लखनऊ : राष्ट्रीय स्वयंसेवक संघ के सरसंघचालक डॉ. मोहन भागवत अपने गोरखपुर प्रवास के बाद 17 फरवरी से उत्तर प्रदेश की राजधानी लखनऊ के दो दिवसीय दौरे पर रहेंगे। संघ के शताब्दी वर्ष (2025-26) के उपलक्ष्य में आयोजित होने वाले कार्यक्रमों मे शामिल होंगे।
सरसंघचालक यहां 17 और 18 फरवरी को विभिन्न सांगठनिक और सामाजिक बैठकों में हिस्सा लेंगे। उनके इस दौरे को लेकर प्रदेश के गलियारों में राजनीतिक चर्चाएं भी तेज हो गई हैं, क्योंकि माना जा रहा है कि वे भाजपा और संघ के शीर्ष नेताओं के साथ आगामी रणनीतियों पर बैठक कर सकते हैं।
चार प्रमुख बैठकों पर रहेगा जोर
संघ के प्रवक्ता के अनुसार, लखनऊ प्रवास के दौरान डॉ. भागवत चार मुख्य श्रेणियों की बैठकों की अध्यक्षता करेंगे। इनमें कुटुम्ब प्रबोधन, सामाजिक समरसता बैठक, युवा संवाद और प्रबुद्ध वर्ग के साथ जन गोष्ठी शामिल हैं। इन बैठकों का मुख्य उद्देश्य समाज के हर वर्ग को संघ के शताब्दी वर्ष के संकल्पों से जोड़ना है।
वे कार्यकर्ताओं को 'पंच परिवर्तन'—सामाजिक समरसता, नागरिक कर्तव्य, पर्यावरण संरक्षण, परिवार प्रबोधन और स्वदेशी जीवन शैली—के मंत्र को जन-जन तक पहुँचाने का मार्ग दिखाएंगे।
राजनीतिक मुलाकातों के कयास और मिशन 2027
मोहन भागवत का यह दौरा ऐसे समय में हो रहा है जब राज्य में राजनीतिक समीकरणों को लेकर मंथन जारी है। हालांकि संघ इसे पूरी तरह सांगठनिक दौरा बता रहा है, लेकिन सूत्रों का कहना है कि वे मुख्यमंत्री योगी आदित्यनाथ और भाजपा के अन्य वरिष्ठ नेताओं के साथ समन्वय बैठक कर सकते हैं।
राजनीतिक विश्लेषकों का मानना है कि संघ प्रमुख जमीनी स्तर पर फीडबैक ले रहे हैं, ताकि 2027 के विधानसभा चुनावों से पहले संगठन और सरकार के बीच बेहतर तालमेल सुनिश्चित किया जा सके।
शताब्दी वर्ष के संकल्पों की समीक्षा
संघ अपने 100 साल पूरे होने पर हर घर और हर मोहल्ले तक शाखा पहुँचाने के लक्ष्य पर काम कर रहा है। लखनऊ में डॉ. भागवत 'भारती भवन' अवध प्रांत के प्रचारकों और टोली के सदस्यों के साथ उन अभियानों की प्रगति रिपोर्ट देखेंगे, जो पिछले एक साल से चलाए जा रहे हैं। वे इस बात पर विशेष ध्यान देंगे कि समाज के वंचित और दलित वर्गों के बीच संघ की पहुंच कितनी प्रभावी हुई है।
