्टी ने स्पष्ट कर दिया है कि वह सदन के भीतर भी सरकार को जनहित के मुद्दों पर जवाबदेही के लिए मजबूर करेगी।
