गौतमबुद्ध नगर (नोएडा) में पिछले कुछ दिनों से जारी हिंसक आंदोलन और श्रमिकों के भारी असंतोष के बीच उत्तर प्रदेश की योगी सरकार ने एक बड़ा निर्णय लिया है। औद्योगिक शांति बहाल करने और लाखों परिवारों के जीवन स्तर को सुधारने के उद्देश्य से सरकार ने न्यूनतम मजदूरी में 21 प्रतिशत तक की भारी बढ़ोतरी का एलान किया है।
यह फैसला ऐसे संवेदनशील समय में आया है जब आंदोलन उग्र रूप ले चुका था और फैक्ट्रियों में कामकाज ठप होने की कगार पर था। सरकार का यह कदम न केवल श्रमिकों के आक्रोश को शांत करने की दिशा में एक बड़ा प्रयास है, बल्कि यह औद्योगिक जगत को यह संदेश भी देता है कि सरकार कानून-व्यवस्था के साथ-साथ श्रमिक हितों के संरक्षण के लिए भी उतनी ही गंभीर है।
राज्य सरकार के इस नए आदेश के बाद नोएडा, ग्रेटर नोएडा और यमुना एक्सप्रेसवे क्षेत्र की हजारों औद्योगिक इकाइयों में कार्यरत लाखों श्रमिकों की आय में सीधा उछाल आएगा। नई दरों के अनुसार, अकुशल, अर्ध-कुशल और कुशल श्रमिकों की श्रेणी में 21 प्रतिशत तक की बढ़ोतरी सुनिश्चित की गई है।
इस फैसले से उन श्रमिकों को सबसे अधिक लाभ होगा जो बढ़ती महंगाई और बुनियादी जरूरतों के लिए संघर्ष कर रहे थे। सरकार ने स्पष्ट किया है कि यह वृद्धि तत्काल प्रभाव से लागू मानी जाएगी और इसका उल्लंघन करने वाली कंपनियों पर सख्त कार्रवाई की जाएगी।
नोएडा के विभिन्न औद्योगिक सेक्टरों में पिछले कुछ दिनों से श्रमिक अपनी मांगों को लेकर सड़कों पर थे, जिसने कई जगहों पर हिंसक रूप ले लिया था। आगजनी और तोड़फोड़ की घटनाओं से करोड़ों के नुकसान की खबरें आ रही थीं।
ऐसे में सरकार ने केवल पुलिस बल के प्रयोग के बजाय 'संवाद और समाधान' की नीति अपनाई। मजदूरी बढ़ाने के इस फैसले को एक बड़े 'डैमेज कंट्रोल' के रूप में देखा जा रहा है। प्रशासन का मानना है कि इस वेतन वृद्धि के बाद श्रमिकों का एक बड़ा वर्ग काम पर वापस लौटेगा और औद्योगिक पहिया फिर से तेजी से घूमने लगेगा।
जहाँ एक ओर श्रम संगठनों ने सरकार के इस फैसले को श्रमिकों के संघर्ष की जीत बताया है, वहीं कुछ औद्योगिक संगठनों ने इस अचानक हुई वृद्धि पर चिंता जताई है। हालांकि, सरकार ने साफ कर दिया है कि 'ईज ऑफ डूइंग बिजनेस' तभी सफल है जब श्रमिक संतुष्ट और सुरक्षित हों।
गौतमबुद्ध नगर प्रशासन को निर्देश दिए गए हैं कि वे फैक्ट्रियों के मालिकों और श्रमिक यूनियनों के बीच समन्वय स्थापित करें ताकि इस बढ़ोतरी को सुचारू रूप से लागू किया जा सके। सरकार का लक्ष्य है कि नोएडा की वैश्विक छवि एक सुरक्षित और श्रमिक-अनुकूल औद्योगिक केंद्र के रूप में बनी रहे।